अजनबी - राजहंस Ajnabi - Hindi book by - Rajhans
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अजनबी

राजहंस

प्रकाशक : धीरज पाकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :221
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 15358
आईएसबीएन :0

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राजहंस का नवीन उपन्यास

सुनो लता... मुकेश ने तुम्हें धोखा दिया है... वह सिर्फ तुमसे दिखावा करता रहा है... वह तुम्हें अपने जाल में फंसाना चाहता था... उसने जब देखा तुम उल्टा ही उसके गले पड़ रही हो तो वह अपनी जान बचाकर चला गया। यह तुम्हीं से नहीं बल्कि एक अमीर लड़की से भी प्रेम करता था, उसके सामने तुम क्या थीं, कुछ भी नहीं। मैंने उसे अपनी आंखों से एक लड़की के साथ उसकी कार में जाते देखा है।'

'न.. हीं।' लता के मुंह से एक चीख निकली और दूसरे ही क्षण वह बेहोश हो गई। अगर तुरन्त ही विकास सम्भाल न लेता तो लता वहीं सड़क पर गिर पड़ती।


कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो इन्सान को मंजिल की जगह न जाने कहां ले जाते हैं-भटक जाता है वह। अजनबी हो जाता है खुद से - यह कहानी एक ऐसे ही पात्र की है।

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