Muktibodh : Vimarsh Aur Punah Path - Hindi book by - Gajanan Madhav Muktibodh - मुक्तिबोध : विमर्श और पुनःपाठ - गजानन माधव मुक्तिबोध
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मुक्तिबोध : विमर्श और पुनःपाठ

गजानन माधव मुक्तिबोध

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :327
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 16082
आईएसबीएन :9789390625741

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प्रस्तुत पुस्तक में मुक्तिबोध को वर्तमान के आलोक में देखने परखने की एक कोशिश की गयी है। इसी क्रम में पुस्तक में मुक्तिबोध के लेखन के विविध पक्षों पर आलेख शामिल किये गये हैं। हर रचनाकार अपनी रचना में अपने समय और उसकी विडम्बनाओं को उकेरने की कोशिश करता है। इसका आशय यह भी होता है कि इन विडम्बनाओं को दूर किया जाना चाहिए। एक समय का सच आखिरकार ‘अतीत का वह सच’ बन जाता है जिसको वर्तमान ख़ारिज कर चुका होता है। काश रचनाकार की रचनाएँ भी ‘अतीत का सच’ बन पातीं। सही अर्थों में यह किसी भी रचनाकार का असल मन्तव्य भी होता है। मुक्तिबोध आजीवन संघर्ष के साक्षी रहे। इसीलिए संघर्ष उनकी रचनाओं का प्रत्यक्ष है। काश ‘सामूहिक मुक्ति’ का मुक्तिबोध का सपना साकार हो पाता। यह पुस्तक एक तरह से उन सपनों की पड़ताल है।

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