समकालीन हिन्दी कविता - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी Samkalin Hindi Kavita - Hindi book by - Vishwanath Prasad Tiwari
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समकालीन हिन्दी कविता

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :244
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13291
आईएसबीएन :9788180315367

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समकालीनता एक जीवन-दृष्टि है जहाँ कविता अपने समय का आकलन करती है - तर्क और संवेदना की सम्मिलित भूमि पर

जो कुछ लिखा जा रहा है, वह सब समकालीन नहीं है। समकालीनता एक जीवन-दृष्टि है जहाँ कविता अपने समय का आकलन करती है - तर्क और संवेदना की सम्मिलित भूमि पर। यह एक प्रकार से मुठभेड़ है, सर्जनात्मक धरातल पर, जहाँ वस्तुओं के प्रचलित नाम, अर्थ बदल जाते हैं। जीवन को एक नया विन्यास मिलता है कविता में। और यह सब होता है, एक नए मुहावरे में, जिसकी पहचान का कार्य सरल नहीं होता। जिसे मुक्तिबोध ने अभिव्यक्ति के खतरे उठाना कहा है। कठिनाई यह भी कि जीवन, यथार्थ और उसे व्यंजित करनेवाले कवि हमारे इतने पास होते हैं कि सही विवेचन का प्रयत्न भी कई कठिनाइयाँ उपस्थित करता है।
अरविंदाक्षन ने समकालीन हिंदी कविता को सत्तामीमांसा का विवेचन करते हुए, एक प्रकार से इस चुनौती को स्वीकार किया है कि समकालीनता की पहचान आसान नहीं, इससे बचना चाहिए। वास्तविकता यह है कि अपने समय से आँख मिलाए बिना न रचना संभव है, न आलोचना। निराला को समकालीनता के पूर्वाभास रूप में देखते हुए यह पुस्तक नागार्जुन, मुक्तिबोध से लेकर बिलकुल नए कवि एकांत श्रीवास्तव तक आती है और लगभग सभी कवियों की समकालीनता को उजागर करती है। नारी के प्रति नई कवि-दृष्टि और कवयित्रियों की अकुलाहट को भी यहाँ स्थान मिला है, संभवतः पहली बार। समकालीनता को देखने-समझने का ईमानदार प्रयत्न।


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