सबसे मुश्किल काम, सबसे पहले - ब्रायन ट्रेसी Sabse Mushkil Kaam Sabse Pahale - Hindi book by - Brian Tracy
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सबसे मुश्किल काम, सबसे पहले

ब्रायन ट्रेसी

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :169
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7772
आईएसबीएन :9788183221801

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लक्ष्य निर्धारित और हासिल करने का एक शक्तिशाली फ़ॉर्मूला है, जिसका इस्तेमाल आप ज़िंदगी भर कर सकते हैं। इसके सात आसान क़दम हैं...

Sabse Mushkil Kaam Sabse Pahale - by Brain Tracy

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

सबसे महत्वपूर्ण काम करना सीखें-आज ही !
 
हमारे पास कामों की एक लंबी सूची हमेशा होती है। हम बहुत कुछ करना चाहते हैं। लेकिन हमारे पास इसके लिए समय ही नहीं होता – और न ही कभी होगा। सफल लोग सारे काम करने की कोशिश नहीं करते। वे सबसे महत्त्वपूर्ण कामों पर ध्यान केंन्द्रित करते हैं और फिर लगन के साथ उन्हें पूरा करते हैं।

पश्चिम में एक कहावत है कि अगर आप हर सबुह सबसे पहले एक जिंदा मेंढक निगल लें, तो आप यह तसल्ली रख सकते हैं कि दिन भर में आपको इससे बुरा कुछ और नहीं करना पड़ेगा। ‘‘मेंढक निगलने’’ की तुलना दिन के सबसे चुनौतीपूर्ण काम से करें–जिस काम में आपके टालमटोल करने की सबसे ज्यादा आशंका है, लेकिन शायद उसी का आपके जीवन पर सबसे सकारात्मक असर पड़ेगा–यह पुस्तक बताती है कि आप अपने महत्त्वपूर्ण काम कैसे निबटाएँ और हर दिन की योजना कैसे बनाएँ। इससे आप न सिर्फ़ ज़्यादा तेज़ी से काम करना सीख पाएँगे, बल्कि प्राथमिकता के हिसाब से काम करना भी सीखेंगे।
 
बेस्टसेलिंग लेखक ब्रायन ट्रेसी मुद्दे की बात बताते हैं, जो असरदार समय प्रबंधन के लिए अनिवार्य है: निर्णय, अनुशासन और संकल्प। वे बिल्कुल नई जानकारी देते हैं कि आप टेक्नोलॉजी को किस तरह अपने समय पर हावी होने से रोक सकते हैं। वे ऐसे 21 व्यावहारिक क़दम बताते हैं, जो टालमटोल छोड़ने और ज़्यादा महत्त्वपूर्ण काम पहले करने में आपकी मदद करेंगे–आज ही!

ब्रायन ट्रेसी मानव क्षमता और व्यक्तिगत प्रभाव के विकास के क्षेत्र में अमेरिका के अग्रणी विशेषज्ञ हैं। वे व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के विषय पर हर साल ढाई लाख से ज्यादा लोगों को संबोधित करते हैं। ट्रेसी ने कई बेस्टसेलिंग पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें मैक्सिमम एचीवमेंट, गोल्स, और द 100 एब्सॉल्यूटली अनब्रेकेबल लॉज़ ऑफ़ बिज़नेस सक्सेस शामिल हैं। इसके अलावा उनके बेशुमार बेस्टसेलिंग ऑडियो प्रोग्राम्स भी ख़ासे लोकप्रिय हैं, जिनमें द साइकोलॉजी ऑफ़ एचीवमेंट और हाऊ टु स्टार्ट एंड सक्सीड इन युअर ओन बिज़नेस शामिल हैं।

1 दावत की मेज़ सजा लें

जीतने के लिए आपमें एक गुण होना ही चाहिए। वह है निश्चित उद्देश्य–यह ज्ञान कि आप क्या चाहते हैं–और उसे हासिल करने की तीव्र इच्छा

नेपोलियन हिल

अपना ‘‘मेंढक’’ चुनने और उसे निगलने से पहले आपको स्पष्ट रूप से यह तय कर लेना चाहिए कि आप ज़िंदगी के हर क्षेत्र में क्या हासिल करना चाहते हैं। स्पष्टता शायद निजी उत्पादकता की सबसे अहम अवधारणा है। कुछ लोगों के ज़्यादा तेज़ी से ज़्यादा काम करने का सबसे प्रमुख कारण यही है कि उनके लक्ष्य और उद्देश्य एकदम स्पष्ट होते हैं। इसीलिए वे राह नहीं भटकते। आप क्या चाहते हैं और उसे पाने के लिए आपको कौन से क़दम उठाने होंगे, इन बिंदुओं के बारे में आप जितने ज़्यादा स्पष्ट होंगे, टालमटोल छोड़ना मेंढक निगलना और हाथ का काम पूरा करना उतना ही ज़्यादा आसान होगा।

टालमटोल करने और प्रेरणा की कमी का ख़ास कारण यह होता है कि आपकी मानसिकता अस्पष्ट, दुविधापूर्ण और धुँधली होती है। आपको ठीक-ठीक पता ही नहीं होता कि आप क्या, किस क्रम में और किस कारण करने की कोशिश कर रहे हैं। आमतौर पर सभी के सामने आने वाली इस स्थिति से बचने के लिए आपको एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देना चाहिए। अपने प्रमुख लक्ष्यों और कामों को ज़्यादा स्पष्ट करने की कोशिश करें।

यहाँ पर सफलता का एक महान नियम बताया जा रहा है : का़गज़ पर सोचें।

सिर्फ़ 3 प्रतिशत वयस्कों के पास ही स्पष्ट लिखित लक्ष्य होते हैं। ये लोग समान योग्यता या बेहतर शिक्षा वाले उन लोगों से पाँच-दस गुना ज़्यादा हासिल कर लेते हैं, जो जाने क्यों यह लिखने का वक़्त कभी नहीं निकाल पाते कि वे दरअसल क्या चाहते हैं।
 
लक्ष्य निर्धारित और हासिल करने का एक शक्तिशाली फ़ॉर्मूला है, जिसका इस्तेमाल आप ज़िंदगी भर कर सकते हैं। इसके सात आसान क़दम हैं। अगर आपने अब तक ये क़दम उठाना शुरू नहीं किया है, तो इनमें से कोई भी क़दम आपकी उत्पादकता को दो-तीन गुना बढ़ा सकता है। मुझसे सीखने वाले कई लोगों ने सात हिस्सों की इस सरल विधि की बदौलत सिर्फ़ कुछ सालों–कई बार तो चंद महीनों में ही–अपनी आमदनी नाटकीय ढंग से बढ़ा ली।

पहला क़दम : स्पष्ट रूप से तय करें कि आप चाहते क्या हैं। इस बारे में आप खुद फ़ैसला कर सकते हैं या फिर बॉस के साथ बैठकर अपने लक्ष्यों और उद्देश्यों पर बातचीत कर सकते हैं, जब तक कि आपके सामने यह एकदम स्पष्ट न हो जाए कि आपसे क्या अपेक्षा की जाती है और प्राथमिकता के किस क्रम में की जाती है। हैरानी की बात यह है कि बहुत सारे लोग सिर्फ़ इसलिए हर दिन कम मूल्यवान काम करते चले जाते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने मैनेजर के साथ ऐसी महत्वपूर्ण बातचीत कभी की ही नहीं है।


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