हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग - नामवर सिंह Hindi Ke Vikas Mein Apbhransh Ka Yog - Hindi book by - Namvar Singh
लोगों की राय

भाषा एवं साहित्य >> हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग

हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग

नामवर सिंह

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2014
पृष्ठ :292
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13132
आईएसबीएन :9788180310728

Like this Hindi book 0

हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग प्रस्तुत पुस्तक का संशोधित एवं परिवर्धित संस्करण पाठकों के समक्ष नयी साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत है जिसमे

हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग प्रस्तुत पुस्तक का संशोधित एवं परिवर्धित संस्करण पाठकों के समक्ष नयी साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत है जिसमे परवर्ती अपभ्रंश और आरंभिक हिंदी सम्बन्धी नवीन सामग्री, अपभ्रंश और हिंदी वाकया-विन्यास का तुलनात्मक विवेचन, अपभ्रष के कुछ विशिष्ट तदभव तथा देशी शब्द और उनके हिंदी रूपों की सूची, अपभ्रंश के प्रायः सभी सूचित और ज्ञात ग्रंथों की सूची, अपभ्रंश के मुख्या कवियों, काव्यों और काव्य-प्रवृत्तियों की विस्तृत समीक्षा, अपभ्रंश और हिंदी साहित्य के ऐतिहासिक सम्बन्ध पर विशेष विचारों का समावेश किया गया है। आशा है पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा पाठकों का मार्ग दर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book