रतिनाथ की चाची - नागार्जुन Ratinath Ki Chachi - Hindi book by - Nagarjun
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रतिनाथ की चाची

नागार्जुन

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 14234
आईएसबीएन :9788171787876

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हिंदी उपन्यास में लोकोन्मुखी रचनाशीलता की जिस परंपरा की शुरुआत प्रेमचंद ने की थी, उसे पुष्ट करनेवालों में नागार्जुन अग्रणी हैं।

हिंदी उपन्यास में लोकोन्मुखी रचनाशीलता की जिस परंपरा की शुरुआत प्रेमचंद ने की थी, उसे पुष्ट करनेवालों में नागार्जुन अग्रणी हैं। रतिनाथ की चाची उनका पहला हिंदी उपन्यास है। सर्वप्रथम इसका प्रकाशन 1948 में हुआ था। इसके बाद उनके कुल बारह उपन्यास आए। सबमें लितों-वंचितों-शोषितों की कथा है। रतिनाथ की चाची जैसे चरित्रों से आरंभ हुई यात्रा में बिसेसरी, उगनी, इंदिरा, चंपा, गरीबदास, लक्ष्मणदास, बलचनमा, भोला जैसे चरित्रा जुड़ते गए। उनके उपन्यास में नारी-चरित्रों को मिली प्रमुखता रतिनाथ की चाची की ही कड़ी है। इसीलिए इस कृति का ऐतिहासिक महत्त्व है। रतिनाथ की चाची विधवा है। देवर से प्रेम के चलते गर्भवती हुई तो मिथिला के पिछड़े सामंती समाज में हलचल मच गई। गर्भपात के बाद तिल-तिल कर वह मरी। यह उपन्यास हिंदी का गौरव है।


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