वहाँ तक पहुँचने की दौड़ - राजेन्द्र यादव Wahan tak pahuchane ki daur - Hindi book by - Rajendra Yadav
लोगों की राय

कहानी संग्रह >> वहाँ तक पहुँचने की दौड़

वहाँ तक पहुँचने की दौड़

राजेन्द्र यादव

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :164
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13671
आईएसबीएन :9788171190409

Like this Hindi book 0

राजेन्द्र यादव अपने दौर के विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण रचनाकार ही नहीं, नई कहानी आन्दोलन के प्रतिनिधि लेखक भी हैं।

राजेन्द्र यादव अपने दौर के विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण रचनाकार ही नहीं, नई कहानी आन्दोलन के प्रतिनिधि लेखक भी हैं। विगत कुछ वर्षों में राजेन्द्र यादव का रचनात्मक लेखन बहुत ही सीमित रहा है, परन्तु उनकी सक्रियता सदा बनी रही है। अपने लेखों, बहसों व ‘हंस’ के माध्यम से वह एक रचनात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में ही सक्रिय नहीं रहे हैं, बल्कि लगभग सभी सामयिक, राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं में एक जीवंत हस्तक्षेप करते रहे हैं। वैसे भी किसी लेखक की सार्थकता अन्ततः इस बात में नहीं है कि उसने कितना लिखा, बल्कि इस बात में है कि उसने क्या लिखा और समाज तथा साहित्य विशेष के सन्दर्भ में उस लेखन का महत्त्व व भूमिका क्या रही। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ बदलते सन्दर्भों में अपनी सार्थकता तथा ‘रिलीवेंस’ खोजते पात्रों के ऊहापोह, द्वंद्व व आत्म-संघर्ष का लेखा-जोखा हैं। चूँकि राजेन्द्र यादव के पात्र अधिकांशतः मध्य वर्ग से सम्बन्धित हैं, सम्भवतः इसीलिए उनमें एक विशिष्ट किस्म की बौद्धिक ऊर्जा का भास है। यह वह वर्ग है, जो अपने कार्य-कलाप और मानसिकता से बदलते यथार्थ का गहरा अहसास ही नहीं कराता, बल्कि इस बात का भी संकेत देता है कि यह समाज आखिर जाने वाला किस दिशा में है। राजेन्द्र यादव की कहानियों को पढ़ना, नई कहानी की सामान्य प्रवृत्ति के अलावा कहीं आगे जाकर एक सजग और संवेदनशील रचनालोक से गुजरना है, जिसमें भावुकता का अनियंत्रित व असंतुलित प्रवाह न होकर (जो नई कहानी के रचनाकारों में दोष की हद तक है) एक सजग व नियंत्रित ‘इंटरप्ले’ देखने को मिलता है और यह किसी सिद्धहस्त रचनाकार की कलम से ही सम्भव हो सकता है।


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book