लपटें - चित्रा मुदगल Laptein - Hindi book by - Chitra Mudgal
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लपटें

चित्रा मुदगल

प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशित वर्ष : 2004
पृष्ठ :110
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 389
आईएसबीएन :81-263-0766-8

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प्रतिष्ठित कथाकार चित्रा मुदगल की कहानियों का संग्रह...

Laptein - A Hindi Book by - Chitra Mudgal लपटें - चित्रा मुदगल

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

चित्रा मुद् गल की कहानियों का मुख्य स्वर ‘नारी-मुक्ति’ है। ‘लपटें’ की कहानियों में एक ओर जहाँ मध्यवर्गीय नारी अपने अस्तित्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिए पुरुष-प्रधान समाज द्वारा किये अवमूल्यन से टकरा रही है, वहीं चारों ओर फैले अन्याय, शोषण, अत्याचार, अमानवीयता आदि का खुला प्रतिपाद कर रही है। यातना चाहे नारी की हो या सर्वहारा की, किसी वृद्ध की हो या बच्चे की, चित्रा मुद् गल उसके उत्स तक जाने की कोशिश करती हैं और व्यवस्था के सभी पहलुओं के साथ मनुष्य के पारस्परिक सम्बन्धों में, उनके अन्तर्जगत् में झांकती हैं। यही वजह है कि उनकी कहानियों में व्यवस्था का क्रूर, अमानवीय, जन-विरोधी चरित्र बार-बार उभरता है।

एक कथाकार की उर्जावान उपस्थिति आप इन कहानियों में पायेंगे जहाँ बाहरी दिखावा नहीं, भीतर का आँवा हैं। कहानियों में भाषा का वेग, मिथक, बिम्ब, प्रतीक आदि का सार्थक प्रयोग और इनके रचाव की तल्लीनता इन्हें विशेष बनाती हैं। इनमें जहाँ चित्र और रंग का संयोजन होता है ये कहानियाँ बेहतरीन कला-कृतियाँ बन जाती हैं।


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