Adhyatmvadi Bhautikta Apnai Jaye - Hindi book by - Sriram Sharma Acharya - अध्यात्मवादी भौतिकता अपनाई जाए - श्रीराम शर्मा आचार्य
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आचार्य श्रीराम शर्मा >> अध्यात्मवादी भौतिकता अपनाई जाए

अध्यात्मवादी भौतिकता अपनाई जाए

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि प्रकाशित वर्ष : 1999
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 4267
आईएसबीएन :00000

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अध्यात्मवाद पर आधारित पुस्तक

अध्यात्म की उपेक्षा नहीं की जा सकती


सुप्रसिद्ध अमेरिकन उद्योगपति एडिंग्टन ने अपना संपूर्ण जीवन धन-संपत्ति की विशाल मात्रा अर्जित करने, भोग, ऐश्वर्य और इंद्रिय सुखों की तृप्ति करने में बिताया। वृद्धावस्था में भी उनके पास धन-संपत्ति के अंबार लगे थे। पर वह शक्तियाँ जो मनुष्य को आत्म-संतोष प्रदान करती हैं, एडिंग्टन के पास कब की विदा हो चुकी थीं? मृत्यु की घड़ियाँ समीप आई देखकर उनका ध्यान भौतिकता से हटकर दार्शनिक सत्यों और आध्यात्मिक तथ्यों की ओर आया। वह अनुभव करने लगे कि पार्थिव जीवन की हलचलें और भौतिक सुखोपभोग प्राप्त करना ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य नहीं। लोकोत्तर जीवन तत्त्वों की शोध एक अनिवार्य कर्तव्य था। उसे भुला दिया गया। पश्चात्ताप की अग्नि में जलने लगे एडिंग्टन। उन्होंने कहा—भौतिकता में क्षणिक सुख है और निरंतर विकसित होने का विनाशकारी गुण। निष्कर्ष तो इतने खराब होते हैं, जिनके बारे में कोई कल्पना ही नहीं की जा सकती। विक्षोभ और दुर्वासनाओं की भट्टी में जलता हुआ प्राणी मृत्यु के आने पर जलविहीन मछली की तरह तड़पता है; पर तब सब परिस्थितियाँ हाथ से निकल चुकी होती हैं, केवल पश्चात्ताप ही शेष रहता है।"

जीवन के इस महत्त्वपूर्ण सारांश से वर्तमान और आगत पीढ़ी को अवगत कराने के लिए एडिंग्टन ने एक महान् साहस किया। उन्होंने एक संस्था बनाई और अपनी सारी संपत्ति उसे इसलिए दान कर दी कि यह संस्था मानव जीवन के आध्यात्मिक सत्य और तथ्यों की जानकारी अर्जित करे और उन निष्कर्षों से सर्वसाधारण को परिचित कराये, जिससे आगे मरने वालों को इस तरह पश्चात्ताप की आग में झुलसते हुए न विदा होना पड़े। यह संस्था अमेरिका में खोली गई। उसकी शाखा ३२ ईस्ट ५७ वी गली न्यूयार्क (अमेरिका) में थी। वहाँ प्रति वर्ष धर्म और विज्ञान के संबंध पर उत्कृष्ट कोटि के भाषण कराये जाते हैं।

इस श्रृंखला से 'विज्ञान दर्शन और धर्म (साइंस फिलासफी एंड रिलीजन) शीर्षक से रसेल ब्रेन के निबंध का सारांश आध्यात्मिक चेतना की पुष्टि में उदाहरणार्थ प्रस्तुत किया जाता है। रसेल ब्रेन का कथन है-"विज्ञान हमें पदार्थ की भौतिक जानकारी दे सकता है। किंतु पदार्थ क्यों बना? कैसे बना? इसका कोई उत्तर उसके पास नहीं है। जिन सत्य निर्णयों को विज्ञान नहीं दे सकता, उन्हें केवल दर्शन और धर्म के द्वारा ही खोजा जा सकता है। उसी का नाम अध्यात्म है।"

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    अनुक्रम

  1. भौतिकता की बाढ़ मारकर छोड़ेगी
  2. क्या यही हमारी राय है?
  3. भौतिकवादी दृष्टिकोण हमारे लिए नरक सृजन करेगा
  4. भौतिक ही नहीं, आध्यात्मिक प्रगति भी आवश्यक
  5. अध्यात्म की उपेक्षा नहीं की जा सकती
  6. अध्यात्म की अनंत शक्ति-सामर्थ्य
  7. अध्यात्म-समस्त समस्याओं का एकमात्र हल
  8. आध्यात्मिक लाभ ही सर्वोपरि लाभ है
  9. अध्यात्म मानवीय प्रगति का आधार
  10. अध्यात्म से मानव-जीवन का चरमोत्कर्ष
  11. हमारा दृष्टिकोण अध्यात्मवादी बने
  12. आर्ष अध्यात्म का उज्ज्वल स्वरूप
  13. लौकिक सुखों का एकमात्र आधार
  14. अध्यात्म ही है सब कुछ
  15. आध्यात्मिक जीवन इस तरह जियें
  16. लोक का ही नहीं, परलोक का भी ध्यान रहे
  17. अध्यात्म और उसकी महान् उपलब्धि
  18. आध्यात्मिक लक्ष्य और उसकी प्राप्ति
  19. आत्म-शोधन अध्यात्म का श्रीगणेश
  20. आत्मोत्कर्ष अध्यात्म की मूल प्रेरणा
  21. आध्यात्मिक आदर्श के मूर्तिमान देवता भगवान् शिव
  22. आद्यशक्ति की उपासना से जीवन को सुखी बनाइए !
  23. अध्यात्मवादी भौतिकता अपनाई जाए
  24. आध्यात्मिक साधना का चरम लक्ष्य
  25. अपने अतीत को भूलिए नहीं
  26. महान् अतीत को वापस लाने का पुण्य प्रयत्न

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