सुनहरे कल की ओर - जोगिन्दर सिंह Sunhare Kal Ki Or - Hindi book by - Joginder Singh
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सुनहरे कल की ओर

जोगिन्दर सिंह

प्रकाशक : फ्यूजन बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2006
पृष्ठ :248
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 4827
आईएसबीएन :81-89182-58-7

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सतत परिश्रम और लगन के बल पर किस तरह एक सामान्य व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुँच सकता है, इसे बखूबी चरितार्थ किया है सी.बी.आई. के पूर्व निदेशक श्री जोगिन्दर सिंह (आई. पी. सेवानिवृत्त) ने।

Sunhare Kal Ki Or

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

सतत परिश्रम और लगन के बल पर किस तरह एक सामान्य व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुँच सकता है, इसे बखूबी चरितार्थ किया है सी.बी.आई. के पूर्व निदेशक श्री जोगिन्दर सिंह (आई. पी. एस. सेवानिवृत्त) ने। सफलता की कहानी कहते उनके लेख किसी भी महत्वाकांक्षी युवा व्यक्ति के लिए प्रेरणास्त्रोत हो सकते हैं।

श्री जोगिन्दर सिंह द्वारा लिखी इस पुस्तक में आत्म-सुधार के अचूक मंत्र हैं। अपनी विजयगाथा में उन्होंने सफलता के राज खोले हैं और बताया है कि किस प्रकार विजेता बनने का सफर तय होता है। एक मंत्र जो आपको शीर्ष तक पहुँचा सकता है, वह कुछ ऐसे हैं- अपने लिए एक बेहतर अवसर तलाशिए, बड़े सपने देखिए और उन्हें साकार करने के लिए कठिन श्रम से नाता जोड़िए। विजेता बनने के लिए जरूरत है तो बस अपने हुनर और नजरिए को सकारात्मक दिशा में मोड़ने की।

याद रखिए, सफलता हमेशा इच्छा से परिचालित होती है। थोड़ी-सी मेहनत और थोड़ा बलिदान, आपको सफलता की ओर प्रवृत्त कर सकता है। आपका वर्तमान महत्वपूर्ण है, जो उम्मीद है, वह तभी साकार रूप ले सकती है जब आप केन्द्रित हों क्योंकि उद्देश्य ही सफलता का आधार है।.....

सफल व असफल व्यक्तियों के भेद में साहस व ज्ञान की कमी कारण नहीं बनते अपितु संकल्प शक्ति का अभाव ही उन्हें अलग लगता है। आपको अपने लक्ष्यों के प्रति संकल्पबद्ध होना होगा। चाहे लाख बाधाएं ही क्यों न आए। आपको इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए साहस एवं प्रेरणा जुटाने होंगे। अपनी योग्यताओं पर भरोसा रखना सीखना होगा। सफलता के पीछे अनेक अथक निद्राहीन रातों का इतिहास छिपा रहता है। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।

भूमिका

प्रत्येक व्यक्ति सफलता चाहता है। एक प्रश्न आपको स्वयं से अवश्य पूछना चाहिए कि आप सफलता को किस तरह परिभाषित करते हैं। आपकी सफलता की परिभाषा क्या है ? प्रचुर मात्रा में धन, शक्ति, अधिकार, उपलब्धि, सन्तुष्टि, एक कथ्य जीवन, पहचान रोमांच या फिर एक सृजनधर्मा लेखक ? हो सकता है आप इनमें से सबको अथवा कुछ को चाहते हो, वास्तव में विभिन्न व्यक्तियों के लिए सफलता की विभिन्न परिभाषा हो सकती है।

आप अपने जीवन में निश्चित नीतियों व आदर्शों को सम्मिलित कर शत-प्रतिशत सफलता पा सकते हैं।
यह पुस्तक एक मार्गदर्शक के रूप में आपको सफलता की राह दिखाते हुए सपने साकार करने में सहायक होगी। आधुनिक युग की सबसे बड़ी देन यह है कि आपको नए सिरे से कोई भी अन्वेषण करने की आवश्यकता नहीं। आप मेरे और अपने जन्म से बहुत पहले अपनाई गई नीतियों व आदर्शों का अनुसरण कर, अपना प्राप्य पा सकते हैं। आप इस पुस्तक में स्थान-स्थान पर दिए गए सुझावों का अनुसरण कर लाभान्वित हो सकते हैं।

सफल व असफल व्यक्तियों के भेद में साहस व ज्ञान की कमी कारण नहीं बनते अपितु संकल्प शक्ति का अभाव ही उन्हें अलग करता है। आपको अपने लक्ष्यों के प्रति संकल्पबद्ध होना होगा। चाहे लाख बाधाएं ही क्यों न आए। आपको इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए साहस एवं प्रेरणा जुटाने होंगे। अपनी योग्यताओं पर भरोसा रखना सीखना होगा। सफलता के पीछे अनेक अथक निद्राहीन रातों का इतिहास छिपा रहता है। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। अरे, मैं यही थम रहा हूं ताकि आपका कौतूहल बना रहे ! स्वयं इस पुस्तक को पढ़े और सफलता प्राप्ति के सूत्र जान लें। शुभकामनाओं सहित !
-जोगिन्दर सिंह,
आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त)

प्रकाशकीय

‘सुनहरे कल की ओर’ यह पुस्तक उस नई पीढ़ी को समर्पित है जो अपनी बाहों में पूरा संसार भर लेना चाहती है। सफर लंबा है मुश्किलें बहुत हैं, यही मुश्किलें बहुत हैं, यही मुश्किलें जब उसे निराशा के अथाह सागर में डुबो देती हैं तो किसी ना किसी मार्गदर्शक, सच्चे साथी अथवा अनुभवी का आश्रय लेना पड़ता है। हमारी इस पुस्तक में लेखक ने एक अनुभवी व सहृदय मित्र की भांति सफलता के आकांक्षी जिज्ञासुओं की समस्याओं के हल प्रस्तुत किए हैं।

समय का नियोजन, अव्यवस्था से बचने के उपाय, सकारात्मक मानसिकता का विकास, अपनी प्राथमिकताओं व मूल्यों का समर्थन, भविष्य की योजनाएं, सफलता प्राप्ति के रहस्य, आत्मविश्वास में वृद्धि, अनुशासन का महत्त्व, सपनों का उचित प्रयोग आदि अनेक बिन्दुओं पर लेखक ने सटीक व सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए हैं जो केवल शब्द मात्र न हो कर, उनके जीवन की कसौटी पर कसे गए हैं।
आईए, उनके अनुभवों से हम भी लाभ उठाएं और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ चलें।

कुछ मेरी ओर से............

जीवन कठिन चुनावों से भरा है। यदि दोनों वस्तुएं आपके लिए आनंददायी हो तो उनमें से एक का चुनाव कर पाना कठिन हो जाता है। एक बार निर्णय लेने के पश्चात् पीछे न हटें तथा परिणामों का डट कर मुकाबला करें। यदि आपने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए श्रेष्ठ निर्णय लिया है तो अपने चुनाव के पक्ष में खड़े होने का साहस रखें। प्रत्येक विकल्प आपको आपकी काल्पनिक छवि के निकट लाता है। अपनी योग्यता पर संदेह कर, इस प्रक्रिया में बाधा न डालें।

यह जानने का प्रयास करें कि आप जीवन से क्या चाहते हैं तथा आप इसके लिए क्या कर सकते हैं ? सफलता प्राप्ति के लिए आप किन नीतियों का पालन करना चाहेंगे ? सफलता के पीछे कौन-सा रहस्य छिपा है ? स्वयं को प्रतिदिन तरोताजा रखें। जब भी लक्ष्य तक पहुंचने का कोई पड़ाव पूरा हो तो पीछे मुड़कर वहां अवश्य देखें जहां से आप चले थे। अपने स्वप्नों को साकार करने का विश्वास उत्पन्न करें। जब भी किसी संकट का सामना करना पड़े तो उसे सफलता प्राप्ति की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा मानें। सफलता के प्रति सचेत रहें इस प्रकार आप सफलता के लिए पथ सुनिश्चित कर सकते हैं। यह प्रसन्नता की ओर आपका पहला कदम होगा यह कठोर भी हो सकता है। किसी एक राह को चुनते समय आपको दूसरी संभावनाओं को नकारना भी पड़ सकता है पर एक बार आगे बढ़कर कदम पीछे न हटाएं नि:संदेह यह पथ कठोर व कांटों से भरा होगा।
साहसी बनें व जीवन का सामना करें। कार्य के अतिरिक्त भार से छुटकारा पाना है तो कार्य करने का निरन्तर अभ्यास विकसित करें। काम के अतिरिक्त बोझ का दबाव आपकी शारीरिक क्षमता पर भी पड़ता है। बीती बातों पर रोने व स्वयं पर दया दिखाने में समय न नष्ट करें। ‘यदि ऐसा होता’ कल्पनाओं में कीमती समय न खोएं। अपने विश्वास व क्षमता पर अविश्वास व संदेह को हावी न होने दें।

सफलता के विषय में दिये गए सुझावों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। अधिकांश व्यक्ति अपने ही शत्रु होते हैं। कठोर आलोचनात्मक होने के नाते स्वयं को प्रसन्न करने व प्रोत्साहित करने की बजाय यही विश्वास दिलाते रहते हैं कि वे कभी भी सफल नहीं हो सकते। इसके बजाय आपको अपने आपसे मित्रवत् व्यवहार करना चाहिए था कुछ अच्छा कर लेने पर प्रशंसा भी देनी चाहिए।

कुछ लोगों की अपने विषय में राय कुछ अच्छी नहीं होती। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए आपको छवि में सुधार लाना होगा। जांच करें कि आप अपने विषय में क्या सोचते हैं तथा आप स्वयं को नीचा दिखाने के लिए प्रयासरत क्यों हैं ? थोड़ा और गहराई में जाकर जानने का प्रयत्न करें कि आपकी ऐसी छवि क्यों बन गई जिसे आप स्वयं भी पसंद नहीं करते ? स्वयं से संबंधों में सुधार लाएं तथा मधुर संबंधों की पहल करें। अपने अतीत में हुई भूलों के लिए स्वयं को क्षमा देकर संबंधों की शुरूआत की जा सकती है। हम सबके व्यक्तित्व में कुछ ऐसा अवश्य होता है जिसे हम पसंद करते हैं। नि:संदेह आपके व्यक्तित्व में भी ऐसा कोई आकर्षण अवश्य होगा। आप वहीं से प्रारम्भ करें। स्मरण रहे, हम सबके जीवन का कोई न कोई उद्देश्य अथवा सार्थकता है। ईश्वर ने हमें इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए क्षमता प्रदान की है। जीवन की किसी भी घटना तथा किसी भी बड़े स्वप्नों को छोटा न मानें। मार्शा सिनेटर कहती हैं-

‘‘अपनी ही आत्मा की खोज व जीवंतता के प्रति आग्रह ही आपके जीवन में विशेष महत्व रखता है। आप और मैं पूर्णतया विशिष्ट बनने के लिए ही पैदा हुए हैं। यही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का सार्थक उद्देश्य होना चाहिए।’’
नोरमन विनसेन्ट इसी विषय में आगे कहते हैं-
‘‘जो व्यक्ति अपने ही रोमांचपूर्ण विचारों पर अमल करते हैं तथा नए विचारों पर शासन करते हैं, वे ही नए संसारों का अन्वेषण करते हैं। रोमांच बढ़ता है और नए अवसर सामने आते चले जाते हैं।’’



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