तुलसी काव्य मीमांसा - उदयभानु सिंह Tulsi Kavya Mimansa - Hindi book by - Uday Bhanu Singh
लोगों की राय

आलोचना >> तुलसी काव्य मीमांसा

तुलसी काव्य मीमांसा

उदयभानु सिंह

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2008
आईएसबीएन : 9788171196869 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :440 पुस्तक क्रमांक : 13653

Like this Hindi book 0

निःसन्देह तुलसीदास के अध्येताओं और जिज्ञासु पाठकों के लिए यह ग्रन्थ उपादेय होगा।

तुलसीदास महाकवि थे। काव्यस्रष्टा और जीवनद्रष्टा थे। वे धर्मनिष्ठ समाज-सुधारक थे। अपने साहित्य में उन्होंने समाज का आदर्श प्रस्तुत किया, ऐसा महाकाव्य रचा जो हिन्दी-भाषी जनता का धर्मशास्त्र भी बन गया। तुलसी गगनविहारी कवि नहीं थे, उनकी लोकदृष्टि अलौकिक थी। उन्होंने आदर्श की संकल्पना को यथार्थ जीवन में उतारा। उनके द्वारा रचे गए गौरव-ग्रन्थ हिन्दी साहित्य के रत्न हैं। सौन्दर्य और मंगल का, प्रेय और श्रेय का, कवित्व और दर्शन का असाधारण सामंजस्य उनके साहित्य की महती विशेषता है। यह तुलसी-साहित्य की विराटता ही है कि उसकी सबसे अधिक टीकाएँ रची गई हैं। सबसे अधिक आलोचना-ग्रन्‍थ भी तुलसीदास पर ही लिखे गए हैं। सबसे अधिक शोध-प्रबन्धों का प्रणयन भी तुलसी पर ही हुआ है। तुतली-काव्य-मीमासा भी उसी अटूट शृंखला की एक कड़ी है। इसमें तुलसीदास के दर्शन और काव्य स्व एक नया विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इसके विवेच्य विषय हैं : अध्ययन-सामग्री, तुलसीकृत रचनाओं की प्रामाणिकता, तुलसीदास का जीवनचरित, उनकी आत्मकहानी, परिस्थितियों का प्रभाव एवं उनके साहित्य में युग की अभिव्यक्ति, उनके काव्य-सिद्धान्त, काव्य का भावपक्ष अर्थात् प्रतिपाद्य विषय, उनका कलापक्ष और उनके गौरवग्रन्थ, जिनमें यहाँ 'रामचरितमानस', 'विनयपत्रिका, 'गीतावली' तथा 'कवितावली' को लिया गया है। निःसन्देह तुलसीदास के अध्येताओं और जिज्ञासु पाठकों के लिए यह ग्रन्थ उपादेय होगा।

To give your reviews on this book, Please Login