Sriramkinkar Ji Maharaj/श्रीरामकिंकर जी महाराज
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लेखक:

श्रीरामकिंकर जी महाराज
जन्म : 1 नवम्बर 1924

देहावसान : -9 अगस्त 2002

जन्म से ही होनहार व प्रखर बुद्धि के आप स्वामी रहे हैं। आपकी शिक्षा-दीक्षा जबलपुर व काशी में हुई। स्वभाव से ही अत्यन्त संकोची एवं शान्त प्रकृति के बालक रामकिंकर अपनी अवस्था के बच्चों की अपेक्षा कुछ अधिक गम्भीर थे। एकान्तप्रिय, चिन्तनरत, विलक्षण प्रतिभावाले सरल बालक अपनी शाला में अध्यापकों के भी अत्यन्त प्रिय पात्र थे। बाल्यावस्था से ही आपकी मेधाशक्ति इतनी विकसित थी कि क्लिष्ट एवं गम्भीर लेखन, देश-विदेश का विशद साहित्य अल्पकालीन अध्ययन में ही आपके स्मृति पटल पर अमिट रूप से अंकित हो जाता था। प्रारम्भ से ही पृष्ठभूमि के रूप में माता-पिता के धार्मिक विचार एवं संस्कारों का प्रभाव आप पर पड़ा। परन्तु परम्परानुसार पिता के अनुगामी वक्ता बनने का न तो कोई संकल्प था, न कोई अभिरूचि।

कालान्तर में विद्यार्थी जीवन में पूज्य महाराजश्री के साथ एक ऐसी चामत्कारिक घटना हुई कि जिसके फलस्वरूप आपके जीवन ने एक नया मोड़ लिया। 18 वर्ष की अल्प अवस्था में जब पूज्य महाराजश्री अध्ययनरत थे, तब अपने कुलदेवता श्री हनुमानजी महाराज का आपको अलौकिक स्वप्नदर्शन हुआ, जिसमें उन्होंने आपको वटवृक्ष के नीचे शुभासीन करके दिव्य तिलक कर आशीर्वाद देकर कथा सुनाने का आदेश दिया। स्थूल रूप में इस समय आप बिलासपुर में अपने पूज्य पिता के साथ छुट्टियाँ मना रहे थे। यहाँ पिताश्री की कथा चल रही थी। ईश्वरीय संकल्पनानुसार परिस्थिति भी अचानक कुछ ऐसी बन गई कि अनायास ही, पूज्य महाराजश्री के श्रीमुख से भी पिताजी के स्थान पर कथा कहने का प्रस्ताव एकाएक निकल गया।

आपके द्वारा श्रोता समाज के सम्मुख यह प्रथम भाव प्रस्तुति थी। किन्तु कथन शैली व वैचारिक श्रृंखला कुछ ऐसी मनोहर बनी कि श्रोतासमाज विमुग्ध होकर, तन-मन व सुध-बुध खोकर उसमें अनायास ही बँध गया। आप तो रामरस की भावमाधुरी की बानगी बनाकर, वाणी का जादू कर मौन थे, किन्तु श्रोता समाज आनन्दमग्न होने पर भी अतृप्त था। इस प्रकार प्रथम प्रवचन से ही मानस प्रेमियों के अन्तर में गहरे पैठकर आपने अभिन्नता स्थापित कर ली।

ऐसा भी कहा जाता है कि 20 वर्ष की अल्प अवस्था में आपने एक और स्वप्न देखा, जिसकी प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास के ग्रन्थों के प्रचार एवं उनकी खोजपूर्ण व्याख्या में ही अपना समस्त जीवन समर्पित कर देने का दृढ़ संकल्प कर लिया। यह बात अकाट्य है कि प्रभु की प्रेरणा और संकल्प से जिस कार्य का शुभारम्भ होता है, वह मानवीय स्तर से कुछ अलग ही गति-प्रगति वाला होता है। शैली की नवीनता व चिन्तनप्रधान विचारधारा के फलस्वरूप आप शीघ्र ही विशिष्टतः आध्यात्मिक जगत में अत्यधिक लोकप्रिय हो गए।

ज्ञान-विज्ञान पथ में पूज्यपाद महाराजश्री की जितनी गहरी पैठ थी, उतना ही प्रबल पक्ष, भक्ति साधना का, उनके जीवन में दर्शित होता है। वैसे तो अपने संकोची स्वभाव के कारण उन्होंने अपने जीवन की दिव्य अनुभूतियों का रहस्योद्घाटन अपने श्रीमुख से बहुत आग्रह के बावजूद नहीं किया। पर कहीं-कहीं उनके जीवन के इस पक्ष की पुष्टि दूसरों के द्वारा जहाँ-तहाँ प्राप्त होती रही। उसी क्रम में उत्तराखण्ड की दिव्य भूमि ऋषिकेश में श्रीहनुमानजी महाराज का प्रत्यक्ष साक्षात्कार, निष्काम भाव से किए गए, एक छोटे से अनुष्ठान के फलस्वरूप हुआ। वैसे ही श्री चित्रकूट धाम की दिव्य भूमि में अनेकानेक अलौकिक घटनाएँ परम पूज्य महाराजश्री के साथ घटित हुईं। जिनका वर्णन महाराजश्री के निकटस्थ भक्तों के द्वारा सुनने को मिला। परमपूज्य महाराजश्री अपने स्वभाव के अनुकूल ही इस विषय में सदैव मौन रहे।

प्रारम्भ में भगवान् श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाभूमि वृन्दावन धाम के परमपूज्य महाराज श्री, ब्रह्मलीन स्वामी श्रीअखण्डानन्दजी महाराज के आदेश पर आप वहाँ कथा सुनाने गए। वहाँ एक सप्ताह तक रहने का संकल्प था। पर यहाँ के भक्त एवं साधु-सन्त समाज में आप इतने लोकप्रिय हुए कि उस तीर्थधाम ने आपको ग्यारह माह तक रोक लिया। उन्हीं दिनों में आपको वहाँ के महान् सन्त अवधूत श्रीउड़िया बाबाजी महाराज, भक्त शिरोमणि श्रीहरिबाबाजी महाराज, स्वामी श्रीअखण्डानन्दजी महाराज को भी कथा सुनाने का सौभाग्य मिला। कहा जाता है कि अवधूत पूज्य श्रीउड़िया बाबा, इस होनहार बालक के श्रीमुख से निःसृत, विस्मित कर देने वाली वाणी से इतने अधिक प्रभावित थे कि वे यह मानते थे कि यह किसी पुरूषार्थ या प्रतिभा का परिणाम न होकर के शुद्ध भगवत्कृपा प्रसाद है। उनके शब्दों में - “क्या तुम समझते हो, कि यह बालक बोल रहा है? इसके माध्यम से तो साक्षात् ईश्वरीय वाणी का अवतरण हुआ है।”

इसी बीच अवधूत श्रीउड़िया बाबा से सन्यास दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प आपके हृदय में उदित हुआ और परमपूज्य बाबा के समक्ष अपनी इच्छा प्रकट करने पर बाबा के द्वारा लोक एवं समाज के कल्याण हेतु शुद्ध सन्यास वृत्ति से जनमानस सेवा की आज्ञा मिली।

सन्त आदेशानुसार एवं ईश्वरीय संकल्पानुसार मानस प्रचार-प्रसार की सेवा दिन-प्रतिदिन चारों दिशाओं में व्यापक होती गई। उसी बीच काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से आपका सम्पर्क हुआ। काशी में प्रवचन चल रहा था। उस गोष्ठी में एक दिन भारतीय पुरातत्व और साहित्य के प्रकाण्ड विद्वान एवं चिन्तक श्री वासुदेव शरण अग्रवाल आपकी कथा सुनने के लिये आए और आपकी विलक्षण एवं नवीन चिन्तन शैली से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति श्री वेणीशंकर झा एवं रजिस्ट्रार श्री शिवनन्दनजी दर से च्तवकपहपने (विलक्षण प्रतिभायुक्त) प्रवक्ता के प्रवचन का आयोजन विश्वविद्यालय प्रांगण में रखने का आग्रह किया। आपकी विद्वत्ता इन विद्वानों के मनोमस्तिष्क को ऐसे उद्वेलित कर गई कि आपको अगले वर्ष से ‘विजिटिंग प्रोफेसर’ के नाते काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में व्याख्यान देने के लिये निमन्त्रित किया गया। इसी प्रकार काशी में आपका अनेक सुप्रसिद्ध साहित्यकार जैसे श्री हजारी प्रसाद द्विवेदी, श्री महादेवी वर्मा से साक्षात्कार एवं शीर्षस्थ सन्तप्रवर का सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।

पूज्य महाराजश्री परम्परागत कथावाचक नहीं हैं, क्योंकि कथा उनका साध्य नहीं, साधन है। उनका उद्देश्य है भारतीय जीवन पद्धति की समग्र खोज अर्थात् भारतीय मानस का साक्षात्कार। उन्होंने अपने विवेक प्रदीप्त मस्तिष्क से, विशाल परिकल्पना से श्रीरामचरितमानस के अन्तर्रहस्यों का उद्घाटन किया है। आपने जो अभूतपूर्व एवं अनूठी दिव्य दृष्टि प्रदान की है, जो भक्ति-ज्ञान का विश्लेषण तथा समन्वय, शब्द ब्रह्म के माध्यम से विश्व के सम्मुख रखा है, उस प्रकाध स्तम्भ के दिग्दर्शन में आज सारे इष्ट मार्ग आलोकित हो रहे हैं। आपके अनुपम शास्त्रीय पाण्डित्य द्वारा, न केवल आस्तिकों का ही ज्ञानवर्धन होता है अपितु नयी पीढ़ी के शंकालु युवकों में भी धर्म और कर्म का भाव संचित हो जाता है। ‘कीरति भनिति भूति भली सोई’ ........ के अनुरूप ही आपने ज्ञान की सुरसरि अपने उदार व्यक्तित्व से प्रबुद्ध और साधारण सभी प्रकार के लोगों में प्रवाहित करके ‘बुध विश्राम’ के साथ-साथ सकल जन रंजनी बनाने में आप यज्ञरत हैं। मानस सागर में बिखरे हुए विभिन्न रत्नों को संजोकर आपने अनेक आभूषण रूपी ग्रन्थों की सृष्टि की है। मानस-मन्थन, मानस-चिन्तन, मानस-दर्पण, मानस-मुक्तावली, मानस-चरितावली जैसी आपकी अनेकानेक अमृतमयी अमर कृतियाँ हैं जो दिग्दिगन्तर तक प्रचलित रहेंगी। आज भी वह लाखों लोगों को रामकथा का अनुपम पीयूष वितरण कर रही हैं और भविष्य में भी अनुप्राणित एवं पे्ररित करती रहेंगी। तदुपरान्त अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन नामक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था के भी आप अध्यक्ष रहे।

निष्कर्षतः आप अपने प्रवचन, लेखन और सम्प्रति शिष्य परम्परा द्वारा जिस रामकथा पीयूष का मुक्तहस्त से वितरण कर रहे हैं, वह जन-जन के तप्त एवं शुष्क मानस में नवशक्ति का सिंचन कर रही है, शान्ति प्रदान कर समाज में आध्यात्मिक एवं दार्शनिक चेतना जाग्रत् कर रही है।

परमपूज्य महाराजश्री का स्वर उसी वंशी के समान है, जो ‘स्वर सन्धान’ कर सभी को मन्त्रमुग्ध कर देती है। वंशी में भगवान् का स्वर ही गूँजता है। उसका कोई अपना स्वर नहीं होता। परमपूज्य महाराजश्री भी एक ऐसी वंशी हैं, जिसमें भगवान् के स्वर का स्पन्दन होता है। साथ-साथ उनकी वाणी के तरकश से निकले, वे तीक्ष्ण विवेक के बाण अज्ञान-मोह-जन्य पीड़ित जीवों की भ्रान्तियों, दुर्वृत्तियों एवं दोषो का संहार करते हैं। यों आप श्रद्धा और भक्ति की निर्मल मन्दाकिनी प्रवाहित करते हुए महान् लोक-कल्याणकारी कार्य सम्पन्न कर रहे हैं।

रामायणम् आश्रम अयोध्या जहाँ महाराजश्री ने 9 अगस्त सन् 2002 को समाधि ली वहाँ पर अनेकों मत-मतान्तरों वाले लोग जब साहित्य प्राप्त करने आते हैं तो महाराजश्री के प्रति वे ऐसी भावनाएँ उड़ेलते हैं कि मन होता है कि महाराजश्री को इन्हीं की दृष्टि से देखना चाहिए। वे अपना सबकुछ न्यौछावर करना चाहते हैं उनके चिन्तन पर। महाराजश्री के चिन्तन ने रामचरितमानस के पूरे घटनाक्रम को और प्रत्येक पात्र की मानसिकता को जिस तरह से प्रस्तुत किया है उसको पढ़कर आपको ऐसा लगेगा कि आप उस युग के एक नागरिक हैं और वे घटनाएँ आपके जीवन का सत्य हैं।

अंगद चरित्र

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

हमारे जीवन रूपी लंका में मोह का स्वरूप और समाधान   आगे...

अहंकार के रूप

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

जीव का सबसे बड़ा आन्तरिक शत्रु यदि कोई है तो वह है ‘अहं’। संसार में भी संघर्ष टकराहट का मुख्य हेतु है यह ‘‘मैं’’।   आगे...

आदर्श मानव समाज

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

रामचरितमानस के मर्मज्ञ चिंतक ‘युगतुलसी’ आचार्य श्री रामकिंकरजी की प्रवचन माला   आगे...

काम

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

भक्ति का मुख्य उद्देश्य   आगे...

कृपा

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

विशेष रूप से कलियुग के संदर्भ में   आगे...

कृपा और पुरुषार्थ

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 45

जीवन में कृपा और पुरुषार्थ का स्वरूप.....   आगे...

केवट

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 120

स्वामी रामकिंकर जी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक....   आगे...

क्रोध

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

क्रोध की वृत्ति संसार के समस्त प्राणियों की प्रकृति में दिखायी देती है   आगे...

चातक चतुर राम श्याम घन के

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 55

मानस पर लिखे गये लेखों का संग्रह   आगे...

ज्ञानदीपक (भाग - 1 एवं 2)

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 130

ज्ञानदीपक - दो भागों में   आगे...

ज्ञानदीपक द्वितीय भाग

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 70

जड़ चेतन की वास्तविकता   आगे...

ज्ञानदीपक प्रथम भाग

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 60

जड़-चेतन की वास्तविकता   आगे...

तस्मै श्री गुरुवे नमः

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

प्रस्तुत है श्रीरामकिंकर जी महाराज का जीवन आलोक...   आगे...

तुलसी की दृष्टि

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

मानस में वर्णित घटनाओं का वर्णन....   आगे...

तुलसी रघुनाथ गाथा

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 45

तुलसीदास को व्याख्यायित करती कृति.....   आगे...

तुलसीदास मेरी दृष्टि में

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 45

गोस्वामी तुलसीदास के विभिन्न आयामों का वर्णन....   आगे...

दंडक बनु

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 35

दण्डक वन में श्रीराम, एक दृष्टि   आगे...

धर्मसार भरत

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 120

परम पूज्य स्वामी रामकिंकर जी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक   आगे...

नवधा भक्ति (1, 2)

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 160

नवधा भक्ति - दो भागों में   आगे...

नवधा भक्ति द्वितीय भाग

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

भगवान राम द्वारा शबरी को उपदेश...   आगे...

नवधा भक्ति प्रथम भाग

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

भगवान राम द्वारा शबरी को उपदेश.....   आगे...

नाम रामायण

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

परम पूज्य स्वामी रामकिंकर जी पर आधारित पुस्तक.....   आगे...

परशुराम संवाद

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 15

लक्ष्मण-परशुराम संवाद   आगे...

प्रसाद

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

प्रसाद का महत्व...   आगे...

प्रेममूर्ति भरत

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 120

परमपूज्य महाराज श्री रामकिंकर जी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक.....   आगे...

भक्तत्रयी

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 120

सृष्टि में नश्वरता और परिवर्तन की प्रक्रिया केवल भौतिक पदार्थों के विषय में यथार्थ नहीं...   आगे...

भवानीशंकरौ वन्दे

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 200

प्रस्तुत है शिव-चरित....   आगे...

महाराज श्रीदशरथ

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 15

महाराज श्रीदशरथ का चरित्र-चित्रण   आगे...

महारानी कैकेयी

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

कैकेयी के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तक.....   आगे...

मानस एवं गीता का तुलनात्मक विवेचन - 1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 140

परम पूज्य स्वामी रामकिंकरजी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक....   आगे...

मानस एवं गीता का तुलनात्मक विवेचन - 2

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 160

सम्पूर्ण मानव जीवन पर आधारित पुस्तक....   आगे...

मानस और भागवत में पक्षी

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

मानस और भागवत में पक्षी का महत्व   आगे...

मानस के चार घाट

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 60

परम पूज्य महाराज श्रीरामकिंकर जी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक...   आगे...

मानस चरितावली भाग 1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

मानस के 24 भिन्न पात्रों के चरित्र का स्वतंत्र मूल्यांकन....   आगे...

मानस चरितावली भाग 2

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

मानस के 24 भिन्न पात्रों के चरित्र का स्वतंत्र मूल्यांकन....   आगे...

मानस चिकित्सा

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

परम पूज्य महाराज श्रीराम किंकरजी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म पर आधारित पुस्तक....   आगे...

मानस चिंतन भाग 3

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 175

मानस के कुछ प्रमुख प्रसंग....   आगे...

मानस चिन्तन भाग-1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 275

प्रस्तुत है मानस चिंतन माला का प्रथम पुष्प - भगवान के अवतार का रहस्य...   आगे...

मानस दर्पण भाग-1 शक्ति शान्ति भक्ति

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस दर्पण माला का प्रथम पुष्प - शक्ति, शान्ति और भक्ति की खोज   आगे...

मानस दर्पण भाग-3

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 30

रामकिंकर जी द्वारा परम्परागत रामचरितमानस पर प्रवचन   आगे...

मानस दर्पण भाग-4 शिव विवाह

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

प्रस्तुत है मानस दर्पण माला का चतुर्थ पुष्प - शिव विवाह   आगे...

मानस पंचामृत

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 55

काम, क्रोध, लोभ, दया-दान, कृपा तथा कथा का स्वरूप और उसकी महिमा, इस ग्रन्थ के प्रतिपाद्य विषय हैं...   आगे...

मानस प्रवचन चतुर्थ पुष्प

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत हैं मानस प्रवचन...   आगे...

मानस प्रवचन पंचम पुष्प

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन....   आगे...

मानस प्रवचन भाग-11

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का ग्यारहवाँ पुष्प - मंत्र राजु नित जपहिं तुम्हारा...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-12

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का बारहवाँ पुष्प - काम क्रोध मद मान न मोहा...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-13

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का तेरहवाँ पुष्प - लोभ न छोभ न राग न द्रोहा...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-14

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का चौदहवाँ पुष्प - सबके प्रिय सबके हितकारी...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-15

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का पन्द्रहवाँ पुष्प - जागत सोवत सरन तुम्हारी...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-16

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का सोलहवाँ पुष्प - स्वामि सखा पितु मातु गुरु...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-4 अन्तर दर्पण

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 140

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का चौथा पुष्प - अन्तर दर्पण...   आगे...

मानस प्रवचन भाग-8

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का आठवाँ पुष्प - जिन्हके श्रवन समुद्र समाना....   आगे...

मानस प्रवचन भाग-9

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 95

प्रस्तुत है मानस प्रवचन माला का नौवाँ पुष्प - लोचन चातक जिन्ह करि राखे...   आगे...

मानस मंथन-1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

स्वामी रामकिंकर जी महाराज के द्वारा धर्म पर आधारित पुस्तक.....   आगे...

मानस मुक्तावली भाग-1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 400

प्रस्तुत ग्रंथ में रामचरितमानस की 100 चौपाइयों के विशद विवेचन का प्रथम भाग...   आगे...

मानस मुक्तावली भाग-2

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 400

प्रस्तुत ग्रंथ में रामचरितमानस की 100 चौपाइयों के विशद विवेचन का द्वितीय भाग...   आगे...

मानस रोग (1, 2, 3)

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 350

मानस रोग - 3 भागों में   आगे...

मानस रोग भाग 1

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

अन्तःकरण की समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान.....   आगे...

मानस रोग भाग 2

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

मन के रोगों का विश्लेषण....   आगे...

मानस रोग भाग 3

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

प्रस्तुत है मानस रोग की तीसरा भाग....   आगे...

मुक्ति

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

प्रस्तुत प्रसंग मानस रोगों से मुक्ति का प्रसंग है.....   आगे...

राम गुन गाऊँ

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

महाराजश्री द्वारा विरचित काव्य संग्रह.....   आगे...

रामकथा मंदाकिनी

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 110

रामकथा की महिमा......   आगे...

रामकथा ससि किरन समाना

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 50

परम पूज्य आचार्य स्वामी रामकिंकर जी महाराज के द्वारा लिखी गई धर्म से सम्बन्धित पुस्तक.....   आगे...

रामायण के पात्र

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

रामायण के पात्रों का उल्लेख   आगे...

लक्ष्मण चरित्र

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 120

रामकिंकरजी महाराज के द्वारा धर्म के ऊपर लोगों को उपदेश देने के सम्बन्ध में पुस्तक....   आगे...

लोभ, दान व दया

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 35

प्रस्तुत ग्रन्थ में मोह से उत्पन्न लोभ के शूल की सूत्रात्मक व्याख्या है...   आगे...

वन पथ में श्रीराम

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 35

1998 के प्रवचन सत्र की परिणति....   आगे...

वन्दे विदेह तनया

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

प्रभु श्रीराम के जीवन के विषय में जानकारी...   आगे...

विजय, विवेक और विभूति

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

विजय, विवेक और विभूति को देखने की दृष्टि   आगे...

विनय पत्रिका

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 60

स्वामी रामकिंकरजी महाराज के द्वारा लिखी गई पुस्तक...   आगे...

विभीषण शरणागति

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

श्रीरामकिंकर जी महाराज का दिव्य प्रवचन...   आगे...

शरणागति का स्वरूप

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 55

मानस शिरोमणि पूज्य श्री रामकिंकरजी महाराज के मार्मिक प्रवचनों का संग्रह....   आगे...

शिव तत्त्व

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 90

शिव-तत्त्व का उड़िया अनुवाद....   आगे...

शील सिन्धु राघव माधुर्य मूर्ति माधव

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 320

मानसरोवर और समुद्र में डुबकी लगाकर मुझे समग्रता का बोध होता है। इस ग्रन्थ का उद्देश्य भी यही है।   आगे...

श्री हनुमानजी महाराज

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

श्रीहनुमान का चरित्र-चित्रण....   आगे...

श्रीराम और श्रीकृष्ण

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

श्रीराम और श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण   आगे...

श्रीराम का शील

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 50

श्रीराम के शील का वर्णन....   आगे...

श्रीराम धर्मसेतु संरक्षक

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

धर्म की संरचना का उद्देश्य   आगे...

श्रीराम नाम

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

राम नाम का महत्व....   आगे...

श्रीराम विवाह

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

विवाह का प्रमुख देवता काम है। पर आज काम राम का विरोधी न रहकर सहयोगी   आगे...

श्रीराम-गीता

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 35

श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को भक्ति ज्ञान का उपदेश....   आगे...

साधक-साधन

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 55

नाम, रूप, लीला और धाम आदि विषयों की तात्त्विक व्याख्या.....   आगे...

साधुचरित

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 35

साधु जीवन का चरित्र-चित्रण.....   आगे...

सुग्रीव और विभीषण

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

सुग्रीव और विभीषण का चरित्र-चित्रण....   आगे...

सुग्रीव चरित्र

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 100

प्रस्तुत है सुग्रीव के चरित्र का तात्विक विवेचन..   आगे...

सुन्दरकाण्ड

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 25

सुन्दरकाण्ड की महिमा....   आगे...

सुन्दरकाण्ड की सुन्दरता

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 110

सुन्दरकाण्ड की सुन्दरता....   आगे...

हनुमत् चरित (मानस मंथन-2)

श्रीरामकिंकर जी महाराज

मूल्य: Rs. 150

मानस मंथन का द्वितीय रत्न हनुमत् चरित   आगे...

 

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