आराधना - सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला Aaradhana - Hindi book by - Suryakant Tripathi Nirala
लोगों की राय

अतिरिक्त >> आराधना

आराधना

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :100
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 8339
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 8 पाठकों को प्रिय

333 पाठक हैं

आराधना पुस्तक का किंडल संस्करण



आराधना के गीत निराला काव्य के तीसरे चरण में रचे गए हैं, मुख्यतया 24 फरवरी 1952 से आरंभ करके दिसम्बर 1952 के अंत तक। इन गीतों से यह भ्रम हो सकता है कि निराला पीछे की ओर लौट गए हैं। वास्तविकता यहा है कि धर्म-भावना निराला में पहले भी थी, वह उसमें अंत-अंत तक बनी रही। उनके इस चरण के धार्मिक काव्य की विशेषता यह है कि वह हमें उद्विग्न करता है, आध्यात्मिक शांति निराला को कभी मिली भी नहीं, क्योंकि इस लोक से उन्होंने कभी मुँह नहीं मोड़ा बल्कि उस लोक को अभाव और पीड़ा से मुक्त करने वे कभी सामाजिक और राजनैतिक आंदोलनों की ओर देखते रहे और कभी ईश्वर की ओर। उनकी यह व्यकुलता ही उनके काव्य सबसे बड़ी शक्ति है।’’

हिन्दी-जगत को ‘आराधना’ और उसके स्रष्टा के परिचय की आवश्यकता नहीं है। जीवन में जो कुछ सत्य, सुन्दर और मंगलमय है, वही निराला का आराध्य रहा है। ‘आराधना’ भी उसी जीवनव्यापी अर्चन की एक कड़ी है। अविश्वास के इस अन्धकार युग में ‘आराधना’ के स्वर दीपक-राग की भाँति संगीत और आलोक की समन्वित सृष्टि करने में समर्थ होंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।



अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book