महानायक अमिताभ - महेश शर्मा Mahanayak Amitabh - Hindi book by - Mahesh Sharma
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महानायक अमिताभ

महेश शर्मा

प्रकाशक : प्रतिभा प्रतिष्ठान प्रकाशित वर्ष : 2008
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 7355
आईएसबीएन :81-88266-67-1

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महानायक अमिताभ का जीवन-चरित

Mahanayak Amitabh - A Hindi Book - by Mahesh Sharma

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

यह उस ‘शहंशाह’, ‘दि ग्रेट गेंबलर’, ‘खुद्दार’, ‘देशप्रेमी’, की ‘महान’ जीवनगाथा है, जो ‘कभी-कभी’ ‘मजबूर’ ‘एकलव्य’ था। लेकिन ‘अग्निपथ’ पर ‘आज का अर्जुन’ बनकर वह ‘नमक हलाल’ ‘गंगा की सौगंध’ लेकिन ‘निःशब्द’ ‘आखिरी रास्ता’ पार करके ‘मुकद्दर का सिकंदर’ बन गया।

उसके ‘नसीब’ ने उसे ‘अजूबे’, ‘जादूगर’ को कभी ‘डॉन’ बनाकर ‘जंजीर’ में ‘गिरफ्तार’ किया; कभी ‘शराबी’ का ‘जुर्मानी’ लगाकर ‘अंधा कानून’ के ‘खाकी’ के हवाले कर दिया। लेकिन ‘कभी खुशी कभी गम’ की ‘दीवार’ उस ‘मर्द’ के ‘जमीर’ की ‘शान’ को ‘ब्लैक’ नहीं कर सकी।

उस ‘कालिया’ की कामयाबी का ‘सिलसिला’ ‘सात हिंदुस्तानी’, ‘राम-बलराम’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’, ‘बॉम्बे टु गोवा’ तक गाते हैं।
‘आनंद’ ‘खून-पसीना’ नहीं बहाता तो ‘अकेला’ ‘हेरा-फेरी’ करके ‘कुली’ से आगे नहीं बढ़ पाता। लेकिन ‘लावारिस’ ‘रेशमा और शेरा’ को ‘वक्त’ की ‘कसौटी’ पर कसकर ‘मंजिल’ तक ले गया और ‘हम’ बोले ‘गॉड तुसी ग्रेट हो’।
भारतीय सिनेजगत् के महानायक अमिताभ बच्चन की जीवनगाथा।

1. मैं हूँ अमिताभ


बिग ए, बिग बी, वन मैन इंडस्ट्री, मुन्ना, एबी बेबी, एंग्री यंग मैन, बॉलीवुड का शहंशाह, अमित, सोनू आदि उपनामों से चर्चित सदी के सबसे लोकप्रिय महानायक अमिताभ बच्चन !
अमिताभ बच्चन ही वे भारतीय नायक हैं, जिनकी मोम की प्रतिमा लंदन के मैडम ट्यूसेड म्यूजियम में सबसे पहले स्थापित की गई।
फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 19 जुलाई, 2006 को डी मोंटफोर्ड यूनिवर्सिटी, लिसेस्टर, यू. के. ने उन्हें डॉक्टर ऑफ आर्ट्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

अमिताभ : जीवन-वृत्त


• जन्म का नाम : अमिताभ हरिवंश श्रीवास्तव
• लोकप्रिय नाम : अमिताभ बच्चन
• जन्मतिथि : 11 अक्तूबर, 1942
• जन्म-स्थल : इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
• पिता : डॉ. हरिवंश राय बच्चन
• माता : सुश्री तेजी बच्चन
• कद : 6’3’’
• राशि : मेष
• शिक्षा : (i) स्कूली शिक्षा–नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से
(ii) बी.एस-सी. किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली से
• नौकरी : कलकत्ता की बर्ड एंड कंपनी में रु. 500 की पहली नौकरी
• भाई (अनुज) : अजिताभ बच्चन
• विवाह : 3 जून, 1973 को
• पत्नी : जया बच्चन
• संतति : पुत्र–अभिषेक, पुत्री–श्वेतांबरा (श्वेता)
• पहली फिल्म : सात हिंदुस्तानी (1969)
• पता : प्रतीक्षा, 10वाँ मार्ग, जे.वी.पी.डी. स्कीम, मुंबई–400049

अमिताभ : सार-संक्षेप


• अमिताभ निर्विवाद रूप से हिंदी फिल्मों के महानायक हैं।
• सन् 1996 में उन्होंने अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ए.बी.सी.एल.) नाम से एक फिल्म कंपनी स्थापित की लेकिन दुर्भाग्य से वह नहीं चली और उसे बंद कर देना पड़ा।

• नेहरू-गाँधी परिवार से उनके निकट संबंध। राजीव के आग्रह पर उन्होंने सन् 1985 का लोकसभा चुनाव इलाहाबाद से लड़ा, जिसमें वे हेमवतीनंदन बहुगुणा के विरुद्ध लगभग दो लाख वोटों के अंतर से जीते; लेकिन राजनीति उन्हें रास नहीं आई। बोफोर्स तोप दलाली में उनका नाम घसीटा गया। उन्हें भितरघात का भी सामना करना पड़ा। अंततोगत्वा उन्होंने बीच में ही संसद् सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

• सन् 1995 में मिस वर्ड ब्यूटी प्रतियोगिता में अमिताभ बच्चन निर्णायक बने थे।

• ‘कुली’ (1982) फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके पेट में चोट लगी और आँत फटने के कारण उन्हें जिंदगी और मौत से जूझना पड़ा। देश भर के लोगों ने उनके लिए दुआएँ माँगी और वे एक बार फिर नए उत्साह के साथ फिल्म-जगत् में लौट आए।

• फिल्मों में ब्रेक पाने के लिए जारी संघर्ष के दौर में अमिताभ बच्चन ने अपनी धीर-गंभीर आवाज का कई फिल्मों में व्यावसायिक इस्तेमाल किया।

• बॉलीवुड के सबसे अधिक पारिश्रमिक पानेवाले महानायक वे ही हैं।

• बी.बी.सी. के एक सर्वेक्षण में चार्ली चैपलिन, सर लॉरेंस ऑलिवर और मर्लिन ब्रांडो के साथ सदी के अभिनेता के रूप में नामित हुए।

• 20 वर्षों के महानायक को सन् 1990 के दशक के अंत समाप्त समझ लिया गया, जब वह राजनीति में असफल हो गया और उसकी व्यावसायिक महत्त्वाकांक्षाओं ने भी दम तोड़ दिया। लेकिन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (सन् 2000) ने अमिताभ को पुनर्स्थापित किया। इसी वर्ष ‘मोहब्बतें’ और सन् 2001 में प्रदर्शित ‘कभी खुशी कभी गम’ ने उन्हें पुनः महानायक के सिंहासन पर आसीन कर दिया।

• ‘मि. नटवरलाल’, ‘लावारिस’, ‘तूफान’ और ‘सिलसिला’ जैसी फिल्मों में उन्होंने कुछ गाने भी गाए, जो बहुत प्रसिद्ध हुए।
 
• सन् 1997 में अमिताभ नाना बने, जब उनकी पुत्री श्वेता ने नव्या को जन्म दिया।

• पोलियो कि विरुद्ध अभियान में केंद्र सरकार के साथ सहयोग।

• परदे पर ‘विजय’ उनका लोकप्रिय नाम रहा, जो 20 से भी अधिक फिल्मों में रहा। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन उनका नाम ‘इंकलाब’ रखना चाहते थे, जिसका अर्थ होता है क्रांति, लेकिन बाद में कविवर सुमित्रानंदन पंत के परामर्श पर उनका नाम अमिताभ (सूर्य) रखा गया। अपने 61वें जन्मदिन पर अमिताभ ने ए.बी.सी.एल. को ए.बी. कॉर्पोरेशन के नाम से पुनः आरंभ किया। कर्ज में डूबने के कारण ए.बी.सी.एल. को बंद करना पड़ा था, फिर भी अमिताभ बच्चन ने इसे नाम बदलकर पुनः आरंभ करने का जोखिम उठाया।

• अमिताभ की अधिकतर फिल्मों में निरुपाराय उनकी माँ बनीं। आखिर बार सन् 1999 में लाल बादशाह में उन्होंने यह भूमिका अदा की। 58 वर्ष की आयु में वे अपने सह-कलाकार मनोज वाजपेयी के साथ अक्स (सन् 2001) फिल्म के लिए 30 फीट की ऊँचाई से कूदे थे।

• सन् 1996 में उन्होंने एक पॉप एलबम ‘एबी बेबी’ किया। यह एलबम ए.बी.सी.एल. द्वारा जारी किया गया। ‘ईर बीर फत्ते’ जैसा गाना और उनकी आरंभिक फिल्में ‘ओ साथी रे’ व ‘कभी-कभी’ के गानों को रीमिक्स के रूप में प्रस्तुत किया गया था। ‘ईर बीर फत्ते’ के प्रेरणा उनकी फिल्म अदालत (1977) के एक प्रसिद्ध संवाद से हुई थी।

• अमिताभ एकमात्र ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने, सन् 1972 से 1986 तक लगातार पंद्रह वर्षों में औसतन एक हिट फिल्म अवश्य दी है।

• अमिताभ बच्चन ‘खब्बू’ (बाएँ हाथ से काम करनेवाले) हैं और फिल्मों में इसी हाथ से जौहर दिखाते हैं लेकिन दोनों हाथों से लिख सकते हैं।

• आरंभ में, ऑल इंडिया रेडियो ने उनकी आवाज को प्रसारण के अयोग्य करार दे दिया था।

• उन्होंने ‘ब्लैक’ (सन् 2005) फिल्म के लिए गूँगों की भाषा सीखी थी।

• सन् 2005 में उन्होंने अपने पूरे फिल्मी-जीवन की सबसे अधिक फिल्में कीं–पूरी ग्यारह !

• ‘शक्ति’ (1982) एकमात्र ऐसी फिल्म है, जिसमें उन्होंने दिलीप कुमार के साथ काम किया।

• ‘अमिताभ एकांतप्रिय हैं’, ऐसा उनकी पत्नी जया बच्चन का मानना है।

• एक समय था, जब अमिताभ बच्चन एक दिन में दो बोतल शराब और सौ सिगरेटें पी जाते थे। वे मांसाहार भी करते थे, लेकिन अब उन्होंने सबकुछ छोड़ दिया है और वे शुद्ध शाकाहारी हैं।

• स्कूल के दिनों में अमिताभ बच्चन इंजीनियर बनने के सपने देखते थे।

• संघर्ष के दिनों में अमिताभ बच्चन ने कुछ रातें मेरीन ड्राइव (मुंबई) में बेंच पर सोकर बिताई थीं।

• अमिताभ कहते हैं कि यदि ऐक्टर नहीं होते तो अपने गृह नगर इलाहाबाद में दूध बेचते।


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