परम्परा, इतिहास बोध और संस्कृति - श्यामाचरण दुबे Parampara, Itihas Bodh Aur Sanskriti - Hindi book by - Shyamacharan Dubey
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परम्परा, इतिहास बोध और संस्कृति

श्यामाचरण दुबे

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2008
आईएसबीएन : 9788171195466 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :166 पुस्तक क्रमांक : 13583

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इस पुस्तक में संकलित भाषण और लेख इन समस्याओं पर समाजशास्त्रीय दृष्टि से विचार करते हैं।

परम्परा, इतिहास-बोध और संस्कृति - समसामयिक संवाद में परम्परा एक केन्द्रीय बिन्दु बन गई है। संस्कृति की पुनर्रचना, राजनीतिकरण और सैनिकीकरण व्यवस्था के लिए गम्भीर प्रश्न और भविष्य के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। इतिहास-बोध का मिथकीकरण अनेक वैचारिक विकृतियाँ उत्पन्न कर रहा है। साहित्य और संचार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से परम्परा, संस्कृति और इतिहास-बोध से जुड़े हैं। इस पुस्तक में संकलित भाषण और लेख इन समस्याओं पर समाजशास्त्रीय दृष्टि से विचार करते हैं।

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