जिगर मुरादाबादी - निदा फाजली Jigar Muradabadi - Hindi book by - Nida Fazli
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जिगर मुरादाबादी

निदा फाजली

प्रकाशक : वाणी प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :99
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6652
आईएसबीएन :81-7055-558-2

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जिगर मुरादाबादी की शायरी....

Jigar Muradabadi - A Hindi Book by Nida Fazli

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


जिगर अपने युग में सबसे ज़्यादा मशहूर और लोकप्रिय रहे हैं। वह जिस मुशायरे में शरीक होते, उनके सामने किसी और का चिराग नहीं जलता, वह भारत, और पाकिस्तान दोनों जगह पूजे जाते थे। लेकिन इस शोहरत ने न उनके तौर तरीके बदले न उनके ख़ानदानी मूल्यों में कोई परिवर्तन किया। पाकिस्तान ने उन्हें दौलत की बड़ी-बड़ी लालचें देकर हिंदुस्तान छोड़ने को कहा, लेकिन उन्होंने शाह अब्दुलग़नी (जिनके वह मुरीद थे) और असग़र के मज़ारों के देश को त्यागने से इनकार कर दिया।

जिगर की शायरी की दुनिया, और इसके ज़मीन-आसमान उनके अपने थे। इसमें न गालिब की दार्शनिक सूझबूझ हैं, न नजीर जैसा इन्सानी फैलाव है। लेकिन इसके बावजूद वह ग़ज़ल की तारीख में अपने अंदाजेबयान की नग़मगी और हुस्नोइश्क़ के सांस्कृतिक रिश्ते की वजह से हमेशा याद किये जाते रहेंगे। वह दाग़ की तरह बाज़ारे हुस्न के सैलानी होते हुए भी, रिश्तों की बाजारियत से कोसों दूर हैं। उन्होंने अपनी विरासती तहजीब से ग़ज़ल के बाज़ारी किरदारों में सामाजिकता का जादू जगाया है। वस्लों-फ़िराक़ के परंपरागत बयानों को अपने अनुभवों की रोशनी से सजाया है। उनके अनुभवों ने शब्दों को लयात्मक बनाया है।



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