अलादीन औऱ जादुई चिराग - ए.एच.डब्यू. सावन Aladin Aur Jadui Chirag - Hindi book by - A.H.W. Sawan
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अलादीन औऱ जादुई चिराग

ए.एच.डब्यू. सावन

प्रकाशक : मनोज पब्लिकेशन प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :16
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 4779
आईएसबीएन :81-310-0200-4

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अलादीन की रोचक एवं मनोरंजक कहानी का वर्णन

Aladin Aur Jadui Chirag A Hindi Book A.W.H. Sawan- अलादीन औऱ जादुई चिराग - ए.एच.डब्यू. सावन

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

अलादीन और जादुई चिराग

‘‘अब कहां मर गया वह नामुराद लड़का ?’’ अलादीन की मां बड़बड़ाई और उसके सूत कातते हाथ रुक गए, ‘‘घर में खाने के लिए दाना नहीं और मैं ही हूं।...दिन-रात खटती रहती हूं कि कैसे हम दोनों के पेट भरने का जुगाड़ हो। और वह...।’’ बुढ़िया ने कोसा।

और वह...यानी अलादीन, बगदाद शहर की बाजार के दूसरे किनारे अपने ही सरीखे आवारा दोस्तों के साथ बैठा पुदीने की चाय की चुस्कियां ले रहा था और लड़ा रहा था गप्पें। सभी दोस्तों में अलादीन था भी सबसे ज्यादा शरारती और सुस्त। काम करते तो नानी मरती थी उसकी। कभी उसने अपनी मां का हाथ बटाने का कष्ट नहीं किया।

‘‘सुन ले अलादीन’’, एक दोस्त बोला, ‘‘कल चाय पिलाने की बारी तेरी है। कोई बहाना नहीं चलेगा।’’
सड़क के दूसरी ओर एक जगह छिपकर सांवले रंग का एक अजनबी चाय की दुकान पर नजर रखे था। लड़कों की बातें सुन वह बुदबुदाया, ‘अहा ! अगर यह लड़का अलादीन है तो मेरा काम बन गया। लंबी तलाश खत्म हुई।’’



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