निराला की कविता और काव्यभाषा - रेखा खरे Nirala Ki Kavityan Aur Kavyabhasha - Hindi book by - Rekha Khare
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निराला की कविता और काव्यभाषा

रेखा खरे

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2015
पृष्ठ :208
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13227
आईएसबीएन :9789352210640

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प्रस्तुत पुस्तक में काव्यभाषा के संवेदनात्मक स्तर पर रचना-प्रक्रिया के जटिल और संशिलष्ट स्वरुप के परिक्षण का प्रयत्न किया गया है

प्रस्तुत पुस्तक में काव्यभाषा के संवेदनात्मक स्तर पर रचना-प्रक्रिया के जटिल और संशिलष्ट स्वरुप के परिक्षण का प्रयत्न किया गया है। निराला की स्थिति सभी छायावादी कवियों में विशिष्ट रही है। उनका काव्य-व्यक्तित्व सबसे अधिक गत्यात्मक, प्रखर तथा अन्वेषी रहा है, जिसका जिवंत साक्ष्य प्रस्तुत करती है उनकी काव्यभाषा। काव्यभाषा को लेकर निराला के मानस में रचनात्मक बेचैनी उनके विविध और गतिशील भाषा-स्टारों में देखि जा सकती है। व्यक्ति के रूप में तो एक लम्बे अरसे तक वे उपेक्षित रहे, कवि के रूप में भी उनकी प्रतिभा को सही रूप में बहुत समय तक नहीं पहचाना गया। बाहर मैं कर दिया गया हूँ। भीतर, पर, भर दिया गया हूँ, में कवि के इस मानसिक द्वंद्व की ध्वनि सुनी जा सकती है।

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