जरतुष्ट्र ने यह कहा - फ्रीडरिश नीत्शे Jartushtra Ne Yah Kaha - Hindi book by - Fredrish Neetshe
लोगों की राय

धर्म एवं दर्शन >> जरतुष्ट्र ने यह कहा

जरतुष्ट्र ने यह कहा

फ्रीडरिश नीत्शे

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
आईएसबीएन : 9788183610322 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :358 पुस्तक क्रमांक : 13493

Like this Hindi book 0

यूनानियों के अनुसार विकास के प्रत्येक चरण का अपना पैगम्बर हुआ है

यूनानियों के अनुसार विकास के प्रत्येक चरण का अपना पैगम्बर हुआ है जिसने अपने समय के लोगों का पथ-प्रदर्शन किया है। हर पैगम्बर का अपना समय होता है। ‘ज़रतुष्ट्र’ ही वह पहला विचारक था जिसने व्यवहार-चक्र में अच्छाई और बुराई, नेकी और बदी के अन्तर को समझा, नैतिकता के तात्विक रूप को पहचाना और कहा कि सच्चाई ही सर्वोत्तम सद्गुण है, कार्य-प्रेरक है और है अपने आप में पूर्ण अर्थात् स्वयंभू। ‘ज़रतुष्ट्र ने यह कहा’ नामक पुस्तक के लेखक विश्व-विख्यात विचारक, दार्शनिक और साहित्यकार फ्रश्ीडरिश नीत्शे हैं। इनकी विचारधारा एवं लेखन ने अपने समय के विचारशील लोगों को जितना प्रभावित किया उतना दार्शनिक इमेनुअल कांट को छोड़कर अन्य कोई नहीं कर पाया था, शोपनहार भी नहीं जिनके सिद्धांतों का प्रभाव यूरोप के अधिकांश भागों में छाया हुआ था। नीत्शे की लेखनी का क्षेत्र बहुत विस्तृत था, उसमें नीतिशास्त्र के अतिरिक्त साहित्य, राजनीति, दर्शन और धार्मिक निष्ठाओं एवं विचारों का मंथन तथा समालोचना सभी सम्मिलित थे। नीत्शे ने हमारे सम्मुख ऐसे नए और उच्च मूल्यों को रखा जो उत्साहवर्धक हैं और जीवन में ‘आशा और विश्वास’ पैदा करते हैं। मूल्यों की पुरानी सारिणी में उन मूल्यों पर बल दिया गया है जो मनुष्य को कमज़ोर, निरुत्साही और निष्प्रभ बनाते हैं। ऐसे मूल्योंवाले व्यक्ति को ‘माडर्न मैन’ की संज्ञा दी गई। इसके विपरीत, मूल्यों की नई सारिणी में, उन मूल्यों को प्राथमिकता दी गई है जो कौम को स्वस्थ, सबल, शक्तिवान, उत्साही और साहसी बनाते हैं। या यूँ कहिए कि नई मूल्य सारिणी के अनुसार ‘जो गुण शक्ति से विकसित होते हैं वे अच्छे हैं, और जो कमजोरी के परिणाम से उपजते हैं, वे बुरे हैं। उम्मीद है, यह महत्त्वपूर्ण कृति हिन्दी के पाठकों, खासकर दर्शन में रुचि रखनेवालों को बेहद पसंद आएगी।

To give your reviews on this book, Please Login