डंक - वसंत कानेटकर Dank - Hindi book by - Vasant Kanetkar
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> डंक

डंक

वसंत कानेटकर

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :133
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 10994
आईएसबीएन :9788180311819

Like this Hindi book 0

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

पात्र-परिचय


श्याम सुन्दर : प्रख्यात सिने साप्ताहिक ‘स्टार्स एण्ड मून’ के सम्पादक
देविका : श्याम सुन्दर की पत्नी
बाबी : बैंक क्लर्क
रोज़ा : बाबी की पत्नी तथा होटल में रिसेपनिस्ट
वाय. वाय. : (यशवन्त यादव) समाचार-पत्र में नाट्य समीक्षा लेखक
के. दृष्टद्युम्न : (असली नाम दी. त्र. दिमोठे) रेलवे में बुकिंग क्लर्क
कै रघुवीर : मिलिटरी में कैप्टन
उल्का : प्रसिद्ध फिल्म स्टार स्वरूप कुमार की लड़की
अविनाश : कनाडा में मान्ट्रियल के एक अस्पताल मे सर्जन
सुप्रिया : अविनाश की पत्नी
नीता : देविका के पहले पति द्वारा पुत्री

प्रथम अंक

प्रथम दृश्य


[ एक आलीशान मकान का अत्याधुनिक ड्राइंग रूम। प्रख्यात सिने साप्ताहिक ‘स्टार्स एण्ड मून’ के सम्पादक श्याम सुन्दर और उनकी पत्नी देविका रानी यहाँ रहते हैं। पर्दा खुलता है, सुबह का समय है हाल में अन्धेरा है, किन्तु बालकनी और टेरेस से प्रकाश आ रहा है। हाल में एक बड़ी सी घड़ी टँगी हुई है जो ६ बजा रही है। टेलीफोन की घन्टी बज रही है। देविका उम्र ३५ वर्ष किन्तु दिखने में खबसूरत। हाल में साइट आन करती है और रिसीवर उठाती है। ]

श्याम सुन्दर : हलो, मैं श्याम सुन्दर।
देविका : गुड मार्निंग डियर।
श्याम सुन्दर : गुड मार्निंग, रानी एवरीथिंग ओ. के.।
देविका : आफ कोर्स। (Of Course) तुम कहाँ से बोल रहे हो ?
श्याम सुन्दर : अपनी ही बिल्डिंग के ग्राउन्ड फ्लोर (Ground Floor) से।
देविका : वहाँ से क्यों ? सीधे ऊपर क्यों नहीं आये ?

श्याम सुन्दर : मैंने यह जानने के लिये फोन किया, स्वरूप कुमार आया था न ?
देविका : सिर्फ आया ही नहीं, अभी तक यहीं है और बालकनी में बेहोश पड़ा है।
श्याम सुन्दर : क्या ? अभी तक यहीं है। तो फिर क्या करें ?
देविका : उसका पार्सल बनाकर उसके घर पहुँचाना पड़ेगा। सुनो, स्वरूप कुमार की कार नीचे खड़ी है ऐसा करो उसके ड्राइवर को लेकर तुम ऊपर आ जाओ।
श्याम सुन्दर : सर्टनली (Gertainly)। और लिफ्ट मैन को जगा दूँ ?
देविका : नहीं। उसे जगाने की जरूरत नहीं, उसका ड्राइवर ही उसे ले जायेगा।
श्याम सुन्दर : ओ. के.। (देविका रिसीवर नीचे रखती है...... और बालकनी की तरफ जाकर देखती है घन्टी बजती है और वापस आकर दरवाजा खोलती है। श्याम सुन्दर और उसके पीछे ड्राइवर अन्दर आते हैं, बालकनी में जाते हैं और बेहोश स्वरूप कुमार को उठाकर लाते हैं।)

श्याम सुन्दर : (ड्राइवर से) मैं नीचे तक आऊँ ?
ड्राईवर : नहीं साहब मैं खुद ही ले जाऊँगा। मुझे रोज की आदत हो गयी है।
देविका : श्याम, मेरे खयाल से तुम्हें लिफ्ट तक जाना चाहिये। (श्याम सुन्दर और ड्राइवर स्वरूप कुमार को बाहर ले जाते हैं। देविका दरवाजे पर खड़ी होकर सब देख रही है। थोड़ी देर में श्याम सुन्दर वापस आता है। श्याम सुन्दर ४५ साल का एवं आकर्षक व्यक्तित्व का व्यक्ति है।)
श्याम सुन्दर : (अन्दर आकर बैठता है।) हाँ, अब सुनाओ मेरी रानी रात कैसी रही।
देविका : पहले तुम सुनाओ। तुम्हारी कैसी रही।
श्याम सुन्दर : फैन्टास्टिक (Fantastic)।
देविका : बड़ी तीखी मिर्च थी न ?
श्याम सुन्दर : अरे छोड़ ? तीखी होती तो भी मैं उसे कच्ची ही खा जाता।
देविका : तुम्हारी बहादुरी का पता है मुझे।

श्याम सुन्दर : हाऊ एबाउट यू (How About You) ? कुछ मजा भी लिया, या रात भर शराब ही पीता रहा। लेकिन डालिंग एक बात कहूँ, पचास साल का बूढ़ा हो गया अब स्वरूप कुमार वह कहाँ से मजा लेगा ?

लोगों की राय

No reviews for this book