चेतना की चिनगारियां - जगदीश श्रीवास्तव Chetna Ki Chingarian - Hindi book by - Jagdish Srivastava
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चेतना की चिनगारियां

जगदीश श्रीवास्तव

प्रकाशक : आत्माराम एण्ड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2008
पृष्ठ :217
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 6905
आईएसबीएन :978-81-7043-743

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धर्मों से परे आध्यात्मिक कविताएं

Chetna Ki Chingarian - A Hindi Book - by Jagdish Shivastava

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

सब धर्मों और सब देशों के आध्यात्मिक साधकों को समर्पित

आज फिर हृदय में जाग उठी बांसुरी
नेह के, प्रणय के, गीत गावे बांसुरी

aaj phir hRude meM jaag uThee baaMsuree
neh ke, praNaya ke, geet gaave baaNsuree

Today, again, the Flute awakened in my heart
Of love, and of affection, the Flute sang songs.

शब्द में, मौन में, तारों में, दिशाओं में,
जागरण में, स्वप्न में, स्पन्दन करे बांसुरी

shabd meM, maun meM, taaroM meM, dishaaoM meM,
jaagaraN meM, swapn meM, spandana kare baaNsuree.

In sound, in silence, in the stars, in (various) directions,
In the awakened state, in the state of dreaming, the Flute vibrated.

पाठकों के विचार

(1)

श्री दामोदर शास्त्री जी, फ्रीमोन्ट मन्दिर, कैलीफ़ोर्निआ, यू एस ए
आदरणीय श्री जगदीश श्रीवास्तव की कविताएं मैं ने पढ़ीं, बड़ी ही गहराई है कविताओं में, और यह भी कहूंगा-प्रत्येक कविता केवल पढ़ने योग्य ही नहीं बल्कि मनन करने योग्य है. कविताओं में कहीं वेदान्त है, कहीं भक्ति है कही ज्ञान है कहीं गीता है कहीं उपनिषद् है...

Shri Damodar Shastriji, Fremont Temple, California, USA :
‘I have read the poems of esteemed Shri Jagdish Srivastava. The Poems really have a great deal of depth. And, I will also say this : Each poem is worthy not only of being read, but also of being reflected upon, In the poems, at various places, one will find the Vedantic philosophy, devotion, spiritual knowledge, the message of the gita, the message of the Upanishads…’

(2)

डॉ. भक्ति माधव पुरी, फिलाडेल्फिआ, यू एस ए
डॉ. श्रीवास्तव जी बहुत समय से श्री प्रभुपाद और भक्त जनों के संसर्ग में, एक अच्छे, विश्वस्नीय, मित्र और शुभचिन्तक, होकर रहे हैं.
हुत अवसरों पर, जिस थोड़े समय से मैं उन्हें जानता हूं उसके पूर्व और उसके दौरान में भी, उन्होंने अपनी बुद्धि और अपना ज्ञान परमात्मा और उनके भक्तों की सेवा में प्रयोग किया है. ईश्वर के हमें दिये हुए उपहारों का यह अति उत्तम प्रयोग है, जैसे कि प्रभुपाद जी ने अपनी श्रीमद् भागवतम की व्याख्या में समझाया है :
‘‘एक अच्छे वैज्ञानिक को प्रयत्न करना चाहिए क वह परमेश्वर के अस्तित्व को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित करे...प्रभु की सेवा में पाया हुआ ज्ञान और इस प्रकार के और दूसरे कार्य यह सब वास्तव में हरि कथा अथवा कीर्तिमान ही हैं।’’
और अब हम यह देख रहे हैं कि उनका यह कार्य इस कविता संग्रह में सम्पन्न हुआ है, जिस में वे सावधानी से छांटे हुए शब्दों की कविताओं के माध्यम से श्री कृष्ण का गुणगान करते हैं....

Dr. Bhakti Madhava Puri, Philadelphia, USA
Dr. Srivastava ji has for long been associated with Srila Prabhupada and the devotees as a good and faithful friend and well wisher. On numerus occasion, before and during the short time I’ve Known him, he has Utilized his intelligence and knowledge is the service of the supreme Lord and His devotees. This is the perfect use of our God-given gifts as Prabhupada explains in his commentary on the Srimad Bhagvatm (1.5.22):
‘‘…A great scientist should endeavor to prove the existence of the lord on a scientific basis. Scientific knowledge engaged in the service of the lord and all similar acitivies are all factually hari-katha, or glorification of the lord.’’
And now we see the fruit of his work in this present collection of decotional poems where he wonderfully glorifies Lord Krishna in choice poetry.


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