न की जीत हुई - के. सुरेश Na Ki Jeet Hui - Hindi book by - K. Suresh
लोगों की राय

संस्मरण >> न की जीत हुई

न की जीत हुई

के. सुरेश

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2015
आईएसबीएन : 9788183617017 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :123 पुस्तक क्रमांक : 13563

Like this Hindi book 0

प्रस्तुत संग्रह की कहानियां पाठक को अनुभूति के कुछ मार्मिक स्थलों की ओर ले जाती हैं

'न की जीत हुई' श्री के. सुरेश की संस्मरणात्मक कहानियों की दूसरी पुस्तक है। वास्तु, शैली और संरचना की दृष्टि से इसे उनकी पहली पुस्तक 'इक्कीस बिहारी और एक मद्रासी' का विस्तार मन जा सकता है; अर्थात प्रस्तुत संग्रह की नौ कहानियां भी पाठक को पिछले संग्रह की ग्यारह कहानियों के अनुभव संसार में शामिल कर अनुभूति के कुछ और मार्मिक स्थलों की ओर ले जाती हैं। सुरेश जी वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी हैं। अपनी दीर्घकालीन सेवा के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश एवं अन्य राज्यों में विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया है। इस अवधि में भांति-भांति के लोगों से उनका साक्षात्कार हुआ है, किस्म-किस्म की समस्याओं से उन्होंने मुठभेड़ की है और तरह-तरह की घटनाओं का वे हिस्सा बने हैं। कहीं संघर्ष, कहीं सहानुभूति, कहीं कृतज्ञता का भाव। इस पुस्तक में संकलित रचनाएँ ऐसे व्यक्तियों, परिस्थितियों, घटनाओं, अनुभवों और भावों का साक्षात्कार हैं, जो संवाद के इच्छुक हैं। ये संमरण एक ऐसे चैतन्य प्रशासक की रागात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिसका चित्त शुद्ध और संवेदना जाग्रत है। इन रचनाओं की सहजता और कथ्य के स्टार पर बरती गई ईमानदारी के माध्यम से अभिव्यक्ति की सच्चाई को परखा जा सकता है। इसे एक प्रशासक के अनुभव का निचोड़ कहा जा सकता है।

To give your reviews on this book, Please Login