गणित के रोचक खेल - भगवान स्वरूप गुप्त, शैलेंद्र भूषण Ganit Ke Rochak Khel - Hindi book by - Bhagwan Swarup Gupta and Shailendra Bhushan
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गणित के रोचक खेल

भगवान स्वरूप गुप्त, शैलेंद्र भूषण

प्रकाशक : विद्या विहार प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :128
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 5174
आईएसबीएन :81-85828-58-x

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संख्याओं के तिलिस्म का नाम ही गणित है।

Ganit Ke Rochek Khel

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

प्राक्कथन

संख्याओं के तिलिस्म का नाम ही गणित है। इस तिलिस्म (मायाजाल) में फँसे व्यक्ति को यह विषय नीरस प्रतीत होता है; परंतु इस तिलिस्म का रहस्य पता चलने पर उसे बहुत ही रोचक लगने लगता है। प्रस्तुत पुस्तक में दैनिक जीवन से संबंधित कुछ रहस्यमयी समस्याओं के समाधान देकर गणित के प्रति रुचि उत्पन्न करने का प्रयास किया गया है। इसमें दी गई समस्याओं के हलों को समझने से पाठकों की बुद्धि के विकास में निश्चित रूप से सफलता मिलेगी, ऐसी हमारी धारणा है। इस पुस्तक में अंकों से संबंधित प्रश्न, गणितीय सूत्रों पर आधारित प्रश्न, क्षेत्रफल से संबंधित प्रश्न, युक्ति-युक्त प्रश्न, माया वर्ग आदि-आदि अनेक प्रकार के रोचक प्रश्न दिए गए हैं। कुछ प्रश्नों के माध्यम से दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान अत्यंत सरल ढंग से किया गया है। पुस्तक में दी गई समस्याएँ लोक-प्रचलित हो सकती हैं अथवा प्राचीन गणितज्ञों द्वारा रचित कुछ समस्याएँ कुछ नवीन भी हो सकती हैं।

इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य पाठकों का मनोरंजन तथा गणित के प्रति उनकी रुचि उत्पन्न करके उनकी चिंतन और तर्क-शक्ति का विकाश करना है।
 हम श्री वीरेंद्र कुमार वार्ष्णेय, प्रवक्ता, गणित, एम.एल. इंटर कॉलेज, सहपऊ, मथुरा के विशेष रूप से आभारी हैं; जिनके अप्रतिम सहयोग से पुस्तक को इस रूप में प्रस्तुत करना संभव हो सका।

जन्मतिथि बताना


गंगा किनारे पिकनिक पर पहुँचे छात्र 11 बजे तक थककर चकनाचूर; खाना बनने में देरी। छात्र व्यथित, अन्यमनस्क तथा बोर नजर आने लगे। ऐसे में एक छात्र राममनोहर ने सभी साथियों से कहा, ‘मैं आप में से जो चाहे उसकी जन्मतिथि बता सकता हूँ।’ सभी छात्रों के चेहरे से थकान का भाव तिरोहित हो गया तथा सब कहने लगे-‘मेरी जन्मतिथि बताओ, मेरी बताओ।’
राममनोहर ने कहा, ‘मेरे कहने के अनुसार थोड़ी-सी गणना करनी पड़ेगी; क्योंकि मैं गणित में कमजोर हूँ।’ श्याम ने सलाह दी, ‘भूषण साहब की ‘खेल-खेल में गणित’ पढ़ लो, कमजोरी दूर हो जाएगी।’ इसपर राम ने सुझाव मानते हुए सभी साथियों से कहा-

1.    जिस महीने में आप पैदा हुए हैं उस महीने की संख्या को 5 से गुणा करो-उदाहरण के लिए जनवरी को एक, फरवरी दो, अप्रैल चार, अक्टूबर दस तथा दिसंबर के बारह मानो।
2.    अब प्राप्त गुणनफल में 6 जोड़ दें तथा इस प्रकार प्राप्त योगफल (जोड़) को 4 से गुणा कर दें।
3.    अब प्राप्त गुणनफल में 9 जोड़ दें तथा 9 जोड़कर प्राप्त हुए योग को 5 से गुणा करें तथा गुणनफल को अच्छी तरह से याद कर लें।
4.    अब इस गुणनफल में जन्मतिथि अर्थात् जिस तारीख को पैदा हुए हैं, उस तारीख की गिनती को जोड़कर प्राप्त संख्या मुझे बता दें।
श्याम ने अपनी संख्या बताई 766 तो राम मनोहर ने श्याम की जन्मतिथि 1 जून बताई; अर्थात् श्याम 1 जून को पैदा हुआ।

हरी ने अपनी संख्या 1280 बताई तो राममनोहर ने कहा, ‘हरी भाई, आपकी जन्मतिथि 15 नवंबर है।’
शीला बहिन ने अपनी गणना संख्या 1099 बताई तो राममनोहर ने कहा, शीला बहिन, आपने गणना गलत की है, फिर से करो।’ इसपर शीला ने अपनी जन्मतिथि 25 सितंबर बताई तो राम ने कहा, आपकी गणना का योग 1090 होना चाहिए। आओ, इस तिथि की गणना सबके साथ करें।’

शीला की जन्मतिथि 25 सितंबर, जिसमें जन्म माह का मान 9 तथा तिथि 25 है।
1.    महीने की संख्या को 5 से गुणा -9×5=45
2.    अब 45 में 6 जोड़ें-45+6=51
3.    इस योगफल 51 को 4 से गुणा करें तो गुणनफल-51×4=204
4.    204  में 9 जोड़ने पर योगफल -204+9=213
5.    इसे 5 से गुणा करें तो गुणनफल-213×5=1065
6.    अब इस संख्या में जन्मतिथि के अंक 25 जोड़ने पर योग-1065+25=1090

इस गणना के पश्चात् कामेश ने राममनोहर से पूछा कि बिना गणना किए आपने शीला की गणना संख्या का सही अनुमान किस प्रकार लगा लिया तथा बताई गई संख्या से जन्मतिथि कैसे निकाली ?
राम के उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना अनेक सहपाठी अपनी गणना के आधार पर जन्मतिथि जानने के लिए हल्ला मचाने लगे। राम ने सभी की जन्मतिथियाँ सही-सही बता दीं।
पिकनिक पार्टी का उदासीन वातावरण उल्लासमय हो गया तथा भोजन में विलंब का खयाल भी दूर हो गया। राम ने इस खेल का विवरण निम्न प्रकार दिया, जिससे शीला के साथ-साथ सभी की जिज्ञासाओं का निराकरण हो गया-

सूत्र रूप-


[{(M×5) +6}×4+9]×5+ जन्मतिथि की संख्या जहाँ M जन्म का महीना है।


उत्तर निकालने की विधि-



बताई गई गणना संख्या; जैसे 1280 में से 165 घटा दो तो शेष संख्या-1280-165=1115
इस संख्या में इकाई, दहाई अंकों से बनी संख्या 15 है तथा सैकड़े और हजार से बनी अंक संख्या 11 है।
अतः इस तरह प्राप्त संख्या के अंतिम दो अंक अर्थात् इकाई, दहाई से बनी संख्या जन्मतिथि होती है।
तथा इस तरह प्राप्त संख्या के प्रथम दो अंक अर्थात् सैकड़े तथा हजार से बने अंकों की संख्या जन्म माह बताती है।
उपर्युक्त संख्या में 11 अर्थात् नवंबर जन्म माह तथा 15 जन्म तारीख हुई।
इस प्रकार हम देखते हैं कि प्राप्त गणना के प्रथम दो अंक अर्थात् सैकड़ा और हजार के अंक जन्म माह की संख्या के अनुसार क्रमशः 01,02, से लेकर 12 तक हो सकते हैं तथा अंतिम दो अंकों का मान 01 से लेकर .31 तक हो सकता है; अर्थात् किसी भी गणना में सबसे छोटी राशि 266 तथा सबसे बड़ी राशि 1396 प्राप्त होगी, जिसमें से 165 घटाने पर क्रमशः 101 तथा 1231 उत्तर मिलता है। 101 संख्या 1 जनवरी तथा 1231 संख्या 31 दिसंबर को निरूपित करती है।
इन संख्याओं के अलावा प्राप्त अन्य कोई संख्या गलत गणना के कारण प्राप्त होती है। शीला को भी अपनी जिज्ञासा का उत्तर मिल गया था।


आयु एवं जन्म वर्ष बताना



पिकनिक पर गए सभी छात्रों में उत्सुकता जाग्रत हो गई थी। सभी छात्र राममनोहर से कहने लगे, ‘जन्म तिथि के साथ जन्म का वर्ष भी बताओ।’ तभी श्याम भोजन तैयार होने की सूचना देने आया। उसने भी छात्रों की बात सुन ली थी।
श्याम बोला, ‘यदि गणना करके राम भैया ने जन्मतिथि बताई है तो गणना करके मैं आयु बता सकता हूँ। आयु के आधार पर आप लोग जन्म वर्ष की गणना कर सकते हैं।’
श्याम ने कहा कि सब लोग अपनी वर्तमान आयु में अगले वर्ष की आयु जोड़ लें और योग को 5 से गुणा करें। सबने कहा-‘कर लिया, अब क्या करें ?
श्याम ने कहा, ‘प्राप्त गुणनफल में जो जिस सन् में पैदा हुआ है उस वर्ष का इकाई अंक भई जोड़ लें और जो योगफल प्राप्त हुआ है उसमें से 5 घटा दें। अब जो संख्या बची है वह मुझे बता दें।’
हलवाई, जो पास ही बैठा सुस्ता रहा था, बोला-‘650’। श्याम ने हलवाई की उम्र 65 वर्ष बताई, जो सही थी।

सूत्र रूप-


(वर्तमान आयु की संख्या+अगले वर्ष की आयु)×5+जन्म वर्ष का इकाई का अंक-5=शेष के बाईं ओर के 2 अंक से बनी संख्या सही आयु की द्योतक।

गणना विधि-



श्याम ने स्पष्ट करते हुए कहा-
(क)    मान लीजिए हरी की वर्तमान आयु 18 वर्ष है। सूत्र के अनुसार इसमें अगले वर्ष की आयु 19 वर्ष का 19 जोड़ा।
(ख)    दोनों संख्याओं का योग हुआ-18+19=37
(ग)    अब इस योग को संख्या 5 से गुणा किया तो गुणनफल हुआ-37×5=185
(घ)    माना हरी 1977 में पैदा हुआ था तो वर्ष का इकाई अंक हुआ 7।
(ङ)    अब इस इकाई अंक 7 को (ग) में प्राप्त गुणनफल 185 में जोड़कर 185+7=192 प्राप्त किया।
(च)    अब (50) में प्राप्त राशि में से 5 घटाकर संख्या प्राप्त हुई 187 (192-5)।
(छ)    संख्या 187 के बाईं ओर के दो अंक अर्थात् 18 वर्ष ही उस व्यक्ति की आयु सही है।
भोजन तैयार था, अतः सब लोग भोजन पर टूट पड़े।
भोजन के पश्चात्, सब लोग पुनः एकत्र हुए तो हरी ने श्याम से पूछा, ‘श्याम भाई, आपने उम्र तो बता दी परंतु जन्म वर्ष नहीं बताया। क्या जन्म वर्ष नहीं बता सकते ?’
हरी ने थोड़ा सोचकर कहा, ‘1977’।
बताइए श्याम ने हरी के जन्म का वर्ष कैसे निकाला ?


विधि-


प्राप्त आयु को प्रश्न पूछे जाने वाले वर्ष (वर्तमान सन्) से घटा दो। प्राप्त वर्ष संख्या है जन्म वर्ष है।


1 से 100 तक की क्रमागत संख्याओं का योग



राम, श्याम, हरी और मीना ताश का खेल ‘सीप’ साथ-साथ खेल रहे थे। श्याम ने पूछा, ‘कितने नंबर की ‘सीप’ खेलें ?’ इसपर राम ने कहा, ‘100 नंबरी सीप खेलेंगे।’
मीना ने पूछा, ‘यह 100 नंबर किस हिसाब से हुए ?’ इसपर राम ने कहा, ‘इक्के से बादशाह तक प्रत्येक ताश के क्रमशः इक्के का एक, दुक्की का दो, गुलाम के ग्यारह, बेगम के बारह तथा बादशाह के तेरह। इनका योग हुआ इक्यानवे।’
मीना इन्हें एक जमा दो बराबर तीन करके जोड़ने लगी।
1+2=3, 3+3=6, 6+4=10....
इसपर हरी ने मीना से कहा कि इस तरह गिनने में बहुत देर लगेगी, निम्न दोहे से तुरंत निकल आएगा-
आदि अंत का योग कर, मध्य गुणा कर देव।।
अर्थात् पहली संख्या और अंतिम संख्या को जोड़कर उन संख्याओं की गिनती के आधे से गुणा कर दो तो प्राप्त गुणनफल ही अभीष्ट उत्तर होगा।


उदाहरण-



1से 4 तक की संख्याओं का योग
1+2+3+4=10
यहाँ प्रथम संख्या 1 तथा अंतिम संख्या 4 है
नियम से (1+4)×4/2
=5×2
=10
इसी तरह 1 से 13 तक की संख्याओं का योग-
(1+13)×13/2
=14×13/2
=7×13=91
इसी तरह 1 से 100 तक की संख्याओं का योग-
(1+100)×100/2=101×50=5050


बालक गॉज की प्रतिभा



घटना (1787) जर्मनी की है। महीने का अंतिम दिन था। पाँचवीं कक्षा के गणित शिक्षक अपनी कक्षा के रजिस्टर पूरा करना चाहते थे। अतः कक्षा को व्यस्त रखने हेतु उन्होंने बच्चों से 1 से लेकर 100 तक गिनती लिखकर उन्हें जोड़ने को कहा। परंतु एक लड़के, गॉज (Gauss), ने तुरंत उत्तर 5050 बता दिया। शिक्षक ने स्वयं उत्तर नहीं निकाला था। उन्होंने पूछा, कैसे ? गॉज ने समझाया कि उसने प्रथम तथा अंतिम अंक जोड़कर 1+100=101 प्राप्त किया। इसी प्रकार दूसरा और पीछे से दूसरे अंक 2+99=101 हुआ। इसी क्रमानुसार 3+98=101, 4+97=101,...50+51=101 ही प्राप्त किए। अतः पचास 101 हुए। उनका योग हुआ 50×101=5050


कितने बाराती किस क्रम में ?



गरमी का मौसम और आखिरी साया (विवाह होने का आखिरी दिन)। राम की बारात जिस गाँव में गई वहाँ बारात एक चार मंजिले में ठहरी। गरमी से राहत पाने के लिए कुछ बाराती पहली मंजिल पर रुके तथा शेष दूसरी, तीसरी तथा चौथी मंजिल पर। चौथी मंजिल पर इतने बाराती पहुँच गए कि वहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं रही।
इस स्थिति में पहली, दूसरी तथा तीसरी मंजिल के बारातियों ने कहा कि जितने-जितने हम हैं, उतने-उतने हमारे कमरे में आ जाओ। यह सुनकर चौथी मंजिल के बाराती पहली, दूसरी तथा तीसरी मंजिल के कमरों में चले गए। ऐसा करने पर तीसरी मंजिल पर अधिक बाराती हो गए।

अब पहली, दूसरी तथा चौथी मंजिल के बारातियों ने कहा कि जितने-जितने हम हैं, उतने-उतने हमारे कमरों में आ जाओ। ऐसा करने पर दूसरी मंजिल पर अधिक बाराती हो गए।
इस स्थिति में पहली, तीसरी तथा चौथी मंजिलवालों ने अपनी संख्या के बराबर अन्य बारातियों को आने का निमंत्रण दिया। तब उनकी बात मानने से पहली मंजिल पर बहुत अधिक बाराती हो गए।
अब दूसरी, तीसरी तथा चौथी मंजिल के बारातियों ने यही बात दोहराई तो सभी मंजिलों पर बराबर-बराबर बाराती हो गए।

बताओ कुल कितने बाराती थे तथा प्रारंभ में पहली, दूसरी, तीसरी तथा चौथी मंजिल पर कितने-कितने बाराती थे ?
उत्तर-कुल 64 बाराती थे तथा प्रारंभ में पहली मंजिल पर 5, दूसरी मंजिल पर 9, तीसरी पर 17 तथा चौथी पर 33 बाराती थे।

विस्तृत फैलाव

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                    पहली                    दूसरी                 तीसरी                 चौथी
                    मंजिल                 मंजिल                   मंजिल                 मंजिल
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प्रारंभ                  5                     9                       17                       33
पहली बार          10                   18                       34                        2
दूसरी बार          20                   36                         4                        4
तीसरी बार         40                    8                          8                        8
चौथी बार          16                  16                         16                       16
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सामान्यीकरण—(मंजिलों की संख्या +1)

प्रारंभ में पहली मंजिल पर मंजिलों की संख्या से 1 बाराती अधिक तथा अगली मंजिलों पर पिछली मंजिल के दूने से एक बाराती कम हो गाया।

व्याख्या—प्रस्तुत प्रश्न 4 मंजिल का है अतः पहली मंजिल पर बाराती=मंजिल संख्या+1
=4+1
=5 बाराती
दूसरी मंजिल पर बाराती= पहली मंजिल के बाराती×2-1
=5×2-1
=10-1=9
 इसी प्रकार अन्य मंजिल की गणना


उदाहरण-


(i)    यदि मकान 5 मंजिल का होता तो कुल कितने बाराती होते तथा प्रारंभ में प्रत्येक मंजिल पर कितने-कितने बाराती होते-
उत्तर—160 बाराती,
पहली मंजिल 6, दूसरी मंजिल 11, तीसरी मंजिल 21, चौथी मंजिल 41 तथा पाँचवीं मंजिल 81।
(ii) यदि 6 मंजिला भवन होता तो पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी, पाँचवीं तथा छठी मंजिल पर क्रमशः 7, 13, 25, 49, 97 तथा 193 बाराती होते तथा कुल बारातियों की संख्या 384।
                                

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