आइसक्रीम मेकर - सुबीर चौधरी Icecream Maker - Hindi book by - Subir Chaudhari
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आइसक्रीम मेकर

सुबीर चौधरी

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्रकाशित वर्ष : 2007
पृष्ठ :104
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7220
आईएसबीएन :978-81-8322-059

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आधुनिक मैनेजमेंट सिद्धांतों और व्यावहारिकता के ज्ञान का बेहतरीन निचोड़...

Icecream Maker - A Hindi Book - by Subir Chaudhari

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

मई महीने के एक सोमवार की दोपहर को मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
मैं डेरी क्रीम नामक आइसक्रीम कंपनी में प्लांट मैनेजर था। हमारे ही शहर में नैचरल फ़ूड्स नामक विशाल राष्ट्रीय फ़ूड चेन का स्टोर था, जो लगभग दस साल पहले शुरू हुआ था। उस दिन हमारी कंपनी के एक सेल्समैंन रेगी को उस स्टोर में जाकर यह प्रस्ताव रखना था कि वे हमारी आइसक्रीम अपने यहाँ रखकर बेचें। रेगी मेरी उम्मीद से एक घंटे पहले ही ऑफ़िस लौट आया। मुझे लगा शायद वह अभी स्टोर में मिलने नहीं गया होगा। लेकिन तभी उसने अपना सिर हिलाया, हारने के अंदाज में अँगूठा नीचे किया और कंधे उचकाए, जिससे मैं समझ गया कि क्या हुआ था। वह एक बार फिर नैचरल फ़ूड्स स्टोर को हमारी आइसक्रीम बेचने के लिए राज़ी नहीं कर पाया था। उसने उदासीनता और नास्तिक जितनी आस्था से कहा, ‘‘कोई बात नहीं, पीटर ! अगली बार हम ज़रूर कामयाब होंगे।’’

मैं जानता था कि इस असफलता पर वह ज़रा भी शर्मिंदा नहीं था। दरअसल किसी को यह उम्मीद भी नहीं थी कि वह वहाँ माल बेच पाएगा। हम कई सालों से यह कोशिश कर रहे थे, लेकिन कभी कामयाब नहीं हुए थे। सच कहा जाए तो रेगी अब चैन की साँस ले रहा था। मैं उसे हर साल एक बार वहाँ भेजता था और इस साल उसका यह काम निबट गया था। उसे तसल्ली थी कि अब उसे एक साल तक यह काम नहीं करना पड़ेगा और उसका एक सिर दर्द तो कम हुआ।
दिक्क़त सिर्फ़ इतनी थी कि इस साल मेरी दिली इच्छा थी कि वह वहाँ पर हमारी आइसक्रीम बेचने में कामयाब हो जाए। हम लोगों ने प्राकृतिक पदार्थों का प्रयोग करके नए स्वाद की तीन आइसक्रीमें बाज़ार में उतारी थीं, इसलिए मुझे उम्मीद थी कि किला फ़तह हो जाएगा। हमारी कंपनी इसी बात के लिए मशहूर थी। हम बाज़ार में नए-नए स्वाद की आइसक्रीमें उतारते थे, जिससे न सिर्फ़ स्थानीय स्तर पर हमारा नाम होता था, बल्कि हमारी बिक्री भी बढ़ती थी। इसके अलावा, बाक़ी आइसक्रीम कंपनियाँ राष्ट्रीय स्तर पर हमारी नक़ल भी करती थीं। लेकिन नैचरल फ़ूड्स में ‘‘नए स्वाद’’ की रणनीति सफल नहीं हो पाई थी।

मुझे जिस बात की सबसे ज़्यादा चिंता थी, वह मैं रेगी या किसी और को नहीं बता सकता था। कंपनी के मालिक और संस्थापक मैल्कम जोन्स ने कुछ समय पहले ही मुझे बुलाकर कहा था कि बिक्री कम होने और प्रॉफ़िट मार्जिन घटने के कारण वे काफ़ी निराश हैं। मैल्कम ने मुझे चेतावनी दी थी कि अगर स्थिति जल्दी ही नहीं सुधरी, तो वे कोई गंभीर क़दम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि या तो वे किसी नए मैनेजर को नियुक्त करेंगे, या फिर किसी राष्ट्रीय स्तर की आइसक्रीम कंपनी को यह फ़ैक्ट्री बेच देंगे या कंपनी बंद करके किसी रियल एस्टेट डेवलपर को ज़मीन बेच देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘पीटर, मुझे इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि तुम हालात सुधारने के लिए क्या करते हो। लेकिन यह काम तुम्हें जल्दी ही करना होगा। अब सारी ज़िम्मेदारी तुम्हारे कंधो पर है।’’ मैं जानता था कि हमारे शहर के राजमार्ग के पास उपनगर तेज़ी से फैल रहा था और इस बारे में ज़रा भी शक नहीं था कि मैल्कम को फ़ैक्ट्री चलाने के बजाय ज़मीन बेचने में ज़्यादा फ़ायदा होगा। बहरहाल, चाहे वे कोई भी क़दम उठाएँ, मेरी नौकरी तो चली जाएगी। मेरे परिवार में पत्नी के अलावा 8 और 10 साल के दो बच्चे थे, इसलिए मैल्कम की धमकी से मेरी आरामदेह ज़िंदगी में ख़तरे की घंटी बज गई।

हालाँकि मैं इसी शहर में पला-बढ़ा था, लेकिन मेरा कैरियर यहाँ शुरू नहीं हुआ था। डेरी क्रीम में आने से पहले मैंने दस साल तक डेनवर की एक फ़ूड निर्माता कंपनी में काम किया था। दो साल पहले ही मैं डेरी क्रीम में आया था। यहाँ आने के बाद ही मुझे ऐसा लगा था कि मेरा परिवार अच्छे से जम चुका था। मेरी पत्नी जीन एक बैंक में नौकरी करने लगी थी। हमारे बेटे और बेटी के इस इलाक़े में काफ़ी दोस्त बन गए थे। लेकिन अगर मेरी नौकरी छूट गई, तो सिर्फ़ जीन की तनख़्वाह में मकान की क़िस्त नहीं चुकाई जा सकती थी और घर ख़र्च नहीं चलाया जा सकता था।

और अगर डेरी क्रीम बंद हो गई, तो मैं क्या करूँगा ? हालाँकि मैं अपने काम में काफ़ी मेहनत करता था, लेकिन मुझे बहुत स्मार्ट नहीं कहा जा सकता था। मैनेजर के रूप में मैंने कंपनी का उत्पादन बढ़ाने और निर्माण प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए कई क़दम उठाए थे तथा कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के कुछ कार्यक्रम भी चलाए थे।
बहरहाल, मेरे किसी क़दम या कार्यक्रम से कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा था। हमारी आइसक्रीम उच्च वर्ग के उपभोक्ताओं को आकर्षित नहीं कर पा रही थी। साथ ही, यह सस्ती आइस्क्रीमों से भी टक्कर नहीं ले पा रही थी। हम अधबीच में थे और दोनों पाटों के बीच पिस रहे थे।

मै नौकरी में पहले कभी असफल नहीं हुआ था, लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि स्थिति को बेहतर बनाने के लिए क्या करू। मैं बुरी तरह चिंतित था। इस बदक़िस्मती से बचने के लिए मैं क्या कर सकता हूँ ? अगर मैल्कम कंपनी या ज़मीन बेच देंगे, तो मेरे अधीनस्थ कर्मचारियों का क्या होगा ?

उस सुबह मुझे उम्मीद थी कि अगर नैचरल फ़ूड्स हमारी आइसक्रीम रखने के लिए तैयार हो जाएगा, तो हम बच जाएँगे। मैं जानता था कि अगर उनकी चेन की सिर्फ़ एक शाखा ही हमारी आइसक्रीम ख़रीद ले, तो हमारे आँकड़े काफ़ी सुधर जाएँगे। उनके यहाँ सामान इतनी जल्दी बिकता था कि वे अपने साथ-साथ हमारी स्थिति भी सुधार देंगे। ज़ाहिर है, इसके बाद हमें उनकी कंपनी की सभी शाखाओं को आइसक्रीम बेचने का मौक़ा मिल जाएगा, जिससे हमारा छुटपुट मुनाफ़ा रातोरात कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा नैचरल फ़ूड्स के बारे में यह मशहूर था कि वहाँ सिर्फ़ बेहतरीन सामान मिलता है और ग्राहकों की श्रेष्ठतम सेवा की जाती है, इसलिए अगर वहाँ हमारा माल बिकेगा, तो बाकी दुकानदार भी हमारी आइसक्रीम में रुचि लेंगे। जब आहार-व्यवसाय का सबसे सख़्त न्यायाधीश हमें उत्कृष्टता का प्रमाणपत्र दे देगा, तो इस व्यवसाय के बाक़ी लोग भी हमसे आइसक्रीम ख़रीदने लगेंगे।

इसलिए जब रेगी ने लौटकर मुझे बताया कि एक बार फिर नैचरल फ़ूड्स ने हमारी आइसक्रीम बेचने से इंकार कर दिया है, तो मेरी उम्मीदों पर ठंडा पानी फिर गया। रेगी ने बताया कि नैचरल फ़ूड्स के ख़रीदार ने सिर्फ़ दस मिनट की बातचीत के बाद ही उसे मना कर दिया। रेगी का पहला वाक्य पूरा होने से पहले ही ख़रीदार उससे ऐसे सवाल पूछने लगा, जिनका जवाब उसके पास नहीं था।
‘‘जैसे ?’’

‘‘जैसे हमारी आइसक्रीम का घनत्व, आइस्क्रीम के भार और मात्रा में ‘मिश्रित पदार्थों’ का प्रतिशत, हमारी पैकेजिंग की सफलता की दर...’’
‘‘हमारी पैकेजिंग की सफलता की दर ?’’
‘‘वही तो,’’ रेगी ने कहा। ‘‘मैंने ऐसे बेतुके सवाल पहले कभी नहीं सुने।’’
मैं अवाक् था। इस तरह के बेतुके और बेसिरपैर के सवालों के आधार पर नैचरल फ़ूड्स हमारी आइसक्रीम रखने या न रखने का फ़ैसला कैसे कर सकता है ?

बहरहाल, जल्दी ही मेरे मन में निराशा की जगह संकल्प का भाव आ गया। मैं इस सौदे को हाथ से नहीं जाने दे सकता था। बरसों पहले मैं उस स्टोर के एक अधिकारी को जानता था। मैंने फ़ैसला किया मैं ख़ुद वहाँ जाकर अपनी आइसक्रीम बेचने की कोशिश करूँगा। हालाँकि उस समय मुझे अपनी कंपनी के क्वालिटी डायरेक्टर से मिलना था, लेकिन मैंने बिना सोचे-समझे ताव में अपना सुरक्षा चश्मा और लैब कोट उतारा तथा अपना जैकेट पहनकर कार की चाबियाँ उठा लीं। मैं सेल्समैन नहीं था और मुझे सामान बेचने का ज़रा भी अनुभव नहीं था, लेकिन मैं जानता था कि यह बिक्री कितनी महत्वपूर्ण है। मुझे यह काम करना ही था। मैं धड़धड़ाते हुए अपनी कार में बैठा। इस एस.यू.वी. कार को मैंने दो महीने पहले ही बच्चों को घुमाने-फिराने के लिए ख़रीदा था। इसकी क़िस्तें चुकाने के बारे में सोचते हुए मैं दुखी मन से नैचरल फ़ूड्स की तरफ़ चल दिया।

मैं कभी नैचरल फ़ूड्स से सामान नहीं ख़रीदता था, क्योंकि वे हमारी आइसक्रीम नहीं रखते थे। इसके बावजूद मुझे उनका स्टोर खोजने में कोई दिक्क़त नहीं हुई। उनके स्टोर की बड़ी इमारत एक बड़े चौराहे के पास थी। यह मूल रूप से एक सुपरबाज़ार था, लेकिन यह बिगी-मार्ट जैसा नहीं था, जहाँ मैं अक्सर जाता था। स्टोर के सामने ईंट के फ़्रेम में काँच की बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ लगी थीं, जिससे यह सुपरबाज़ार कम, बुकस्टोर ज़्यादा लगता था। पार्किंग से अंदर लगे तीस फ़ुट ऊँचे खंभे दिख रहे थे। अधिकांश स्टोर्स की छत काली या सफ़ेद होती है, लेकिन यहाँ पूरी छत पर हल्के भूरे रंग का पेंट था। हर कैश रजिस्टर के ऊपर आकर्षक बैनर लगे थे। आप प्रॉडक्ट्स की परवाह करें या न करें, स्टोर की डिज़ाइन आपको आकर्षित करके अंदर खींचती थी।

मैं उस स्टोर से चिढ़ता था, लेकिन इसके बावजूद मैं यह सोचे बिना नहीं रह सका कि नैचरल फ़ूड्स ग्राहकों का स्वागत करने के लिए कितना कुछ कर रहा था। मेरे विरोध के बावजूद मेरी पत्नी वहीं से ख़रीदारी करती थी और अक्सर कहती थी कि उसने इससे अच्छा स्टोर कहीं नहीं देखा। इस तरह वह मुझे इशारे से बताती थी कि वहाँ न जाने की मेरी ज़िद मूर्खतापूर्ण है। स्टोर के सामने पहुँचते ही मैं उसकी बात का मतलब समझ गया।

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