मानव शरीर और रोग प्रतिरक्षा तंत्र - प्रेमचन्द्र स्वर्णकार Manav Sharir Aur Rog Pratiraksha Tantra - Hindi book by - Premchandra Swarnkar
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मानव शरीर और रोग प्रतिरक्षा तंत्र

प्रेमचन्द्र स्वर्णकार

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2010
आईएसबीएन : 9788183613804 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :63 पुस्तक क्रमांक : 13546

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एक ही प्रकार की बहुत-सी कोशिकाएँ मिलकर जो संरचना बनाती हैं, उसे ऊतक कहते हैं

मनुष्य के शरीर में भिन्न-भिन्न कार्यो के लिए अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं। एक ही प्रकार की बहुत-सी कोशिकाएँ मिलकर जो संरचना बनाती हैं, उसे ऊतक कहते हैं। एक ही तरह के बहुत से ऊतक मिलकर शरीर के अंग विशेष का निर्माण करते हैं। उदाहरणार्थ-मस्तिष्क के निर्माण में तंत्रिका कोशिकाएँ भाग लेती हैं। ये पहले ऊतक बनाती हैं और ऊतक मिलकर ही मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं। इसी तरह पेशीय ऊतक, शरीर की पेशियों का निर्माण करते हैं। सम्बन्धित रचना के अनुसार ऊतकों के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे संयोजी ऊतक, जो शरीर के अंगों को परस्पर जोड़े रखता है। अस्थि ऊतक जो अस्थियाँ बनाते हैं। उपकला ऊतक त्वचा या अंगों की ऊपरी पर्त का निर्माण करता है। बहुत से ऊतक मिलकर शरीर के अंग और विभिन्न प्रणालियाँ बनाते हैं और इन अंगों और प्रणालियों से मिलकर पूरा शरीर बनता हैं। -इसी पुस्‍तक से

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