आप भी सफल हो सकते हैं - जोगिन्दर सिंह Aap Bhi Safal Ho Sakte Hain - Hindi book by - Joginder Singh
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आप भी सफल हो सकते हैं

जोगिन्दर सिंह

प्रकाशक : फ्यूजन बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :175
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 4819
आईएसबीएन :81-288-1177-0

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सफल होने के लिए जिन गुणों का होना आवश्यक है, वह सभी व्यक्तियों में विद्यमान होता है, यदि नहीं होती है तो केवल उनकी पहचान।

Aap Bhi Safal Ho Sakte Hain

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

आप भी सफल हो सकते हैं पुस्तक में श्री जोगिन्दर सिंह जी ने सफलता प्राप्ति के अचूक उपायों का वर्णन किया है। सफल होने के लिए जिन गुणों का होना आवश्यक है, वह सभी व्यक्तियों में विद्यमान होता है, यदि नहीं होती है तो केवल उनकी पहचान। उन्हीं गुणों को लेखक ने पहचानने के सूत्र दिए हैं। एक सफल व्यक्ति को अपने प्रतिदिन के कार्य की प्राथमिकता तय करनी चाहिए साथ ही वह क्या करना चाहता है और उसे करने के लिए उसके पास क्या-क्या होना चाहिए इनका विश्लेषण करना चाहिए। काम को पूरा करने हेतु उसकी निश्चित विद्या का अनुसरण करना चाहिए। अपने पास एक डायरी अथवा नोटबुक रखना एवं काम का समय इस प्रकार सुनिश्चित करना चाहिए कि अपने लक्ष्य के प्रति चिंतन करना चाहिए। उपर्युक्त गुणों का वर्णन करते हुए लेखक ने सफलता प्राप्ति के सूत्रों को बड़ी कुशलता से अभिव्यक्त किया है।

सफल होना चाहते हैं तो मेहनत करना सीखें। अपने रोजमर्रा के कामों की प्राथमिकता तय करें। आप क्या चाहते हैं और आपके पास क्या होना चाहिए, इन दोनों के बीच अंतर करना सीखिए। काम करने के लिए एक निश्चित तरीका अपनाएं। अपने पास एक नोटबुक या डायरी रखें। हर काम को करने का समय इस प्रकार तय करें कि आप काम के बोझ तले दब न जाएं। अपने को क्रेंद्रित रखें। व्यवहारकुशल बनें। काम को पूरा करने का पूर्ण प्रयत्न करें। काम आनंदपूर्वक करें, भार स्वरूप नहीं। हमेशा सीखने के प्रति जिज्ञासु रहें। सहायता लेने से परहेज न करें। अपने काम का विश्लेषण करें एवं अपने ऊपर पूर्ण भरोसा रखें। सफलता आपकी सुनिश्चित है।

भूमिका

जीवन में बेहतर बनने व कुछ पाने के विषय पर बाजार में सैकड़ों किताबें हैं। वे सब अच्छी हैं क्योंकि उनमें कुछ-न-कुछ सीखने को मिलता है। जीवन इतना छोटा है कि उसे बरबाद नहीं किया जाना चाहिए। अभी तक सफलता के लिए कोई निश्चित दवा या फार्मूला नहीं बना। यह उस लकड़ी की तरह है, जो आसानी से नहीं उगती। हवाएं जितनी तेज होंगी, पेड़ उतना ही मजबूत होता जाएगा। यही हम मनुष्यों पर भी लागू होता है। हमारे चारों ओर अनेक अवसर मौजूद हैं पर हमें अपनी धुन का पक्का होना होगा। यह एक ऐसा वरदान है जिसके फलस्वरूप हम मनचाही सफलता पा सकते हैं।
अगर आप लगातार कोशिश करें और लगातार काम करें तो सब कुछ कर सकते हैं। इस संसार में पक्की धुन या लगन का स्थान कोई नहीं ले सकता। ‘केल्विन कोलिज’ इस बारे में कहते हैं-‘‘केवल प्रतिभा से नहीं, असफल व्यक्ति भी प्रतिभावान हो सकते हैं। केवल बुद्धिमानी से नहीं, बुद्धिमत्ता भी कभी-कभी पहचान में नहीं आती। केवल शिक्षा से नहीं क्योंकि संसार में शिक्षित भरे पड़े हैं। केवल और केवल पक्का इरादा और लगन ही काम आ सकते हैं।’’

अगर जो है, उससे ज्यादा पाना चाहते हैं, जो हैं, उससे अच्छे बनना चाहते हैं तो आपको प्रतिदिन मेहनत करनी होगी। हमें सदा अपने पंख फैला कर उड़ान भरने, खुशियों से दामन और सबसे अच्छा कर दिखाने को तैयार रहना चाहिए। प्रायः हम जल्दी ही हार मान जाते हैं। कई बार तो हम कोशिश तक नहीं करते, हम मान लेते हैं कि हम सफल हो ही नहीं सकते।
इसकी पड़ताल रोचक हो जाती है कि आखिर ऐसा होता क्यों है ? यह इसलिए होता है क्योंकि हम बहुत आसानी से अतीत की भूलों को भविष्य पर हावी होने देते हैं।
प्रसन्नता पराजय के बारे में आपकी जो भी सीमित भावनाएं हों उनसे उबरने की कोशिश करें। आपको स्वयं ही अपनी बनाई कैद से आजाद होना होगा। कड़ी मेहनत से ही सच्ची जीत मिलती है। बिना कोई कीमत चुकाए, न तो कोई जीता है और न ही जीत सकता है। सही जगह व सही समय पर होना ही भाग्य नहीं होता। यह मनचाहा जीवन पाने की जोश भरी रोमांचक प्रक्रिया है।

यह सोच कर हाथ पर हाथ रखकर न बैठ जाएं कि अच्छी बातें अपने-आप घटेंगी। साहसी बनें, जो चाहते हैं आगे बढ़ कर ले लें। अपना लाभ तय करें और प्रतिदिन उसे अपनी कल्पना में देखें। भाग्य अपने-आप चला आएगा। यह केवल तभी आपका साथ देता है जब आप सपने साकार करने की दिशा में जुट जाते हैं। उन लोगों की गिनती में अपना नाम शामिल न करें जो सदा उन परेशानियों का रोना रोते रहते हैं जो कभी उन पर आई थीं या आ सकती हैं। इसके बजाय मानकर चलें कि जो बीत गई सो बात गई। हर दिन एक नई शुरुआत होता है। अतीत को पीछे छोड़ दें और आगे चलें। पिछली भूलों व पछतावों के जाल में न फंसें। सच्ची बुद्धिमानी यही जानने में है कि किन बातों पर ध्यान देना है और किन्हें छोड़ना है।
स्वयं को तथा दूसरों को अतीत की भूलों के लिए दोषी ठहराने की बजाय कुल अच्छा करें। सदा भविष्य की ओर देखें। अपनी ओर से प्रसन्नता की किसी भी संभावना का स्वागत करें। एक अमरीकी विचारक हेनरी डेविड ने कहा है ‘एक आदमी जो अपने बारे में सोचता है उसी से उसके भाग्य का पता चलता है या संकेत मिलता है।’’
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए सहायक हो सकती है जो अपने जीवन को बेहतर बनना चाहते हैं। आगे बढ़ें और इसका आनंद लें।
-जोगिंदर सिंह
पूर्व निदेशक, सी.बी.आई.

1

खेल के नियम
नियमों के साथ चलें

अगर यह जीवन एक खेल है तो आप इसके नियमों पर चल कर ही सफलता के शिखर तक पहुंच सकते हैं। वैसे तो नियम साधारण ही होते हैं परंतु हम इन्हें आसानी से अनदेखी कर देते हैं।
अगली बार जब भी आप किसी दूसरे की आलोचना शुरू करें तो अपने आपसे इतना अवश्य पूछें कि क्या ऐसा करने से कहीं कोई बदलाव आएगा ? वह व्यक्ति तो ज्यों का त्यों ही रहेगा परंतु आप अपनी ही नजरों में गिरकर छोटे हो जाएंगे। किसी दूसरे को नीचे गिराकर आप कभी ऊंचे नहीं उठ सकते, इस व्यवहार से केवल आपका क्रोध, घृणा असुरक्षा, जलन और भय ही स्पष्ट होता है।

अक्सर लोग एक-दूसरे के प्रति नीच व्यवहार करते हैं क्योंकि वे असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होते हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें कोई नहीं चाहता। वे इस प्रेम से अपने-आपको दूर ले जाकर अपना बचाव करने की कोशिश करते हैं। दूसरे शब्दों में अगर कोई अपने-आपको प्रेम करने योग्य नहीं समझता तो वह दूसरों को भी प्रेम नहीं दे पाता। एक आत्मविश्वासयुक्त व्यक्ति विश्वास रखता है कि वह स्नेह और मित्रता करने के योग्य है और दूसरों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करता है।
संक्षेप में, अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए आपको दूसरों के व्यवहार की चिंता छोड़कर, अपने-आपमें बदलाव लाना होगा। आप पहले स्वयं को सुरक्षित महसूस करें, तभी दीर्घकालीन सकारात्मक और संतुष्टिदायक संबंध बना सकते हैं। एक स्वाभिमानी व्यक्ति किसी को भी अपनी भावनाओं से खेलने का अवसर नहीं देता। वास्तव में, यदि आप चाहें, तभी कोई आपके आत्मविश्वास को ठेस पहुंचा सकता है। अगर आप अपने बारे में सकारात्मक नजरियां रखते हैं तो आप दूसरों से भी आदर व दयालुता से पेश आएंगे। दूसरों से आपके संबंध दर्शाते हैं कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं। अपनी सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने का भरपूर प्रयत्न कीजिए। अपने-आपको श्रेष्ठ रूप में दर्शाइए।
आपको यह सीखना होगा कि किस तरह आत्मविश्वासी व्यक्ति शब्दों का प्रयोग न करते हुए भी अपने व्यवहार व हाव-भाव से अपना परिचय दे देते हैं। अगर आप दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालना चाहते हैं तो निम्नलिखित बातों पर अवश्य ध्यान दें।

विरोधाभास को पहचानें। कई बार हम चाहकर भी दूसरों पर अच्छा प्रभाव नहीं डाल पाते। ऐसा हम तब करते हैं जब सभी काम सामान्य तरीके से करते हुए साधारण रूप से जीते रहते हैं। निश्चित ही कुछ फिल्म अभिनेता, अभिनेत्रियां व खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों व सेलीब्रिटी होने के नाते अपना प्रभाव जमा लेते हैं परंतु ऐसे प्रभाव केवल वही नहीं डालते। हम भी प्रतिदिन, प्रति क्षण दूसरों पर अपना अच्छा प्रभाव छोड़ सकते हैं।
ऐसा जीवन के किसी भी क्षेत्र में, किसी भी रोल में (चाहे वह मां, पत्नी, पति, बच्चे, कर्मचारी या व्यवसायी किसी का भी क्यों न हो) संभव है। हमें जीवन का प्रत्येक क्षण सजगतापूर्वक जीना चाहिए। प्रायः हम लोग तयशुदा आदतों के अनुसार अपना जीवन जीते हैं। हमें एहसास भी नहीं होता कि हमारे कामों का दूसरों पर कैसा असर पड़ रहा है। इन हालातों में हमारा व्यवहार भी हमारे मूल्यों से मेल नहीं खाता पर अगर हम पूरी कोशिश करें तो उच्च स्तरीय जीवन जी सकते हैं।
सफलता के लिए सफल संबंधों की भूमिका बहुत महत्त्व रखती है। कोई भी व्यक्ति अकेला द्वीप नहीं होता और न ही वह अकेला ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। हम अपने जीवन में मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति से कुछ-न-कुछ सीख सकते हैं। विंस्टन चर्चिल (1874-1965), ब्रिटिश के प्रधानमंत्री ने एक बार कहा था-‘‘सदा सीखने को तैयार रहता हूं, हालांकि मुझे पढ़ाया जाना पसंद नहीं है।’’

हम प्रायः दूसरों से प्रेरित होते हैं या उन्हें प्रेरणा देते हैं। दूसरे शब्दों में कुछ लोग अपना हौंसला बढ़ाते हैं और कुछ लोग आपका उत्साह ठंडा कर देते हैं। कुछ लोग आपको नीचा दिखाने की कोशिश भी करते हैं पर वही लोग सफल हो पाते हैं जिन्हे दूसरों को उठाने की कला आती हो। दूसरों की प्रशंसा करना व उन्हें उत्साहित करना, इसे आप सफल संबंधों का आधार मान सकते हैं। लोगों को ऊंचा उठाने के लिए उनकी प्रशंसा करें। प्रशंसा में बहुत बड़ी शक्ति छिपी है। जब आप किसी की तारीफ करते हैं तो संबंध अपने-आप ही मजबूत होने लगते हैं।
आप वो समय याद करें जब किसी ने आपकी प्रशंसा की थी। आपको कितना अच्छा लगा होगा, संभवतः उस दिन के बाद आप उस व्यक्ति को और अधिक चाहने लगे। मेहनती व ईमानदार लोगों की तारीफ करें और उन्हें बताएं कि आप उनकी कद्र करते हैं। आप अपने शब्दों, किसी कार्ड या फोन कॉल द्वारा भी अपनी प्रशंसा जाहिर कर सकते हैं।
व्यक्ति की नहीं, उसकी किसी विशेषता की तारीफ करें। मान लें, आपको ऑफिस में एक मेहनती और लगन वाला कर्मचारी काम करता है। आप उससे कह सकते हैं-‘‘लगता है बस तुम्हीं सबसे पहले आते हो और सबसे आखिर में दफ्तर से जाते हो। तुमने तो दूसरों के लिए भी मिसाल कायम की है। तुम जैसा कर्मचारी/अधीनस्थ पाना मेरे जैसे बॉस के लिए बहुत बड़ी बात है।’’

हमें केवल इसलिए तारीफ नहीं करनी चाहिए कि तारीफ करना जरूरी है। हमें आसपास रहने वाले लोगों की खास आदतों या बातों को जान कर उनकी तारीफ करनी चाहिए। यहां झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं होगा। जब किसी से कोई गलती हो जाए, तो उसे उसकी भूल समझाते समय कुछ प्रशंसा के शब्द भी कहें। आपके संबंधों में इस व्यवहार से आश्चर्यजनक सुधार आएगा।
परिवार, मित्र व सहयोगियों के साथ सहयोग व संबंधों से मिलकर ही यह जीवन बनता है। जब हम लोगों को उनकी सकारात्मक विशेषताएं बताते हैं तो हमारे संबंधों में निखार आता है। दूसरे लोगों को नीचा दिखाने की बजाय उनके जीवन-स्तर में सुधार लाने की क्षमता से ही आपकी नेतृत्व शक्ति का पता चलता है। अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन (1810-1865) ने एक बार कहा था, ‘‘मैं धीमी गति से अवश्य चला पर मैंने कभी उल्टी चाल नहीं चला।’’
जब आप दूसरों की तारीफ करते हैं तो वे आपके वफादार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें पता चल जाता है कि आप उनकी परवाह करते हैं और उनसे स्नेह रखते हैं। यह रवैया आपकी सफलता में सहायक होता है।

ऊंची कल्पना करें

उत्साहहीनता और घमंड आपकी मानसिक शांति को भंग कर देते हैं। जब कभी हम ज्यादा थक जाएं, किसी काम में असफल होकर निराश हो जाएं, बीमार पड़ जाएं, कर्जे से घिर जाएं और लगने लगे कि हमारे जीने का कोई मतलब ही नहीं है तो हम पर उत्साहहीनता छा जाती है। असफलता व कुंठा भरे माहौल में हम ऊंची और अच्छी कल्पना ही नहीं कर पाते। साहस की कमी से ही हताशा पैदा होती है। इस जीवन-रूपी यात्रा में बिना किसी नक्शे के और सिद्धांतों की बजाय भ्रम के साथ चलने से ही ऐसे हालात बनते हैं। उत्साहहीनता एक ऐसी स्थिति है जहां आप एक ऐसे जंगल में खो जाते हैं, जहां से बाहर आने का मार्ग ही नहीं सूझता। हमारे मित्र व सहयोगी हमारे कामों का अपने तरीके से विश्लेषण करने के बाद हमें निरुत्साहित कर देते हैं और हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।
साहस को एक विशेषता या खासियत की तरह विकसित किया जा सकता है। स्पष्ट नजरिए के साथ अपनी क्षमताओं के संतुलित प्रयोग से हमारे भीतर साहस पैदा होता है। साहसी बनने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप कोई लक्ष्य चुनें और उसे पाने में जुट जाएं।
जो भी वादा करें, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो, उसे निभाने की कोशिश करें। इससे आपको आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह शांति व विकास की ओर पहला कदम होगा।

गर्व या घमंड भी आपके सारे प्रयत्नों को डांवाडोल कर देता है। अक्सर घमंड या अभिमान को किसी व्यक्ति की उपलब्धियों से प्राप्त संतुष्टि व आनंद के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह भी आपके जीवन में एक विनाशकारी तत्त्व हो सकता है। सी.एस. लुईस इस विषय में कहते हैं: ‘‘केवल कुछ पाने से नहीं अपितु दूसरे व्यक्ति से ज्यादा पाने की अनुभूति ही गर्व है-यह तुलना ही आप में घमंड पैदा करती है। घमंड एक आध्यात्मिक केंसर की तरह है-यह प्रेम, संतुष्टि व सामान्य बुद्धि की सारी संभावनाओं को खा जाता है।’’
कुछ लोग मानते हैं कि एक निश्चित जीवन-शैली होने से उनके गर्व को तुष्टि मिलेगी, चाहे वह उनकी आय के साधनों से ज्यादा ही क्यों न हो। ऐसे लोग सदा अपने कपड़ों, शरीर व घर आदि की तुलना दूसरों से करते रहते हैं। कुछ लोग अपने मित्रों व सहयोगियों की संख्या व उनसे प्राप्त होने वाली प्रशंसा की मात्रा को अभिमान का विषय मानते हैं। कुछ लोगों को अपनी डिग्रियों के बल पर शिक्षित होने का मान होता है। उन्हें लगता है कि उच्च शिक्षा उन्हें सबसे उच्च पद पर पहुंचा सकती है। यद्यपि हमें ऐसे लोगों की तारीफ करनी चाहिए जिसके पास अच्छा घर, अधिक मित्र, धन अथवा नई गाड़ी हो। घमंड को नफरत व जलन से नहीं जोड़ना चाहिए।
कुछ लोग यही मानकर संतुष्ट हो लेते हैं कि वे दूसरों के मुकाबले सफलता की काफी सीढ़ियां चढ़ चुके हैं। उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं होती कि उनकी सीढ़ी सही दीवार के सहारे टिकी है या नहीं। घमंडी लोग अपनी सारी ऊर्जा व समय यही जानने में लगा देते हैं कि किसके पास बड़ी गाड़ी है, किसका घर सबसे सुंदर है या कौन शहर के पास इलाके में रहता है। उनके लिए प्रतिस्पर्धा का स्वर, आत्मा की गुनगुनाहट से कहीं ऊंचा होता है। इससे उनके जीवन की प्राथमिकताएं नष्ट हो जाती हैं।

अभिमान नम्रता का शत्रु है। हमें यह मान लेना चाहिए कि हम अकेले नहीं जी सकते और हमारे जीवन की विशेषता दूसरों के जीवन से भी जुड़ी है। हम जितना ही लोगों व मूल्यों की कद्र करेंगे, हमारी मानसिक शांति में इजाफा होगा।
कई बार जब हम किसी काम को पूरे मन से करने की इच्छा प्रकट करते हैं तो उसका नतीजा उसी समय मिल जाता है। यह कोई चमत्कार नहीं हमारी कड़ी मेहनत और प्रयत्नों का फल होता है। संसार की अनेक शक्तियां हमारे लिए काम करती हैं। हम जान भी नहीं सकते कि वे अज्ञात रूप में किस तरह हमारे लिए सहायक हो जाती हैं। जब भी हम कोई फैसला लेने लगते हैं, वे सभी शक्तियां मिलकर हमारी सहायता करने आ पहुंचती हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाते। इसलिए मैं कहता हूं कि ऐसा कोई काम नहीं, जिसे आप नहीं कर सकते। जब आप वास्तव में किसी काम को करना चाहते हैं तो उसे होने से कोई नहीं रोक सकता।

बड़े व महान काम करने के लिए एक विशेष प्रकार की मानसिक अवस्था चाहिए। इसके लिए दृढ़ संकल्प, आशावादिता, स्पष्टता, मानवता के लिए प्रेम तथा विनय भी अनिवार्य गुण हैं। आशावादी चितंन आपको नया नजरिया देता है। अगर आपको पूरा विश्वास हो कि कोई-न-कोई रास्ता अवश्य निकल आएगा तो परिस्थियां आपके लिए स्वयं ही हल प्रस्तुत कर देती हैं। दृढ़ संकल्प बहुत काम आने वाली चीज है चाहे आप किसी काम को करने के मूड में नहीं हैं, चाहे आपको दूसरों की तुलना में ज्यादा काम दिया जा रहा हो, चाहे आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ रही हो, काम करने से न घबराएं। साथ ही आपको स्पष्ट रूप से केंद्रित भी रहना होगा। आप जितना अधिक केंद्रित होंगे, घटनाएं, आपके पक्ष में घटने लगेंगी। अपने लक्ष्यों को लिखने की आदत बनाएं। अगर आप किसी बात में पूरी तरह विश्वास रखने लगते हैं तो ब्रह्मांडीय बल उस घटना के घटने में पूरा योगदान देता है। चाहे दूसरे कुछ भी कहें, लालच से बच कर रहें। केवल स्नेह व आदर उन लोगों को आप तक खींच लाएगा जो आपकी मदद कर सकते हैं। यह सच ही तो है, जो आप दूसरों को देते हैं, वही आपके पास लौटकर आता है।

सकारात्मकता पर क्रेंद्रित रहे

शेक्सपीयर ने अपने नाटक ‘हेमलेट’ में कहा है, ‘‘कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता, आपकी सोच उन्हें वैसा बनाती है।’’ एक बार एक राजा ने अपने दरबारियों को बताया कि उसके दिमाग में दो कुत्ते रहते हैं। जिनमें से एक गुस्सैल और भयानक तथा दूसरा साहसी व मनमौजी है। यह दोनों कुत्ते लगातार लड़ते रहते हैं। एक दरबारी ने पूछा-‘‘इनमें से किस कुत्ते की जीत होती है ?’’
राजा ने उत्तर दिया-‘‘जिसे मैं खुराक देता हूं।’’
यह हम सबके लिए भी सच है। हर दिन हमारे लिए चुनाव लेकर आता है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम सकारात्मक पहलू पर केंद्रित होंगे अथवा नकारात्मक पहलू पर। नकारात्मकता से असुरक्षा भय व मनहूसियत का माहौल पैदा होता है। सकारात्मक विचार व रवैए से आशा की किरण जन्म लेती है-यह सारा चुनाव आप पर ही है। अक्सर लोग इस खास तथ्य की उपेक्षा करके यह मानने लगते हैं कि उनके कर्म ही जीवन की सफलता असफलता व मानसिक दशा तय करते हैं।
‘रिचर्ड कार्लसन’ के अनुसार कुछ भी सत्य से आगे नहीं होता, ‘‘हालात नहीं, हालात के बारे में हमारी सोच यह तय करती है कि हम कैसा महसूस करते हैं।’’

मेरे उन दो मित्रों को ही लें। वे दोनों ही पचास वर्ष की आयु के हैं। उन दोनों के पास अपनी शेष आयु के लिए अलग-अलग राय है। एक का मानना है कि उसकी आयु अब थोड़ी रह गई है इसलिए उसे जिंदगी के बाकी काम जल्दी निपटा देने चाहिए। दूसरे का मानना था कि जीवन का पचासवां वर्ष उसके लिए नई चुनौती लाया है जिन्हें स्वीकार कर वह अपने व्यवसाय में शिखर तक पहुंच सकता है। पैंसठ वर्ष की आयु में वह एक धनी व्यक्ति बन गया। हमारे जीवन की घटनाएं नहीं, विचार ही यह निश्चित करते हैं कि हमारा आज और आने वाला कल कैसा होगा। सौभाग्य से ईश्वर ने हमें इन घटनाओं को देखने के लिए सकारात्मक दृष्टि दी है।

सबक लेना सीखें

अगर आपके जीवन में कोई मुश्किल घटना घटे तो उससे सबक लेने की कोशिश करें। अपने-आपसे पूछें-‘‘इस घटना से मैं क्या सीख सकता हूँ।’’ मैं इस घटना का इस्तेमाल बेहतर इंसान बनने के लिए किस तरह कर सकता हूं। यह रवैया आपकी चुनौती को सकारात्मक बना देगा। सदा ऐसी घटनाओं का बारीकी से विश्लेषण करें। इस तरह ये घटनाएं भी आपके लिए कुछ सीखने व जानने का सुनहरा अवसर बन जाएंगी।

धैर्य रखें

सदा बुरी बातों का रोना न रोएं। बुरी घटना के प्रभाव को सकारात्मक बनाने की कोशिश करें। अपने जीवन की कमियां न गिनाएं। अक्सर बेरोजगार लोग अपनी जिंदगी को कोसते हैं कि न तो उसके पास नौकरी है और न ही धन। अक्सर ऐसे लोगों को नौकरी मिल जाए तो वे समय की कमी का रोना रोने लगेंगे। ऐसे लोग सदा नकारात्मकता में ही खोए रहते हैं। अगर आप में भी ऐसी भावना आए तो एक कागज-कलम लेकर बैठ जाएं और उन सब नियामतों की सूची बनाएं जिनसे आपको खुशी व तसल्ली मिलती हो तब आपको पता लगेगा कि जिंदगी आप पर कितनी मेहरबान है। फिर आप प्रभु से इन नियामतों के लिए प्रार्थना करें और अपने दुखों को दूर करने की हिम्मत मांगें। सर्वेक्षणों से पता चला है कि कि ईश्वर के प्रति इस कृतज्ञता के समय आपका मन इतना शांत रहता है कि आपको क्रोध, भय व उदासी छू भी नहीं पाती। इस साधारण सी तकरीब से आप सकारात्मक सोच पा लेंगे।

जीवन को गुलाब के फूलों की तरह लें, उसके कांटों के रूप में नहीं। अगर हमारी गाड़ी या जहाज देर से आए तो हम उसकी देरी के कारणों पर केंद्रित हो जाते हैं उसके सही सलामत पहुंचने के लिए प्रभु को धन्यवाद नहीं देते। हम घर के नौकरों की शिकायत करते हैं लेकिन प्रभु को सुख-सुविधाओं से भरे सुंदर घर के लिए धन्यवाद नहीं देते। दूसरे शब्दों में, जब हमें गुलाब मिलते हैं तो हम उनकी सुंगध लेने की बजाय कांटों की शिकायत ले बैठते हैं। यह एक गलत प्रतिक्रिया है परंतु अधिकतर लोगों को किसी भी घटना का नकारात्मक पहलू देखने की आदत-सी पड़ जाती है। किसी भी हालात में अच्छाई को तलाशें और जीवन का पूरा मजा लें। अपने-आपसे पूछें-‘‘इस घटना में कौन-सी अच्छाई छिपी है जिसे मैं अपना सकता हूं।’’ इससे आपकी सारी परेशानियां दूर तो नहीं होंगी पर तनाव की मात्रा घट जाएगी। जीवन में कांटों की नहीं, गुलाबों की तलाश करें। अपने-आपसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न पूछें और आपका दिमाग उत्तर देगा। अक्सर ‘क्यों’ से आरंभ होने वाले प्रश्नों का सीधा संबंध अतीत से होता है जिसे दिमाग अच्छी तरह समझ जाता है। सही व सटीक उत्तर पाने के लिए ऐसे प्रश्न पूछें जो ‘क्या’ से शुरू होते हों। इससे आपके दिमाग की रचनात्मकता बढ़ेगी। पीटर मैकविलियम कहते हैं-‘‘हमारा जीवन अच्छे-बुरे व सकारात्मक-नकारात्मक का मिश्रण है। जब हम अच्छाई पर ध्यान लगाते हैं तो हम बेहतर महसूस करते हैं। अगर हम ऐसा नहीं करते तो बेहतर महसूस नहीं करते और इसी तरह जीवन चलता रहता है।’’ अगली बार जब भी कोई चुनौती आपके सामने आए तो ‘मैं ही क्यों’ कहने की बजाय अपने-आपसे पूछें कि आप इस चुनौती पर काबू पाने के लिए क्या कर सकते हैं। जीवन में प्रसन्नता व संतुष्टि पाने के लिए सभी परिस्थितियों की सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करें। यह एक चुनाव है जो हमीं पर निर्भर करता है।


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