निठल्ले की डायरी - हरिशंकर परसाई Nithalle Ki Diary - Hindi book by - Harishankar Parsai
लोगों की राय

हास्य-व्यंग्य >> निठल्ले की डायरी

निठल्ले की डायरी

हरिशंकर परसाई

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :140
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 14099
आईएसबीएन :9788171788095

Like this Hindi book 0

हरिशंकर परसाई हिन्दी के अकेले ऐसे व्यंग्यकार रहे हैं जिन्होंने आनन्द को व्यंग्य का साध्य न बनने देने की सर्वाधिक सचेत कोशिश की।

हरिशंकर परसाई हिन्दी के अकेले ऐसे व्यंग्यकार रहे हैं जिन्होंने आनन्द को व्यंग्य का साध्य न बनने देने की सर्वाधिक सचेत कोशिश की। उनकी एक–एक पंक्ति एक सोद्देश्य टिप्पणी के रूप में अपना स्थान बनाती है। स्थितियों के भीतर छिपी विसंगतियों के प्रकटीकरण के लिए वे कई बार अतिरंजना का आश्रय लेते हैं, लेकिन, तो भी यथार्थ के ठोस सन्दर्भों की धमक हमें लगातार सुनाई पड़ती रहती है। लगातार हमें मालूम रहता है कि जो विद्रूप हमारे सामने प्रस्तुत किया जा रहा है, उस पर हमसे सिर्फ’ ‘दिल खोलकर’ हँसने की नहीं, थोड़ा गम्भीर होकर सोचने की अपेक्षा की जा रही है। यही परसाई के पाठ की विशिष्टता है। निठल्ले की डायरी में भी उनके ऐसे ही व्यंग्य शामिल हैं। आडंबर, हिप्पोक्रेसी, दोमुँहापन और ढोंग यहाँ भी उनकी क़लम के निशाने पर हैं।


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book