अहंकार के रूप - श्रीरामकिंकर जी महाराज Ahankar Ke Roop - Hindi book by - Sriramkinkar Ji Maharaj
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आचार्य श्रीराम किंकर जी >> अहंकार के रूप

अहंकार के रूप

श्रीरामकिंकर जी महाराज

प्रकाशक : रामायणम् ट्रस्ट प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :155
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 5517
आईएसबीएन :0000000

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जीव का सबसे बड़ा आन्तरिक शत्रु यदि कोई है तो वह है ‘अहं’। संसार में भी संघर्ष टकराहट का मुख्य हेतु है यह ‘‘मैं’’।

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