कहानी वस्तु और अंतर्वस्तु - शंभु गुप्त Kahani Vastu Aur Antarvastu - Hindi book by - Shambhu Gupt
लोगों की राय

आलोचना >> कहानी वस्तु और अंतर्वस्तु

कहानी वस्तु और अंतर्वस्तु

शंभु गुप्त

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2013
पृष्ठ :216
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13504
आईएसबीएन :9788183615860

Like this Hindi book 0

हिन्दी में कहानी-आलोचना पर्याप्त समृद्ध और बहुआयामी होते हुए भी आलोचना की मुख्यधारा में अनादृत ही रही है

हिन्दी में कहानी-आलोचना पर्याप्त समृद्ध और बहुआयामी होते हुए भी आलोचना की मुख्यधारा में अनादृत ही रही है। हिन्दी में केवल कथाकार या कहानीकार तो बहुत-से मिल जाएँगे लेकिन केवल कथा या कहानी का आलोचक ढूँढ़ने पर बहुत मुश्किल से ही मिल पाएगा। जो दो-चार कहानी-आलोचक हमारे यहाँ रहे या हैं भी तो उनका कार्य इतना सीमित और कालबद्ध रहा है कि उससे कहानी-आलोचना की कोई सामान्य सैद्धान्तिकी निखमत हो पाना संभव नहीं हो पाया। हिन्दी की कहानी-समीक्षा पर अधिकांशतः एक आरोप यह लगाया जाता रहा है कि उसके प्रतिमान कविता-समीक्षा के क्षेत्र से आयत्त किए जाते हैं, हिन्दी-आलोचना के पास कहानी-समीक्षा के ऐसे प्रतिमान लगभग न के बराबर हैं, जो कहानी को कहानी की तरह देख सकें, जो नितरां कहानी-विधा के और उसी के लिए हों। फिलहाल यह कहना पर्याप्त होगा कि एक कहानी की समीक्षा एक कहानी की तरह ही की जानी चाहिए, उसे कविता या उपन्यास की तराजू में नहीं चढ़ा देना चाहिए। कविता और उपन्यास के प्रतिमानों से यदा-कदा मदद तो ली जा सकती है, एक सप्लीमेंट के रूप में उनका उपयोग तो किया जा सकता है लेकिन कहानी-समीक्षा की असल जमीन तो स्वयं कहानी-विधा के संघटक तत्त्वों से ही निखमत की जा सकती है। परम्परा में इस असल जमीन की पहचान कई बार की भी गई है। जहाँ नहीं है, या कहीं कोई चीज छूट गई है तो नए प्रयोगों द्वारा उसकी संभावनाओं की तलाश की जा सकती है। इससे परम्परा का मूल्यांकन भी होगा और आगे के नए रास्ते भी खुलेंगे।


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book