झाँसी की रानी - अनन्त पई Jhansi Ki Rani - Hindi book by - Anant Pai
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झाँसी की रानी

अनन्त पई

प्रकाशक : इंडिया बुक हाउस प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :32
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 4784
आईएसबीएन :81-7508-485-5

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अमर चित्र-कथा के द्वारा झाँसी की रानी की कहानी का चित्रण...

Jhansi Ki Rani-A Hindi Book by Anant Pai

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

झाँसी की रानी

झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम लेते ही। भारत की एक ऐसी वींरागना का चित्र मूर्तिमंत हो उठता है, जिसके अदम्य शौर्य और अभूतपूर्व साहस ही मिसाल अन्यत्र मिलनी दुर्लभ है। स्वभाव से वह शान्तिप्रिय थी।, किंतु झाँसी को अंग्रेजों के अधीन करने के कुचक्र ने उसे शत्रुओं के विरुध्द शस्त्र उठाने को बाध्य कर दिया था। लडा़ई के मैदान में वे सदा आग्रणी रही। उसमें नेतृत्व के सभी गुण विद्यमान थे।

रानी लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई। तो अन्य नेताओं का साहस टूट गया। तात्या टोपे राव साहब तथा बाँदा के नवाब में अब और संघर्ष करने की शक्ति नहीं रह गयी थी। इस प्रकार संगठित और सुसज्जित शत्रु से लोहा लेने का उत्साह ठंडा पड़ गया। फिर भी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति, जिसने देश की आन के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। चिरस्मरणीय रही।

मध्य भारत के चारण तथा वहां के लोग आज भी उस वीरांगना के शौर्य और गुणों का गान करते नहीं थकते हैं।
‘‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी,
बुंदेले हरबोंलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।।’’


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