नया साहित्य नया साहित्यशास्त्र - राधावल्लभ त्रिपाठी Naya Sahitya Naya Sahityashastra - Hindi book by - Radhavallabh Tripathi
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नया साहित्य नया साहित्यशास्त्र

राधावल्लभ त्रिपाठी

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :143
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 8167
आईएसबीएन :9788126714636

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प्रख्यात साहित्यकार, समीक्षक तथा संस्कृत के विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी की काव्यशास्त्र पर तीसरी पुस्तक

Naya Sahitya Naya Sahityashastra by Radhavallabh Tripathi

प्रस्तुत है पुस्तक के कुछ अंश

‘नया साहित्य : नया साहित्यशास्त्र’ प्रख्यात साहित्यकार, समीक्षक तथा संस्कृत के विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी की काव्यशास्त्र पर तीसरी पुस्तक है। यह संस्कृत काव्यशास्त्र के अलंकार प्रस्थान की व्यापक वैचारिक और संरचनात्मक आधारभूमि को रेखांकित करती है। अलंकार की व्यवहारिक परिणतियों और अलंकार विमर्श की व्यापक अर्थवत्ता को आज के साहित्य के सन्दर्भ में यहाँ परखा गया है। अलंकार तत्त्व की इसमें प्रस्तुत नई व्याख्या उसकी अछूती सम्भावनाएँ खोलती है तथा साहित्य के अध्ययन के लिए संरचनावादी काव्यशास्त्र की एक भूमिका निर्मित करती है। संस्कृत के प्रख्यात कवियों के साथ हिन्दी कवियों में निराला और मुक्तिबोध तथा बोरिस पास्तरनाक जैसे रूसी रचनाकारों और मिलान कुन्देरा जैसे उत्तर-आधुनिक युग के लेखकों तक की मीमांसा लेखक ने निर्भीकता के साथ यहाँ की है।

लेखक का मानना है कि पश्चिम में सस्यूर, ससून लैंगर, चॉम्स्की आदि के प्रतिपादन तथा उत्तर-आधुनिकतावादी के सन्दर्भ में भारतीय काव्यचिंतन के अलंकार तत्त्व की महती पीठिका पुनः उजागर करना जरूरी है।



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