राकेश और परिवेश: पत्रों में - जयदेव तनेजा Rakesh Aur Parivesh : Patron Mein - Hindi book by - Jaidev Taneja
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राकेश और परिवेश: पत्रों में

जयदेव तनेजा

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 1995
आईएसबीएन : 8171192142 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :783 पुस्तक क्रमांक : 13611

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यहाँ केन्द्र में राकेश हैं और परिधि पर उनके समकालीन

कोई व्यक्ति और विशेषत: रचनाकार अपने बारे में क्या कहता है--इससे अधिक महत्त्वपूर्ण और बड़ा सच यह है कि दूसरे उसके बारे में क्या कहते हैं? यह पत्र-संग्रह दूसरों के आईने में राकेश के व्यक्तित्व, कृतित्व और परिवेश की एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करता है। यहाँ केन्द्र में राकेश हैं और परिधि पर उनके समकालीन। लेखकीय आत्म-सम्मान और अपने अधिकारों के लिए हर किसी से कभी भी और कहीं भी त्याग-पत्र देने, वॉक आउट करने और लड़ने-झगड़ने को सदैव तत्पर, निश्छल आत्मीयता की तलाश में दर-दर भटकते सैलानी, भीतर से असुरक्षित, अकेले और बेचैन लेकिन बाहर से छतफाड़ ठहाके लगानेवाले हरदिल अजीज अनूठे दोस्त, एक साथ ज़बरदस्त बौद्धिक एवं अहंकारी तथा अत्यधिक संवेदनशील और भावुक अपने सिद्धान्तों के लिए अडिग और अटूट तथा अपने लेखन के लिए अत्यन्त अस्थिर, बेसब्र और बेचैन-मोहन राकेश के अन्तर्विरोधों की कोई सीमा नहीं है। इस पुस्तक में संकलित राकेश और उनके सहयात्रियों के 721 पत्र उनके जटिल व्यक्तित्व को, पाठकों के लिए, बड़े प्रामाणिक एवं विश्वसनीय रूप में एकदम पारदर्शी बना देते हैं। हमारा विश्‌वस है कि यह पुस्तक राकेश के पाठकों, अध्येताओं और शोधार्थियों को राकेश के संघर्षमय जीवन और वैविध्यपूर्ण रचनाकर्म के मर्म को गहराई से जानने-समझने में न केवल रोचक, दुर्लभ एवं महत्त्वपूर्ण सामग्री ही उपलब्ध कराएगी, बल्कि हिन्दी के पत्र-साहित्य में एक उल्लेखनीय उपलब्धि भी सिद्ध होगी।

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