बच्चों के जोक्स - कुलदीप सलूजा Bachchon Ke Jokes - Hindi book by - Kuldeep Saluja
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बच्चों के जोक्स

कुलदीप सलूजा

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2006
पृष्ठ :158
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 3726
आईएसबीएन :81-288-1361-7

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इसमें बच्चों के लिए मजेदार जोक्स प्रस्तुत किये गये है।

Bachchon Ke Jokes A Hindi Book by Kuldeep Saluja - बच्चों के जोक्स - कुलदीप सलूजा

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

बच्चों के जोक्स

टीचर ने बच्चे से पूछा : ‘‘रोने और सोने में क्या फर्क है ?’’ मारवाड़ी बच्चा : ‘‘हमारे में कहते हैं कि रोने से व्यापार बढ़ता है और सोने से परिवार।’’


पिता पुत्र से : आज तुम स्कूल क्यों नहीं गए ?
पुत्र : कल हम लोगों को स्कूल में तौला गया था। आज बेच दिया जाएगा। यही कारण है कि मैं आज स्कूल नहीं गया।


शिक्षक :(विद्यार्थी से) भारत वर्ष के मानचित्र में कुतुबमीनार कहां है ?
विद्यार्थी : पता नहीं सर।
शिक्षक : तो बैंच पर खड़े हो जाओ।
विद्यार्थी : (बेंच पर खड़ा होकर) सर ! यहां से भी कुतुबमीनार नहीं दिख रहा है।


पिताजी डांटते हुए- राजू तुम्हें फूल तोड़ लाने को कहा था और तुम पूरी डाली सहित तोड़ लाए, जल्दी बोलो कि क्यों ?
राजू- पिताजी, वहां लिखा था कि फूल तोड़ना मना है इसलिए मैं डाली सहित तोड़ लाया।


महिला : तुमने मेरे बेटे की पिटाई क्यों की ?
मोटी महिला : उसने मुझे मोटी भैंस कहा था।
महिला : तो बहन, तुम्हें बेटे को पीटने के बजाय अपनी खुराक में कमी करनी चाहिए।


एक लड़के ने नई-नई साइकिल चलानी सीखी थी। वह साइकिल चलाते हुए पैडल से पैर उठाकर बोला : रवि, देख मेरे हाथ नहीं है। इतना कहते ही वह साइकिल से गिर गया। रवि उसके पास आकर बोला : राजू देख, अब तेरे दांत भी नहीं हैं।

राजू : अगर प्रिंसिपल ने अपने शब्द वापस न लिए तो मैं स्कूल छोड़ दूंगा।
मोहन : क्या कहा था प्रिंसिपल ने ?
राजू : कहा था, स्कूल छोड़ दो।


माँ बेटे से : बेटे, घर में कायदे से रहना चाहिए। तुम्हें मेरी हर बात माननी चाहिए।
बेटे ने सिर हिलाते हुए कहा : मैं समझ गया मम्मी, जैसे पापा रहते हैं।


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