नाटककार जगदीश चंद्र माथुर - गोविंद चातक Natakkar Jagdish Chandra Mathur - Hindi book by - Govind Chatak
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नाटककार जगदीश चंद्र माथुर

गोविंद चातक

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2000
आईएसबीएन : 817119592x मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :143 पुस्तक क्रमांक : 13570

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पुस्तक पाठक को नाटककार की सर्जनात्मक क्षमता और भावात्मक परिवेश दोनों से अवगत कराती है

जयशंकर प्रसाद के बाद जगदीशचन्द्र माथुर की नाट्य कृतियाँ एक नई दिशा की ओर संकेत करती हैं। उनकी पहली कृति कोणार्क को आधुनिक नाटक का ऐसा प्रस्थान–बिन्दु माना जाता है जहाँ हिन्दी नाटक एक नए बोध के लिए आकुल हो रहा था। उन पर लिखी गोविन्द चातक की यह पुस्तक माथुर के कृतित्व को कई कोणों से देखने–परखने का एक प्रयास है। जिसमें नाट्य–रचना की मूल प्रेरणा, नाटककार की अनुभूति, युग और समाज–बोध, मानवीय संवेदना और नाटककार का जीवन–दर्शन तथा समकालीन ह्रासोन्मुखी प्रवृत्तियों से जूझने की क्षमता तक पहुँचने की सार्थक कोशिश की गई है। इस दृष्टि में यह पुस्तक पाठक को नाटककार की सर्जनात्मक क्षमता और भावात्मक परिवेश दोनों से अवगत कराती है।

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