संन्यासी जिसने अपनी संपत्ति बेच दी - रॉबिन शर्मा Sanyasi Jisane Apani Sampatti Bech Di - Hindi book by - Robin Sharma
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संन्यासी जिसने अपनी संपत्ति बेच दी

रॉबिन शर्मा

प्रकाशक : जयको बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :227
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7840
आईएसबीएन :81-7992-494-7

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बैस्ट सैलिंग पुस्तक ‘द मांक हू सोल्ड हीज़ फ़रारी’ का हिन्दी रूपान्तरण...

Sanyasi Jisane Apani Sampatti Bech Di - A Hindi Book - by Robin Sharma

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

बैस्ट सैलिंग पुस्तक ‘द मांक हू सोल्ड हीज़ फ़रारी’ का हिन्दी रूपान्तरण अपने सपनों को पूरा करने और भाग्य का निर्माण करने की कथा एक मनमोहक कहानी, जो आनन्द के साथ शिक्षा भी प्रदान करती है।

—पॉलो कोयल्हो, लेखक ‘द एलकेमिस्ट’

ज्ञान, जो आपके जीवन को उत्साह, उद्देश्य और शान्ति प्रदान करेगा संवेदनात्मकता से कम कुछ भी नहीं है। यह पुस्तक आपके जीवन को परिपूर्णता प्रदान करेगी।

—मार्क विक्टर हैन्सन, ‘चिकन सूप फोर द सोल’ के सहलेखक

रॉबिन एस. शर्मा ने एक मन्त्रमुग्ध कर देनेवाली कहानी की रचना की है, जिसमें रूपान्तरण के शास्त्र सम्मत साधनों को जीवन जीने के सरल दर्शन के रूप में शामिल किया है। एक प्रसन्नता प्रकान करनेवाली पुस्तक, जो आपका जीवन परिवर्तित कर देगी !

—इलेन सेंट जेम्स, लेखक सिम्पलीफाई योर लाईफ एंड इनर सिम्पलीसिटी।

यह प्रेरणादायक कहानी हमें क्रमशः उत्साह, सन्तुलन, समृद्धि और आनन्द से जीने को प्रेरित करती है। ‘संन्यासी जिसने अपनी संपत्ति बेच दी’ एक आश्चर्यजनक नीतिकथा है। यह पुस्तक ‘द मांक हू सोल्ड हीज़ फ़रारी’ का हिन्दी अनुवाद है, जो हमें जूलियन मेंटले के जीवन से अवगत कराती है। मेंटले जो वकालत के पेशे से जुड़े हुए थे और अपनी असन्तुलित जीवन-शैली से पूरी तरह हताश थे। वह अपने पेशे, धन-दौलत सभी को त्यागकर हिमालय की चोटियों में गए और वहां सिवाना के सन्तों से उन्हें जो ज्ञान प्राप्त हुआ उसी का निचोड़ यह पुस्तक हमें बताती है कि :
  • आनन्दपूर्ण विचारों का विकास करें
  • जीवन की आवश्यकताओं और उद्देश्यों को अनुसरण करें
  • आत्मानुशासन को परिष्कृत करें और साहसपूर्ण ढंग से कार्य करें
  • समय की उपयोगिता को समझें
  • अपने रिश्तों को पोषण दें और हर समय परिपूर्णता से जिएं।

  • रॉबिन एस. शर्मा एल.एल.एम. (L.L.M) नॉर्थ अमेरिका के विस्तृत रूप से विद्युन्मय करनेवाले व्यावसायिक वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। लीडरशीप और लाईफ इम्प्रूमेंट के क्षेत्र में नए चमकनेवाले रॉबिन एस. शर्मा के विषय में अन्य जानकारी हेतु www.robinsharma.com पर सम्पर्क करें।

    जिन्दगी मेरे लिए मात्र एक मोमबत्ती नहीं है। यह एक वैभवशाली टॉर्च है, जिसे मैंने कुछ समय के लिए थाम रखा है, और मैं इसे नई पीढ़ी के सुपुर्द करने से पहले जितना अधिक सम्भव हो इससे चारों ओर प्रकाश फैलाना चाहता हूँ।

    –जॉर्ज बर्नार्ड शाह

    जागरण का आह्वान


    अदालत के खचाखच भरे एक कमरे के बीचों-बीच वह अचानक गिर पड़ा। वह इस देश के सुप्रसिद्ध अभियोजन वकीलों में से एक था। वह एक ऐसा व्यक्ति था, जो अपने सुगठित शरीर की शोभा बढ़ानेवाले तीन-तीन हजार डॉलत के कीमती सूटों के लिए भी उतना ही विख्यात था जितना कि कानूनी जीतों की उल्लेखनीय श्रृंखला के लिए। मैंने जो कुछ अभी देखा था उसके आकस्मिक आघात् से सन्न खड़ा रह गया। प्रतिष्ठित जूलियन मेंटले बीमारी का शिकार हो गया था और अब वह असहाय अबोध शिशु की तरह जमीन पर पड़ा तड़प रहा था और पागल की तरह कांप रहा था तथा साथ ही पसीने से तरबतर था।

    उस क्षण ऐसा अनुभव हुआ मानो समय की गति धीमी हो गई है। हे भगवान, जूलियन संकट में है!’ उनकी सहायक वकील भावुकता से चीखी। हम सबकी दृष्टि उस ओर गई। न्यायाधीश महिला भी दुखी दिखाई दी। उन्होंने तुरन्त अपने निजी फोन पर, जो उन्होंने आकस्मिक स्थिति में उपयोग के लिए लगलाया था, धीरे-से कुछ कहा। जहां तक मेरा सवाल है, मैं तो हक्का-बक्का स्तब्ध खड़ा रह गया। अरे अनुभवी मूर्ख, अभी मत मरो। अभी तुम्हारा मरना बहुत जल्दबाजी होगी। तुम्हें इस तरह मरना शोभा नहीं देता।

    न्यायालय का मोहर्रिर जो अब तक यन्त्रवत् खड़ा था, एकदम गति में आ गया और भूमि पर पड़े हुए विधिनायक की सी.पी.आस. बनानी शुरू कर दी। सहायक वकील उनके पास ही खड़ी थी। उसके लम्बे, सुनहरे, घुंघराले बाल जूलियन के लाल चेहरे पर पड़ रहे थे। वह उसे कोमल शब्दों में सांत्वना दे रही थी, जो निश्चय ही उसे सुनाई नहीं दे रहे थे।

    मैं पिछले 17 वर्षों से जूलियन से परिचित था। हमारी पहली मुलाकात तब हुई थी जब मैं कानून का युवा विद्यार्थी था और मुझे उसके किसी पार्टनर ने समर रिसर्च इंटर्न के रूप में रखा था। उस समय भी उसके पास सब-कुछ था। वह प्रतिभावान, सुन्दर और निडर जिरह करनेवाला वकील था। वह प्रसिद्धि के स्वप्न देखता था; भविष्य में जिसे बहुत ही सफल वकील बनना था। मुझे आज भी वह दिन याद है जब एक बार मैं देर रात काम करके उसके भव्य ऑफिस के पास से गुजर रहा था, तो मैंने चुपके से उसकी लकड़ी की विशाल डेस्क की तरफ नज़र डाली। मैंने देखा कि उस पर चौखटे में एक उद्धरण जड़ा हुआ था। यह उद्धरण विंसटन चर्चिल का था तथा जूलियन के बारे में बिल्कुल सही था। :

    मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज हम अपने भाग्य के निर्माता हैं, जो काम हमारे सामने है वह हमारी शक्ति से परे नहीं है, तथा इसको पूरा करने के लिए जो कष्ट सहना पड़ेगा और जो परिश्रम करना पड़ेगा वह भी हमारी सहनशक्ति से अधिक नहीं है। जब तक हमें अपने प्रयोजन और जीतने की अजेय इच्छाशक्ति पर विश्वास है, सफलता हमसे दूर नहीं रह सकती।

    जूलियन ने इसी का अनुकरण किया। वह कठोर परिश्रमी व्यक्ति था और सफलता प्राप्त करने के लिए, जिसे वह अपनी नियति समझता था, दिन में 18 घंटे कार्य करना पसन्द करता था। मैंने लोगों के मुंह सुना था कि उसके पितामह सुरप्रसिद्ध सभासदे रहे थे और उसके पिता फेडेरल कोर्ट के अत्यन्त सम्मानित न्यायाधीश के पद पर रहे थे। यह स्पष्ट था कि वह धनी परिवार से था। उससे उसके परिवार को बड़ी आशाएं थीं। एक बात तो मुझे स्वीकार करनी पड़ेगी कि उसने अपना जीवन स्वयं बनाया था। वह अपने तरीके से काम करने का आदी था और उसे दिखावा भी पसन्द था। न्यायालय में जूलियन के आक्रामक नाटकीय कथन सुर्खियों में रहा करते थे। धनवान प्रतिष्ठित लोगों को जब कभी कुशल कानूनी विशेषज्ञ की तीखी बहस की आवश्यकता होती थी, तब ले जूलियन के पास ही आते थे। उसकी बाहरी गतिविधियां भी विख्यात थीं। नगर के सर्वश्रेष्ठ रेस्त्रां में युवा, सेक्सी मॉडलों के साथ देर रात में जाना अथवा दलालों के उद्दंड दल के साथ मन बहलाव के लिए अत्यधिक शराब पीना उनसे सम्बन्धिक किंवदन्तियों के आधार थे।

    मुझे आज तक इस बात का पता नहीं चला कि उसने उस सनसनीखेज मर्डर केस के साथ काम करने के लिए, जिस पर उसको गर्मी में बहस करनी थी, मुझे ही क्यों चुना। यद्यपि मैंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से ग्रेजुएशन किया था जहां से उसने भी किया था, फिर भी मैं न तो फर्म का सबसे बुद्धिमान् इंटर्न था और न ही मेरा जन्म उच्च कुल में हुआ था। मेरे पिता ने नौसेना से काम छोड़कर सारी उम्र एक बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी। मेरी मां साधारण तरीके से ब्रॉन्क्स में पली-बढ़ी थीं।

    फिर भी जूलियन ने उन सबमें से, जो चुपचाप उसका साथ सहायक के रूप में काम करने का प्रयत्न कर रहे थे, मुझे उस केस में अपने सहयोगी के रूप में चुना, जो ‘मदर ऑफ ऑल मर्डर ट्रायल्स’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने कहा था कि उसे मेरी ज्ञान प्राप्त करने की ‘तीव्र उत्कंठा’ पसन्द थी। निःसन्देह हम जीत गए और वह प्रशासनिक अधिकारी जिस पर अपनी पत्नी की निर्मम हत्या का अभियोग था, मुक्त हो गया।

    उस ग्रीष्म ऋतु में मुझे काफी अच्छी शिक्षा मिली। यह एक सबक से कहीं अधिक था कि जहां किसी सन्देह का अस्तित्व न हो वहां तर्क-संगत सन्देह कैसे उत्पन्न किया जाए। जूलियन के जैसा पारंगत वकील ही ऐसा कर सकता था। यह जीतने के मनोविज्ञान का एक पाठ था तथा अपने गुरु को बहस करते हुए देखने का एक दुर्लभ असवर। जैसे मैंने स्पंज की तरह इसको आत्मसात् कर लिया।

    जूलियन के आमन्त्रण पर मैं फर्म में एसोसिएट के रूप में रहा और शीघ्र ही हम दोनों में गहरी मित्रता हो गई। मैं इस बात को स्वीकार करूंगा कि उसके साथ वकालत करना आसान नहीं था। जूनियर के रूप में उसके साथ काम करने से निराशा का अनुभव होता था, अक्सर देर रात तक साथ काम करनेवालों पर चीखना-चिल्लाना। वास्तव में यही उसका तरीका था। फिर भी उसके बदमिजाज मुखौटे के पीछे एक ऐसा व्यक्ति था, जो स्पष्टतया लोगों का ध्यान रखता था।

    अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद वह हमेशा जेनी के बारे में अवश्य पूछता था। जेनी के साथ मेरी विवाह कानून की पढ़ाई करने से पहले ही हो गया था और मैं उसको आज भी ‘मेरी दुल्हन’ कहकर पुकारता हूं। दूसरे समर इंटर्न से यह जानकर कि मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जूलियन ने मेरे लिए अच्छी राथि के वजीफे की व्यवस्था कर दी थी। यह सत्य है कि वह अपने मित्रों के साथ कठोरता से पेश आता था, यह भी सत्य है कि उसको उच्छृंखल तरीके से समय बिताना पसन्द था, लेकिन वह उनकी उपेक्षा कभी नहीं करता था। असली समस्या थी कि जूलियन को अत्यधिक काम करने का भूत सवार रहता था।

    प्रारम्भ में कुछ वर्षों तक वह दिन-भर काम करता था तब उसका कहना था कि वह इतनी मेहनत फर्म की भलाई के लिए कर रहा था और अगली शरद् ऋतु में एक महीने की छुट्टी मनाने वह सेमंस जाएगा। जैसे-जैसे समय व्यतीत होता गया उसकी ख्याति बढ़ती गई और उस पर काम का भार बढ़ता ही गया। जूलियन को अच्छे-अच्छे और बड़े-बड़े केस मिलते गए। उसने हर चुनौती का सफलता से सामना किया और उसकी मेहनत बढ़ती ही गई। शान्ति के दुर्लभ क्षणों में उसने यह रहस्योद्घाटन किया कि वह कुछ घंटे ही सो पाता था। उसकी आंख इस अपराधबोध के साथ खुल जाती थी कि वह फाइल पर काम नहीं कर रहा है। यह बात मुझे शीघ्र ही स्पष्ट हो गई कि उसे अत्यधिक सम्मान, प्रसिद्ध तथा धन प्राप्त करने की भूख खाए जा रही थी।

    आशा के अनुसार जूलियन अत्यन्त सफल रहा। उसने हर वह चीज प्राप्त कर ली जिसकी अधिकांश लोग कामना करते हैं। वकालत के व्यवसाय में बड़ी ख्याति के साथ सात अंकों (लाखों) में आमदनी, मानी हुई हस्तियों के पड़ोस में शानदार बंगला, व्यक्तिगत जेट विमान, उष्ण कटिबंधीय द्वीप पर गर्मियों के लिए घर और उसकी बहुमूल्य सम्पत्ति–लाल चमकदार फ़रारी (कार), जो सड़क पर बीचों-बीच पार्क की गई थी।

    फिर भी मैं जानता था कि सब-कुछ इतना सहज नहीं था जितना ऊपर से दिखाई देता था। मुझे आनेवाले खतरे के चिह्न दिखाई देते थे। इसलिए नहीं कि फर्म में दूसरे साथियों से मैं परिचित था बल्कि इसलिए कि जूलियन के साथ मेरा समय सबसे अधिक व्यतीत होता था। हम हमेशा साथ काम करते थे। काम कभी कम नहीं होता था। हमेशा ही एक दूसरा महत्वपूर्ण मुकदमा लाइन पर होता था, जो पिछले मुकदमे से कहीं बड़ा होता था। कितनी भी तैयारी कर लो जूलियन के लिए पर्याप्त नहीं थी। न्यायाधीश ने यह प्रश्न पूछ लिया या वह प्रश्न पूछ लिया तब क्या होगा ? ईश्वर न करे कि ऐसा हो। यदि हमारी छानबीन सही न हुई तब क्या होगा ? यदि भीड़-भरे कोर्ट रूम में वह हक्का-बक्का रह गया जैसे कि हेड-लाइट्स की तेज रोशनी पड़ने पर हिरन रह जाता है, तब क्या होगा ? इसलिए और अधिक मेहनत करते थे और उसकी छोटी-सी मेहनतकश दुनिया में मेरी भी तेल निचुड़ जाता था। हम घड़ी के दो गुलाम थे और उस स्टील और कांच की बिल्डिंग की चौंसठवीं मंजिल पर मेहनत करते थे जबकि अधिकांश व्यक्ति उस समय अपने परिवार के साथ अपने घर पर होते थे। हम यह सोचते थे कि दुनिया हमारी मुट्ठी में है। सफलता की मृग मरीचिका का भ्रामक पर्दा हमारे ऊपर पड़ा हुआ था।

    जितना अधिक समय मैं जूलियन के साथ व्यतीत करता था, उतना ही अधिक मैं देख सकता था कि वह अपने-आपको रसातल में ले जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता था मनो वह अपने-आपको समाप्त करना चाहता है—किसी भी चीज से उसे कभी सन्तुष्टि नहीं मिलती थी। अंततः उसका विवाह असफल हो गया। उसने अपने पिता के साथ बातचीत बन्द कर दी। यद्यपि उसके पास वह सब-कुछ था जिसकी किसी को कामना होती लेकिन जो कुछ वह तलाश रहा था पता नहीं वह क्या था, वह अब भी उसको नहीं मिला था। ऐसा भावनात्मक स्तर पर, भौतिक स्तर पर तथा आध्यात्मिक स्तर पर स्पष्ट दिखाई देता था।


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