प्राणी-जगत के आश्चर्य - सुरेन्द्र Prani-Jagat Ke Aascharya - Hindi book by - Surendra
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प्राणी-जगत के आश्चर्य

सुरेन्द्र

प्रकाशक : एरागॉन पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रकाशित वर्ष : 2006
पृष्ठ :16
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 5037
आईएसबीएन :81-89377-10-8

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प्राणी जगत के पशु पक्षियों का वर्णन।

Prani Jagat Ke Aashcharya-A Hindi Book by Surendra

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

प्राणी जगत के आश्चर्य

‘उड़न-मत्स’ कितना भाग्यशाली है कि यह तैरती तो है ही, उड़ती भी है। पर यह पक्षी की तरह नहीं उड़ती है। इनके पंख (fins) इतने ज्यादा चौड़े होते हैं कि वे इसे हवा में कुछ देर तक उड़ाए रखें।

यह पानी की सतह के थोड़ा ही नीचे तैरती है। जैसे ही कोई बड़ी मछली इसका शिकार करने इसकी तरफ बढ़ती है यह पानी से ऊपर उछल जाती है और हवा में उड़ती सी दिखाई देती है, पर इतनी देर में यह काफी फासला तय कर लेती है।
पुराने जमाने के नाविकों ने इसे जब उड़ते देखा तो हैरान रह गए। दरअसल यह हवा में ग्लाइड कर रही थी। वे समझे कि यह हवा में उड़ रही है। यह मछली-जगत की एकमात्र मछली है जो उड़ सकती है या आप कह सकते हैं ग्लाइड कर सकती है। अपनी इसी विशेषता से यह दुश्मनों से बची रहती है।

बहुत से प्राणियों का शिकार मनुष्य ने इतनी निर्ममता से किया कि वे लुप्त हो गए।
उस जाति का कोई अन्तिम प्राणी भी न बचा। डोडो भी उन्हीं में से एक है।
उनका मांस स्वादिष्ट होने के कारण मनुष्य ने इसे अन्धा-धुन्ध मारा। यहाँ तक कि यह प्रजाति ही नष्ट हो गई। अब इसे म्यूजियम में ही देखा जा सकता है।


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