विदेशों के महाकाव्य - गोपीकृष्ण गोपेश Videshon Ke Mahakavya - Hindi book by - Gopikrishna Gopesh
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विदेशों के महाकाव्य

गोपीकृष्ण गोपेश

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :291
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 10183
आईएसबीएन :9789352211883

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

विदेशों के महाकाव्य इस पुस्तक में अंग्रेजी लेखिका एच.ए. गुएरकर की ‘द बुक ऑ़फ एपिक’ से चुनकर विभिन्न भाषाओं के महाकाव्यों में से आठ कथाओं का हिन्दी अनुवाद संकलित है। किसी भी भाषा की रचनात्मक समृद्धि का पता सिर्फ इतने से नहीं चलता कि उसमें मौलिक रचनाएँ कितनी हुर्इं। देश-विदेश की अन्यान्य भाषाओं की कृतियों के अनुवाद से भी भाषा-विशेष समृद्ध होती है। अनुवाद से हमारी भाषा की ग्रहणशीलता का प्रमाण भी मिलता है और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता की व्यापकता का भी। इस दृष्टि से हिन्दी के सामर्थ्य को उजागर करने में अनुवादक के रूप में जो महत्त्वपूर्ण भूमिका श्री गोपीकृष्ण गोपेश ने निभायी, वह अविस्मरणीय है।

उन्होंने कई भाषाओं की क्लासिक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद करके हिन्दी के प्रबुद्ध पाठकों और साहित्यानुरागियों को यह अवसर उपलब्ध कराया कि जिन भाषाओं में उनकी गति नहीं है, उन भाषाओं की भी कालजयी कृतियों का आस्वादन वे कर सकें।

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