सफलता का आधार आपका व्यवहार - पार्किन्सन, रूस्तमजी Safalta Ka Adhar Apka Vyavhar - Hindi book by - Parkinson, Rustamji
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सफलता का आधार आपका व्यवहार

पार्किन्सन, रूस्तमजी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :120
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 674
आईएसबीएन :81-7028-605-0

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जीवन में सफलता प्राप्त करने का मुख्य आधार आपका व्यवहार है...

Safalta Ka Aadhar Aapka Vyavhar

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

आज की दुनिया में किसी भी व्यवसाय या कैरियर में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल अपनी प्रतिभा ही काफी नहीं, बल्कि ऐसी का़बलियत की जरूरत है कि आप और लोगों के साथ मिलकर कैसे एक टीम की तरह काम करके सर्वोत्तम नजीते प्राप्त कर सकते हैं। रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों से ही आपके साथी या आपके अधीन काम करने वाले सफलता की सीढ़ी पर चढ़ सकते हैं। कैसे आप अपने व्यवहार से सफलता की नई ऊँचाइयाँ छू सकते हैं, इसी महत्त्वपूर्ण विषय पर यह पुस्तक केन्द्रित है।

अध्याय 1
आपसी तालमेल बहुत ज़रूरी है


हर जगह है लोगों की अहमियत


चाहें आप जुहू या होनोलूलू के समुद्र तट पर मौज-मस्ती कर रहे हों, या मुम्बई या न्यूयॉर्क जैसे किसी महानगर से अपनी कंपनी चला रहे हों, आप लोगों से ज़्यादा देर के लिए दूर नहीं रह सकते। उन्हें नज़अन्दाज़ नहीं कर सकते। बिना लोगों के कोई काम-कारोबार आगे नहीं बढ़ता, उद्योग-धंधे नहीं चलते। टेक्नालॉजी का दम भरने वालों को भी आखिरकार यही मानना पड़ता है कि हर व्यापक-कारोबार लोगों की बदौलत ही चलता है और इससे उन्हीं को फायदा पहुंचता है।

दस हज़ार लोग हों या दो

.....अगर हमें अपने दफ्तर या फैक्टरी को ठीक से चलाना है, यह तो सीखना ही पड़ेगा कि लोगों के साथ तालमेल बैठा कर किस तरह काम किया जाए।

लोगों को संभालना....


.......एक ऐसा खूबी है जो हर मैनेजर में होने ही चाहिए। किसी भी दूसरे गुण के मुकाबले इसकी कहीं ज़्यादा अहमियत है।
ज़्यादातर बॉस जानते हैं कि जो लोग कर्मचारियों से ठीक से काम ले सकते हैं, उन्हें ही बढ़ावा देने में कंपनी की भलाई है। इसलिए उन्हीं की तरक्की होती है। और, लोगों से काम वही ठीक से ले पाता है जो हर किसी के साथ पूरी ईमानदारी और हमदर्दी बरतते हुए उनकी अगुआई करने की बात पर अमल करता है।

क्रूसो के साथी


अंग्रेज़ी लेखक आर.एल. स्टीवेंसन के उपन्यास में रॉबिन्सन क्रूसो का ज़हाज़ डूबने के बाद जिस वीरान टापू पर ठिकाना मिला, वहां भी उसे एक आदमी मिल ही गया जिसे ‘मैन फ्राइड’ कहा गया। बेचारे क्रूसों को उसी के साथ काफ़ी दिन गुज़ारने पड़े। आज भी हालात वही हैं। जहां जाएंगे, लोगों को पाएंगे। उन्हें समझ लिया तो जानिए कि आगे का सारा कामकाज सही सलामत चलता रहेगा।

खूब होशियार हैं वो.....


मामूली कर्मचारी भी अपने मतलब की बात खूब समझते हैं। वो कामकाज में सुस्त भले हों, लेकिन अपने हितों की बात आने पर यह आसानी से भांप लेते हैं कि आप उनके कितने हितैषी हैं। चालाकी से काम लेने की कोशिश आसानी से पकड़ में आ जाती है। इसमें दिक्कतें बढ़ती हैं। यानी लोगों से काम लेना है तो पूरी ईमानदारी से उन्हें विश्वास में लेना होगा।

‘.....अच्छा हुआ तुम आ गये !’


....बस इतना कह दीजिए और फिर फ़र्क देखिए। अपने मियां रोशन लाल पंद्रह दिन की छुट्टी के बाद दफ़्तर लौटे तो उनके साहब ने मुस्कराते हुए यही बात उनसे कह दी। वो मन ही मन खुश हो गये। बॉस का काम बन गया। उन्हें यह एहसास कराकर कि संस्थान में उनकी भी कोई अहमियत है, समझिए बॉस ने किला फ़तह कर लिया। ऐसी बातें छोटी तो लगती हैं लेकिन अपने मातहत काम करने वालों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

वैसे भी उनके बिना कैसे चलता काम.......


बॉस के मुंह से अपने लिए अच्छी बातें सुनकर कोई भी बल्लियों उछल सकता है। तमाम लोगों की उस पर नज़र है। लेकिन उस पर बॉस की बात का असर है। यह असर काम में भी झलक आता है। हर जगह ऐसा ही होना चाहिए। आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों, अपने हर आदमी को ये अहसास कराने के लिए वक्त निकाल ही लीजिए कि उसकी भी कोई अहमियत है। उसके लिए आपकी, और उसके काम की अहमियत खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी।

बुनियादी सच्चाई यही है


इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि कोई क्या काम करता है। सफाई कर्मचारी से लेकर बड़े साहब तक सभी का काम महत्त्वपूर्ण है। अगर सफाई नहीं होगी तो क्या होगा ? हर तरफ कूड़ा-कर्कट नज़र आएगा। और बदबू की वजह से क्या कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा ? इसीलिए किसी को नज़रअंदाज न करें। बल्कि हर किसी को एहसास कराएं कि उसके काम की अहमियत भी कम नहीं है। आखिर अपना अहम हर किसी को सबसे प्यारा है।



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