बेनीपुरी ग्रन्थावली (खंड 1-8) - रामवृक्ष बेनीपुरी Benipuri Granthawali (Vol. 1-8) - Hindi book by - Ramvriksha Benipuri
लोगों की राय

संचयन >> बेनीपुरी ग्रन्थावली (खंड 1-8)

बेनीपुरी ग्रन्थावली (खंड 1-8)

रामवृक्ष बेनीपुरी

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2013
आईएसबीएन : 9788171194247 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :3260 पुस्तक क्रमांक : 13412

Like this Hindi book 0

बेनीपुरी ग्रंथावली के आठ खंडों में हम यह दुर्लभ पाथेय प्रस्तुत कर रहे हैं

श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी बीसवीं सदी के उन हिंदी लेखकों में हैं जिन्होंने साहित्य और पत्रकारिता को नई दिशा दी। साहित्य की विभिन्न विधाओं में उन्होंने श्रेष्ठतम लेखन किया। कथा-साहित्य और नाटक में नए प्रयोग किए और कालजयी कृतियों की रचना की। इसी तरह राजनैतिक और साहित्यिक दोनों ही तरह की पत्रकारिता को उन्होंने अपनी सशक्त लेखनी से नया रूप दिया। स्वाधीनता सेनानी बेनीपुरी समाजवाद की राजनीति के आरंभकर्ताओं में रहे हैं। उनका यह बहुमुखी व्यक्तित्व उन्हें २०वीं सदी के महानायकों की कतार में खड़ा करता है। जिंदगी की बहुस्तरीय व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने अनवरत साहित्य-लेखन किया और महान साहित्य की रचना की। उनका संपूर्ण लेखन अग्रगामी मनुष्य के लिए बहुमूल्य. पाथेय है। बेनीपुरी ग्रंथावली के आठ खंडों में हम यह दुर्लभ पाथेय प्रस्तुत कर रहे हैं।
ग्रंथावली के पहले खंड में उनकी कहानियाँ, शब्दचित्र, उपन्यास, ललित निबंध, स्मृति चित्र और कविताएँ संकलित हैं। 'चिता के फूल' कहानी-सग्रह में शोषित समाज की पीड़ा को अभिव्यक्ति मिली है। 'लाल तारा', 'माटी की मूरतें' तथा 'गेहूँ और गुलाब' नामक शब्द-चित्र संग्रहों की रचनाओं में उन्होंने भारतीय गाँव के किसान-जीवन को संपूर्णता में अभिव्यक्त किया है। अपने उपन्यास 'पतितों के देश में' के अंतर्गत उन्होंने भारतीय जेल-जीवन के नरक से साक्षात्कार कराया है। 'कैदी की पत्नी' में एक स्वाधीनता सेनानी के उपेक्षित परिवार की कहानी कही है। ललित निबंध-संग्रह 'सतरंगा इंद्रधनुष' में उन्होंने लोक-संस्कृति के मानवीय स्वरूप और प्रकृति के सौंदर्य का दिलचस्प चित्रण किया है। 'गाँधीनामा' में दिवंगत पुत्र के लिए कैदी पिता की संवेदनात्मक यादें हैं। इस खंड की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बेनीपुरी की कविताएँ हैं जिनके अप्रकाशित होने की वजह से आलोचकों का ध्यान इस ओर नहीं गया। परिशिष्ट में बेनीपुरी का विस्तृत परिचय तथा उनके गाँव बेनीपुर का वृत्तांत भी शामिल है।
कवर संयोजन : हरीश आनंद।
कवर पर बेनीपुरी के गाँव स्थित घर का छायांकन : सुरेश शर्मा।
बेनीपुरी का चित्र : 1951 ई.।

To give your reviews on this book, Please Login