मेरा चीज़ किसने हटाया ? - स्पेंसर जॉनसन Mera Cheese Kisne Hataya - Hindi book by - Spencer Johnson
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मेरा चीज़ किसने हटाया ?

स्पेंसर जॉनसन

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :92
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 7225
आईएसबीएन :81-86775-17-x

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Who moved my cheese का हिन्दी रूपान्तरण...

Mera Cheese Kisne Hataya - A Hindi Book - by Spencer Johnson

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

मेरा चीज़ किसने हटाया ? एक सरल नीतिकथा है जो परिवर्तन के बारे में गहरी सच्चाइयों को उजागर करती है। यह उन चार पात्रों की मज़ेदार और ज्ञानवर्द्धक कहानी है, जो भूलभुलैया में रहते हैं और चीज़ की खोज करते हैं ताकि वे स्वस्थ और सुखी रह सकें।
उन पात्रों में स्निफ और स्करी नाम के दो चूहे हैं। और दो ‘छोटे लोग’ हैं–जो चूहे के आकार के जीव हैं परंतु वे इन्सानों की तरह दिखते और व्यवहार करते हैं। उनके नाम हेम और हॉ हैं।
चीज़ एक प्रतीक है–उस वस्तु का जो आप अपने जीवन में पाना चाहते हैं, चाहे वह एक अच्छी नौकरी या प्रेमपूर्ण संबंध हो, धन या अचल संपत्ति हो, स्वास्थ्य या मन की आध्यात्मिक शांति हो।

और भूलभुलैया वह स्थान है जहाँ आप अपनी मनचाही वस्तु की खोज करते हैं–वह ऑफिस जहाँ आप काम करते हैं, या वह परिवार या वह समाज जिसमें आप रहते हैं।
कहानी के पात्र अप्रत्याशित परिवर्तन का सामना करते हैं। आखिरकार उनमें से एक सफल हो जाता है और वह भूलभुलैया की दीवारों पर लिखता है कि उसने अपने अनुभव से क्या सीखा है। जब आप ‘दीवार पर लिखी इबारत’ पढ़ेगे तो आप खुद जान जायेंगे कि किस तरह परिवर्तन का सामना किया जाये ताकि आपकी नौकरी और ज़िंदगी में आप कम से कम तनावग्रस्त होकर ज़्यादा से ज़्यादा सफल हो सकें।
इस शाश्वत कहानी को पढ़ने में एक घंटे भी कम समय लगता है, पर इसकी अदभुत शिक्षा का असर आप पर ज़िंदगी भर रह सकता है।

कहानी के पीछे की कहानी


केनेथ ब्लेंचार्ड, पी.एच.डी. द्वारा

मेरा ‘चीज़’ किसने हटाया ? की ‘कहानी के पीछे की कहानी’ बताने में मैं रोमांच का अनुभव कर रहा हूँ। इसलिये क्योंकि यह पुस्तक अब लिखी जा चुकी है और यह हम सबके पढ़ने खुश होने और एक दूसरे के साथ बाँटने के लिये तैयार है।
इसका इंतजार मैं तब से कर रहा था जब मैंने पहली बार स्पेंसर जॉनसन के मुँह में ची़ज़ की क्रांतिकारी कहानी सुनी थी। यह बरसों पहले की बात है। जब हमने इकट्ठे ‘द वन मिनट मैनेजर’ लिखी थी, उससे भी पहले की।
मुझे याद है उसी वक्त मेरे दिल में यह खयाल आया था कि यह कहानी कितनी बढ़िया है और आगे चल कर यह मेरे कितने काम आयेगी।
‘‘मेरा ‘चीज़’ किसने हटाया ?’’ परिवर्तन की कहानी है। यह परिवर्तन एक भूलभुलैया में घटित होता है जहाँ चार मज़ेदार पात्र चीज़ की खोज कर रहे हैं। चीज़ उस वस्तु का प्रतीक है जिसे हम जीवन में हासिल करना चाहते हैं : चाहे वह नौकरी हो, प्यार हो, दौलत, बड़ा घर, आज़ादी, स्वास्थ्य, मान-सम्मान, आध्यात्मिक शांति या जॉगिंग या गोल्फ की तरह की कोई दूसरी वस्तु हो।

हमारा चीज़ क्या है इस बारे में हममें से हर एक का अपना विचार होता है। हम चीज़ का पीछा इसलिये करते हैं क्योंकि हमें यह भरोसा होता है कि इसे हासिल करने के बाद हम सुखी हो जायेगें। अगर हम चीज़ को हासिल कर लेते हैं तो हमें इसकी आदत पड़ जाती है। इसीलिये जब हम इसे खो देते हैं या यह हमसे दूर हो जाता है तो हमें बहुत दुख होता है।
कहानी में भूलभुलैया उस जगह का प्रतीक है जहाँ आप अपनी मनचाही वस्तु की तलाश करते हैं। यह वह ऑफिस हो सकता है जिसमें आप काम करते हैं, वह समाज जिसमें आप रहते हैं या वह संबंध जो आपने बनाये हैं।
मैं आपको बता दूँ कि जो ‘चीज–-कथा आप पढ़ने जा रहे हैं, सारी दुनिया से अपने भाषणों में मैं इसका ज़िक्र करता रहता हूँ और बाद में अक्सर लोग मुझे यह बताते हैं कि इससे उनकी ज़िदगी में कितना बड़ा बदलाव आया।

आप मानें या न मानें, इस छोटी सी कहानी ने कई नौकरियाँ, शादियां और ज़िंदगियां बचायी हैं।
असली ज़िन्दगी के कई उदाहरणों में से एक चार्ली जोन्स का है, जो एन बी सी–टी वी के माने हुए ब्रॉडकास्टर हैं। उसका कहना है कि ‘‘मेरा ‘चीज़’ किसने हटाया ?’’ की कहानी सुनने से उसका कैरियर बच गया। एक ब्रॉडकास्टर का काम ज़रा अलग है फिर भी जो सिद्धांत उसने सीखे हैं उन्हें दूसरे लोग भी आज़मा सकते हैं।
हुआ यह कि चार्ली ने पहले के ओलंपिक खेलों में ट्रैक एंड फील्ड खेलों के प्रसारण में बहुत मेहनत की थी और उसका कवरेज सफल माना गया था। इसलिये जब उसके बॉस ने उसे बताया कि उसे अगले ओलंपिक के लिये इन खेलों से हटाकर तैराकी और गोताखोरी का कवरेज दिया गया है तो वह आश्चर्यचकित और विचलित हो गया।

वह इन खेलों के बारे में अच्छी तरह नहीं जानता था, इसलिये वह मायूस हो गया। उसे लगा कि उसकी कोई कद्र नहीं है और यह सोचकर वह गुस्सा हो गया। उसे लगा कि यह अन्याय है। उसके गुस्से ने उसके हर काम को बिगाड़ना शुरू कर दिया।
फिर उसने ‘‘मेरा ‘चीज़’ किसने हटाया ?’’ की कहानी सुनी।
इसके बाद वह खुद पर हँसा और उसने अपना सोच बदल डाला। उसे महसूस हुआ कि उसके बॉस ने तो बस ‘‘उसका चीज़ हटा दिया था।’’ इसलिये उसने खुद को परिस्थिति के हिसाब से ढाल लिया। उसने इन दोनों नये खेलों को सीखा और इस दौरान उसने यह पाया कि नया काम सीखने से वह ज़्यादा जवान महसूस कर रहा है।

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