और झाड़ू धन्य हो गई - कुशलेन्द्र श्रीवास्तव Aur Jhadu dhany ho gai - Hindi book by - Kushalendra Shrivastav
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और झाड़ू धन्य हो गई

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

प्रकाशक : अनुराधा प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :90
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 10122
आईएसबीएन :9789385083341

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समाज की समसामायिक बाह्य एवं अन्तर्दशा से सम्बन्धित अनेक समस्याओं को रेखांकित किया है।

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

और झाड़ू धन्य हो गई शीर्षक व्यंग्य संग्रह के अन्तर्गत 28 लेखों में देश तथा समाज की समसामायिक बाह्य एवं अन्तर्दशा से सम्बन्धित अनेक समस्याओं को रेखांकित किया है। व्यक्ति और समाज दो अलग-अलग सत्ता नहीं हैं वरन व्यक्तियों के सभ्य समूह का नाम समाज है। समाज में सभी लोग अपनी-अपनी बात को अपने-अपने तरीके से कहते हैं। इस विधा का उद्देश्य भी अन्य विधाओं की भांति व्यक्ति और समाज की संवेदना को जगाना है। व्यंग्य संग्रह में हास-परिहास के साथ सुधारवादी स्वर प्रमुखता से छिपा हुआ है।


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