प्रभावशाली व्यक्ति कैसे बनें - जॉन सी. मैक्सवेल, जिम डॉरनैन Prabhavshali Vyakti Kaise Bane - Hindi book by - John C. Maxwell, Jim Dornan
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प्रभावशाली व्यक्ति कैसे बनें

जॉन सी. मैक्सवेल, जिम डॉरनैन

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्रकाशित वर्ष : 2013
पृष्ठ :242
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7492
आईएसबीएन :9788183220095

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अगर आपमें प्रभावशाली लीडर बनने की इच्छा है, तो आपको इस पुस्तक को बहुत उत्साह से पढ़ने की ज़रूरत है...

Prabhavshali Vyakti Kaise Bane - A Hindi Book - by John C. Maxwell, Jim Dornan

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

चाहे आपका व्यवसाय या महत्वाकांक्षा कुछ भी हो, प्रभावशाली व्यक्ति कैसे बनें पढ़कर आप दूसरों पर अपने प्रभाव को बढ़ सकते हैं।
दूसरों के साथ अधिक सकारात्मक व्यवहार करने के आसान समझदारीपूर्ण तरीक़े सीखें और अपनी तथा अपने संगठन की सफलता को शिखर पर पहुँचते देखें।

* मैनेजर अपने कर्मचारियों को नये उत्साह से प्रतिक्रिया करते देखेंगे।
* माता-पिता अधिक गहरे स्तर पर अपने बच्चों से जुड़ेंगे।
* कोच अपने खिलाड़ियों को विकसित होते देखेंगे।
* पादरी अधिक लोगों के दिल तक अपना सन्देश पहुँचा पायेंगे।
* सेल्समैन बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ देंगे।

अगर आप प्रभावशाली हों, तो आप हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं, चाहे यह आपकी घर हो, ऑफ़िस हो या जीवन का कोई अन्य क्षेत्र हो।
लेखक जॉन मैक्सवेल और जिम डॉरनैन ने अपना अधिकांश जीवन प्रभावकर्ताओं के प्रशिक्षित करने में बिताया है। हास्यबोध, भावना और अद्भुत समझ से वे उस ज्ञान का निचोड़ प्रस्तुत करते हैं, जो उन्होंने व्यावसायिक और अलाभकारी क्षेत्रों में दशकों के अनुभव से हासिल किया है। सबसे अच्छी बात यह है कि उनका ज्ञान व्यावहारिक है और रोज़मर्रा के जीवन में आसानी से अपनाया जा सकता है।

चाहे आप बिज़नेस बनाना चाहते हों, अपने बच्चों को अच्छी तरह से पालना चाहते हों या दुनिया तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हों, आप इस पुस्तक के द्वारा दूसरों के जीवन पर अधिक प्रभाव डाल सकते हैं और सफल हो सकते हैं।

अध्याय एक


प्रभावशाली व्यक्ति...लोगों के प्रति ईमानदार होता है
कुछ साल पहले जब मैं और मेरी पत्नी नैन्सी एक बिज़नेस यात्रा के सिलसिले में यूरोप गये, तो हमने लंदन में उसका जन्मदिन मनाया। तोहफ़े के रूप में मैंने फसे एस्केडा बूटिक ले जाने का फ़ैसला किया, ताकि उसके लिये एक-दो ड्रेस ख़रीद लूँ।

उसने बहुत से कपड़ों को पहनकर देखा और उसे वे सब पसंद आये। जब वह ड्रेसिंग रूम में जाकर यह फ़ैसला करने की कोशिश कर रही थी कि कौन सी ड्रेस ली जाये, तो मैंने सेल्समैन से उन सबको पैक करने को कहा। नैन्सी ने विरोध करने की कोशिश की। वह एक बार में इतने सारे कपड़े ख़रीदने में सकुचा रही थी, परंतु मैं अड़ गया। हम दोनों जानते थे कि वह इन कपड़ों का अच्छा प्रयोग कर सकती थी। इसके अलावा, वह हर ड्रेस में बेहतरीन लग रही थी।

दो दिन बाद हम लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से लंबी उड़ान भरकर सैन फ्रांसिस्को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचे। उतरने के बाद हम कस्टम चेकिंग की लाइन में लग गये। जब हमसे पूछा गया कि क्या हमारे पास घोषित करने के लिए कुछ है, तो हमने उन्हें नैन्सी के ख़रीदे कपड़ों और उनकी क़ीमत के बारे में बताया।

एजेंट बोला, ‘क्या ? आप कपड़ों की घोषणा कर रहे हैं ?’’ हमारी लिखी कपड़ों की संख्या को पढ़कर वह बोला, ‘‘आप मज़ाक़ कर रहे होंगे !’’ यह सच है कि हमने कपड़ों पर थोड़ा पैसा ख़र्च कर दिया था, परंतु हमें नहीं लगता था कि यह इतना बड़ा मामला है। उसने पूछा, ‘‘कपड़े किस चीज़ से बने हैं ?’’
यह एक अजीब सवाल था। नैन्सी बोली, ‘‘अलग-अलग चीज़ों से। ऊन, कपास, रेशम। हर चीज़ अलग है। ड्रेस, कोट, ब्लाउज़, जूते, बेल्ट जैसा आलग-अलग सामान है। क्यों ?’’

वह बोला, ‘‘अलग-अलग तरह के कपड़ों पर अलग-अलग ड्यूटी लगती है। मैं अपने सुपरवाइज़र को बुलाकर लाता हूँ। यहाँ तक कि मैं भी नहीं जानता कि ड्यूटी की अलग-अलग दरें क्या हैं। कोई भी कपड़ों की घोषणा नहीं करता।’’ वह परेशान दिख रहा था। ‘‘आगे आकर हर चीज़ को बाहर निकाल दीजिए और जिस चीज़ से यह बने हैं, उसके आधार पर इन्हें अलग-अलग कर दीजिए।’’ जब हमने अपने बैग खोले, तो वह चला गया और हमने सुना कि वह एक सहकर्मी से बोल रहा था, ‘‘बॉबी, तुम्हें इस बात पर यक़ीन नहीं होगा...’’

हर चीज़ को अलग-अलग करने और उनकी क़ीमत जोड़ने में लगभग पैंतालीस मिनट लग गये। ड़्यूटी अच्छी ख़ासी निकल आई–लगभग दो हज़ार डॉलर। जब हम अपना सामान दुबारा सूटकेस में भर रहे थे, तो एजेंट बोला, ‘‘मुझे लगता है मैं आपको जानता हूँ। आप जिम डॉरनैन हैं ना ?’’
‘‘हाँ,’’ मैंने जवाब दिया। ‘‘माफ़ कीजिये, क्या हम पहले मिल चुके हैं ?’’ मैं उसे पहचान नहीं पाया था।
उसने कहा, ‘‘नहीं। परंतु मेरा एक मित्र है, जो आपके संगठन में है। नेटवर्क 21 ठीक है ?’’
मैंने कहा, ‘‘ठीक है।’’

एजेंट बोला, ‘‘मैंने आपकी तस्वीर देखी है। आप जानते हैं, मेरा मित्र मुझसे कह रहा था कि आपके संगठन में शामिल होने से जुड़ने से मुझे बहुत फ़ायदा होगा। परंतु मैंने उसकी बात नहीं सुनी। अब मैं सोच रहा हूँ कि इस पर दुबारा विचार करूँ। हो सकता है वह सही हो। देखिये, मैं हर दिन देखता हूँ कि ज़्यादातर लोग कस्टम से हर तरह की चीज़ें बिना ड्यूटी दिये ले जाने की कोशिश करते हैं–ऐसा सामान भी, जिसके बारे में उन्हें पता होता है कि उस पर ड्यूटी लगेगी। परंतु आप लोगों ने तो ऐसा सामान घोषित किया, जिसे आप बिना किसी दिक़्क़त के ले जा सकते थे। आप अपना बहुत सा पैसा बचा सकते थे !’’
नैन्सी ने जवाब दिया, ‘‘हो सकता है कि यह सच हो, परंतु मैं कस्टम में पैसा न देने के बजाय अंतरात्मा को साफ़ रखना ज़्यादा पसंद करूँगी।’’

जब हम उस दिन लाइन में खड़ थे, तो मुझे या नैन्सी को यह नहीं लगा था कि वहाँ पर कोई हमें पहचान सकता है। अगर हमारा इरादा धोखा देने का होता, तो हमें यह संदेह कभी नहीं हुआ होता कि कोई हमें पहचान लेगा। हम सोच रहे थे कि हम अनजान हैं। और मुझे लगता है कि बहुत से लोग जब जीवन में ईमानदारी से कन्नी काटते हैं, तो वे भी यही सोचते हैं। वे ख़ुद से कहते हैं, ‘‘किसे पता चलेगा ?’’ परंतु सच्चाई यह है कि बाक़ी लोगों को पता चल जाता है। आपका जीवनसाथी, बच्चे, मित्र और बिज़नेस सहयोगी सब आपकी हक़ीक़त जानते हैं। और इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि चाहे आप इसे सचमुच अच्छी तरह छुपा भी लें और उन्हें आपके इरादों का पता न चल पाये, तब भी आपको तो पता होता ही है ! आपको अपनी ईमानदारी किसी भी क़ीमत पर छोड़ना या बेचना नहीं चाहिये।

कस्टम एजेंट के साथ जिस का अनुभव एक छोटा सा उदाहरण है कि जब ईमानदारी की बात आती है, तो आजकल लोग किस तरह सोचते हैं यह कहते हुए दुख होता है कि ईमानदारी आजकल दुर्लभ हो गई है और जब किसी ईमानदार व्यक्ति के कार्यों का उदाहरण सामने आता है, तो कई लोगों को झटका लगता है। सामान्य नैतिकता अब सामान्य नहीं है।
वास्तविक ईमानदारी बिकाऊ नहीं होती

आप देख सकते हैं कि चरित्र के मुद्दे जीवन के हर पहलू में उभरकर सामने आते हैं। उदाहरण के लिये कुछ साल पहले फ़ाइनैंसर इवान बोस्की ने उक्ला बिज़नेस स्कूल में बोलते समय खुलेआम कहा था कि लोभ ‘‘एक अच्छी चीज़’’ है। इस दोषपूर्ण चिंतन ने उन्हें जल्दी ही मुश्किल में डाल दिया। जब वॉल स्ट्रीट में उनकी अनैतिक करतूतों का भंडाफोड़ हुआ, तो उन पर 10 करोड़ डॉलर का ज़ुर्माना हुआ और उन्हें तीन साल के लिये जेल भेज दिया गया। हाल ही में यह पता चला कि वे आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं और अपनी पूर्व पत्नी के ग़ुज़ारा-भत्ते पर जी रहे हैं।

आज ईमानदारी की जितनी ज़रूरत है, उतनी पहले कभी नहीं रही। और जो प्रभावशाली व्यक्ति बनना चाहता है, उसके लिये तो यह अनिवार्य है।
सरकार भी ईमानदारी के मुद्दे पर कटघरे में खड़ी दिखती है। सरकारी अधिकारियों पर पहले से अधिक संख्या में मुकदमें चल रहे हैं। हाल ही में न्याय विभाग ने यह दावा किया कि इसने एक साल में 1100 से अधिक सरकारी अधिकारियों को अपराधी सिद्ध किया, जो एक संदिग्ध रिकॉर्ड है।

आप जिधर भी देखते हैं, आपको नैतिक पतन के उदाहरण नज़र आते हैं। टी.वी. पर उपदेश देने वाले नैतिक रूप से गिरते हैं, माताएँ अपने बच्चों को डुबा देती हैं, प्रोफ़ेशनल खिलाड़ी होटल के कमरों में नशीले पदार्थों और वेश्याओं के साथ पकड़े जाते हैं। सूची लंबी होती जाती है। ऐसा लगता है कि ज़्यादातर लोग ईमानदारी को दक़ियानूसी विचार मानते हैं, जो हमारी तेज़रफ़्तार दुनिया में अब लागू नहीं होता और जिसके बिना काम चलाया जा सकता है। परंतु वास्तविकता यह है कि आज ईमानदारी की जितनी ज़रूरत है, उतनी पहले कभी नहीं रही। और जो प्रभावशाली व्यक्ति बनना चाहता है, उसके लिये तो यह अनिवार्य है।

अपनी बेस्टसेलिंग पुस्तक सेवन हैबिट्स ऑफ हाइली इफेक्टिव पीपुल में स्टीफन कोवी ने व्यक्ति की सफलता में ईमानदारी के महत्व के बारे में लिखा है :
अगर मैं लोगों को प्रभावित करने की तकनीकों या रणनीतियों का प्रयोग इस उद्देश्य से करूँ कि किस तरह लोगों से अपना मनचाहा या बेहतर काम करवाऊँ, किस तरह उन्हें अधिक प्रेरित करूँ, ताकि वे मुझे तथा एक-दूसरे को अधिक पसंद करें–जबकि मेरा चरित्र मूलभूत रूप से दोषपूर्ण और छल-कपट से भरा हो–तो मैं अधिक समय तक सफल नहीं हो सकता। मेरे छल-कपट की वजह से अविश्वास उत्पन्न होगा और मेरे हर काम को (जिसमें तथाकथित लोक-व्यवहार की अच्छी तरह तकनीकों का प्रयोग भी शामिल है) जोड़-तोड़ या चालाकी माना जायेगा।

इसमें ज़रा भी फ़र्क नहीं पड़ता कि शब्दों का जाल कितना अच्छा है या इरादे कितने नेक हैं। मूल बात यह है कि अगर विश्वास नहीं है या बहुत कम है, तो स्थायी सफलता की नींव ही नहीं है। सिर्फ़ मूलभूत अच्छाई ही तकनीकों को सफल बनाती है।

व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में सफलता के लिये ईमानदारी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। उक्ला ग्रैजुएट स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट तथा न्यूयॉर्क सिटी के कॉर्न/फेरी इंटरनेशनल ने संयुक्त रूप से 1300 वरिष्ठ एक्ज़ीक्यूटिव्ज़ का सर्वे करवाया। उनमें से 71 प्रतिशत ने कहा कि बिज़नेस में सफल होने के लिये सबसे आवश्यक गुण ईमानदारी या अखंडता है। और सेंटर फ़ॉर क्रिएटिव रिसर्च द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह पता चला कि जो व्यक्ति संगठन के शिखर तक पहुँचना चाहता है, वह बहुत सी ग़लतियों और बाधाओं के बावज़ूद वहाँ पहुँच सकता है, परंतु अगर वह विश्वासघात करके अपनी ईमानदारी का समझौता करता है, तो वह कभी अपने संगठन में इतनी ऊँचाई तक नहीं पहुँच पायेगा

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