स्मृति गंध - वीणा सिन्हा Smriti Gandh - Hindi book by - Veena Sinha
लोगों की राय

कहानी संग्रह >> स्मृति गंध

स्मृति गंध

वीणा सिन्हा

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2008
पृष्ठ :119
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 14297
आईएसबीएन :9788126715787

Like this Hindi book 0

अधिकतर कहानियों के कथा-कलन में बया के घोंसले जैसी संकुल और कलापूर्ण बुनावट है, जिसमें लेखिका इशारतन् एक साथ कई बातें कह देती है।

‘ब्लर्ब’ पर छपनेवाली सम्मतियाँ अक्सर खातिरन् लिखी जाती हैं, जिनमें अमूमन तआरुफ़ और तारीफ़ की बातें रहती हैं - कोई मूल्यांकन नहीं। शायद, कहानियों की इस किताब को रस्मी तौर पर लिखी गई ऐसी सम्मति की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस संग्रह की कई कहानियों की अपनी औक़ात है। अधिकतर कहानियों के कथा-कलन में बया के घोंसले जैसी संकुल और कलापूर्ण बुनावट है, जिसमें लेखिका इशारतन् एक साथ कई बातें कह देती है। मानो इसकी कहानी उस चाकू या कलमतराश की तरह है, जिसमें कई छुरियाँ एक साथ रहती हैं। ख़ासकर स्त्री-विमर्श से जुड़ी हुई कहानियाँ पठनीय हैं, जो मुनिया और अंजू जैसे चरित्रों के पक्ष में खुलकर खड़ी हैं और पुंप्रभुत्व से पीड़ित इस अश्लील समाज को दवा की कड़ी खुराक ही नहीं देना चाहती हैं, बल्कि उसे बेहोश किए बिना नश्तर भी लगा देना चाहती हैं। यह दूसरी बात है कि इस तासीर की कहानियों में भी कहीं-कहीं पुराने समाज के ‘सेंसर-मोरोंस’ के भय के साथ-साथ ‘प्यूडेंडा’ - केन्द्रिक शब्दों व क्रियाओं के कथन से परहेज़ की झलक मिल जाती है। अन्तर्यात्रा की ख़ास बातों को इशारों से कहने में माहिर और बर्फ के गाले में ‘आग’ को ढोने-सुलगाने वाली ये कहानियाँ इसलिए भी सराही जाएँगी कि घन की चोट से यथास्थिति को तोड़कर ‘अदल-बदल’ लाने की सूझ-समझ वाली हर कोशिश किसी नए ‘भिनसार’ को क़रीब लाती है।

लोगों की राय

No reviews for this book