लोकप्रिय बनने की कला - डॉन गैबर Lokpriya Banne Ki Kala - Hindi book by - Don Gabor
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लोकप्रिय बनने की कला

डॉन गैबर

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्रकाशित वर्ष : 2006
पृष्ठ :231
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7490
आईएसबीएन :9788183220507

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सहज और शक्तिशाली सिद्धांत जिनका अनुसरण कर आप किसी से भी कहीं भी अच्छी बातचीत करने के लिए तैयार हो जाएँगे...

Lokpriya Banne Ki Kala - A Hindi Book - by Don Gabor

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

क़रीब 20 सालों से वार्तालाप विशेषज्ञ डॉन गैबर ने अपनी बेस्टसेलर पुस्तक हाऊ टु स्टार्ट अ कन्वर्सेशन एंड मेक फ़्रेंड्स के ज़रिए बुद्धिमानी, आत्मविश्वास और उत्साह से बात करने में हज़ारों लोगों की मदद की है। इस नवीन संस्करण में बातचीत करने की कला की समूची जानकारी दी गई है।

इस पुस्तक में दिए गए सहज और शक्तिशाली सिद्धांतों का अनुसरण कर आप किसी से भी कहीं भी अच्छी बातचीत करने के लिए तैयार हो जाएँगे ! इस पुस्तक से आप यह भी सीखेंगे कि सही सवाल पूछकर, प्रभावी बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल कर और बातचीत के गतिरोध को दूर करके आप किस तरह चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं। बहुत से चार्ट्स, सैकड़ों शुरुआती पंक्तियों, वास्तविक जीवन की घटनाओं, अक्सर पूछे जाने वाले सवालों, मददगार संकेतों और सटीक प्रोफ़ेशनल सलाह से भरपूर यह पुस्तक आपको दिखाएगी कि किसी तरह :

• अपनी बातचीत की व्यक्तिगत शैली की पहचान की जाए
• दूसरे देशों और संस्कृतियों के लोगों से बात की जाए
• मोबाइल फ़ोन या चैटरूम में ऑनलाइन होने पर ग़लतियों से बचा जाए
• अपनी बोलने की व्यक्तिगत और व्यावसायिक योग्यता को अगले स्तर पर ले जाया जाए

1
पहला संपर्क
शारीरिक भाषा



समझा जाना आसान नहीं, बल्कि विलासिता है।

–राल्फ़ वाल्डो एमर्सन

संवाद संबंधी हमारी सबसे महत्वपूर्ण कुशलताओं में एक हमारे शब्दों से नहीं, बल्कि शरीर से प्रदर्शित होती है। शोध से यह साबित हुआ है कि आमने-सामने की आधे से अधिक चर्चा अशाब्दिक होती है। इस भाषा को ‘‘बॉडी लैंग्वेज’’ कहा जाता है। यह भाषा अक्सर हमारी भावनाओं और नज़रिये को हमारे बोलने से पहले ही बता देती है। बॉडी लैंग्वेज यह भी बताती है कि हम दूसरों के प्रति कितने मित्रतापूर्ण हैं।

अधिकांश अकुशल वक्ताओं को तो यह एहसास ही नहीं होता कि उनकी ग़ैर-दोस्ताना बॉडी लैंग्वेज (बँधे हुए हाथ, आँखों का कम संपर्क और मुस्कराहट का अभाव) की वजह से अक्सर उनकी बातचीत छोटी हो जाती है। हमारे द्वारा दिए जाने वाले शुरुआती संकेतों से ही लोग हमारा आकलन कर लेते हैं और यदि पहला प्रभाव मिलनसार तथा मित्रवत नहीं होता है, तो अच्छी चर्चा बनाए रखना मुश्किल होता है। यहाँ दी जा रही ‘‘लचीलेपन’’ की तकनीकें (‘‘Softening’’ techniques) आपके पहले प्रभाव को नकारात्मक बनाने के बजाय सकारात्मक बना सकती है।

लचीलापन S-O-F-T-E-N


‘‘लचीलापन’’ एक अशाब्दिक मुद्रा है, जिससे लोग आपके प्रति ज़्यादा दोस्ताना होंगे और आपकी बातों में ज़्यादा दिलचस्पी लेंगे। चूँकि आपकी बॉडी लैंग्वेज आपके बोलने से पहले बोलती है, इसलिए पहली नजर में दोस्ताना छवि बनाना महत्वपूर्ण होता है। जब आप खुली बॉडी लैंग्वेज का प्रयोग करते हैं, तो आप कुछ बोलने से पहले से ही यह संकेत भेज देते हैं : ‘‘मैं एक दोस्त हूँ और यदि आप चाहें, तो आपसे बातचीत करना चाहूँगा।’’ S-O-F-T-N-E-S शब्द का प्रत्येक अक्षर दूसरों को आपसे बात करने के लिए प्रोत्साहित करने की एक विशेष अशाब्दिक तकनीक प्रदर्शित करता है।

मुस्कराहट


मोहक मुस्कराहट दोस्ताना और खुले नज़रिये तथा संवाद की इच्छा का प्रबल संकेत होती है। यह एक दोस्ताना अशाब्दिक संकेत है, जो इस आशा के साथ भेजा जाता है कि जवाब में सामने वाला भी मुस्कराएगा। जब आप मुस्कराते हैं, तो आप यह प्रदर्शित करते हैं कि सामने वाले के प्रति आपका नज़रिया सकारात्मक है। दूसरा इसे अपनी तारीफ़ के रूप में लेता है और सामान्यतः उसे अच्छा लगता है। परिणाम ? आम तौर पर आपकी मुस्कान के जवाब में सामने वाला भी मुस्कराएगा।
मुस्कराहट का अर्थ यह नहीं है कि आपको बनावटी चेहरा बनाए रखना है या यह दिखावा करना है कि आप हर समय ख़ुश रहते हैं। लेकिन जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को देखें, जिसे आप जानते हैं या जिससे आप चर्चा करना चाहते हैं, तो ज़रूर मुस्कराएँ। मुस्कराकर आप प्रदर्शित करते हैं कि आप मिलनसार हैं और बातचीत करना चाहते हैं।

इंसान का चेहरा बहुत से शाब्दिक और अशाब्दिक संकेत प्रेषित करता है। यदि आप दोस्ताना संदेश भेजते हैं, तो आपको इसका जवाब भी दोस्ताना ही मिलेगा। जब आप गर्मजोशी मुस्कराहट के साथ दोस्ताना हलो कहेंगे, तो वैसी ही प्रतिक्रिया पाकर आपको आश्चर्यजनक ख़ुशी होगी। मुस्कराहट व्यक्ति को यह बताने का सबसे सरल और श्रेष्ठ तरीक़ा है कि आप उस पर ध्यान दे रहे हैं। यह दर्शाती है कि आप सामने वाले के महत्व को स्वीकार कर रहे हैं। इससे दूसरा व्यक्ति आपसे बातचीत करने के लिए और अधिक खुलता है।

खुली बाँहें


S-O-F-T-N-E-S शब्द में अक्षर O का अर्थ है खुली हुई बाँहें। शायद आपका स्वागत कभी ‘‘खुली बाँहों’’ से हुआ हो। इसका निश्चित ही यह मतलब था कि सामने वाला व्यक्ति आपसे मिलकर ख़ुश हुआ था। किसी समारोह या सामाजिक या व्यावसायिक अवसर पर खुली बाँहें संकेत देती हैं कि आप दोस्ताना हैं और दोस्ती के लिए तैयार हैं। चर्चा के दौरान खुली बाँहों से सामने वाला व्यक्ति यह महसूस करता है कि आप मिलनसार हैं और उसकी बात सुन रहे हैं।

दूसरी तरफ़, हाथ बाँध कर खड़े होने या बैठने से आप संकुचित, रक्षात्मक और संकीर्ण मानसिकता प्रदर्शित करते हैं। मुँह पर हाथ रखकर और मुस्कराहट छिपाकर या ठुड्डी पर हाथ रखकर आप व्यावहारिक रूप से आदर्श ‘‘चिंतन मुद्रा’’ प्रदर्शित करते हैं। अब ख़ुद से सिर्फ़ यह प्रश्न पूछें : क्या आप किसी गहरी सोच में डूबे व्यक्ति के विचारों में बाधा डालेंगे ? शायद नहीं। इसके अलावा, हाथों को बाँधने वाली मुद्रा में आप घबराए हुए, विचारणीय या शक्की दिखाई देते है–ये सभी मुद्राएँ सामने वाले व्यक्ति को आप तक आने या आपसे सहज बातचीत करने से रोकती हैं।

कुछ लोग तर्क देते हैं कि हाथों को बाँधे रखने का मतलब यह नहीं है कि वे बातचीत करने से झिझकते हैं। वे सफ़ाई देते हैं, ‘‘मैं अपने हाथ इसलिए बाँधता हूँ, क्योंकि मैं इस मुद्रा में आरामदायक महसूस करता हूँ।’’ वे आरामदायक महसूस कर सकते हैं, पर दिक़्क़त यह है कि कोई भी व्यक्ति दिमाग़ नहीं पढ़ सकता, वह सिर्फ़ बॉडी लैंग्वेज ही समझ सकता है। बँधे हुए हाथ कहते हैं, ‘‘दूर रहो’’ और ‘‘मेरा दिमाग़ व्यस्त है।’’ खुली बाँहें बोलती हैं, ‘‘मैं मिलने के लिए तैयार हूँ और आपकी बातें सुनने का इच्छुक हूँ। मुझसे मिलें और बातचीत करें।’’

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