अवतरण - गुरुदत्त Avtaran - Hindi book by - Gurudutt
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गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :300
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 8344
आईएसबीएन :0

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Avtaran a hindi book by Gurudutt - अवतरण - गुरुदत्त



हिन्दुओं में यह किंवदंति है कि यदि महाभारत की कथा की जायें तो कथा समाप्त होने से पूर्व ही सुनने वालों में लाठी चल जाती है।
एक बार हमारे मुहल्ले के एक मन्दिर में महाभारत की कथा रखायी गयी। यह वे दिन थे, जब आर्यसमाज और सनातनधर्म सभा में शास्त्रार्थों की धूम थी। मुहल्ले के कुछ सनातनधर्मी युवको में धर्म ने जोश मारा और वे हिन्दुओं की प्रसिद्ध धर्म-पुस्तक महाभारत की कथा कराने लगे।

उस समय एक वयोवृद्ध पण्डित ने कहा था, ‘‘ये नौजवान ठीक नहीं कर रहे। इसका परिणाम ठीक नहीं होगा। हिन्दुओं में रामायण की कथा होती है, परन्तु महाभारत की नहीं।’’
मैं इस बात को इस प्रकार समझा कि प्रचलित हिन्दू-धर्म में कुछ है, जो महाभारत में लिखे हुए के अनुकूल नहीं। मेंरे विस्मय का ठिकाना नहीं रहा, जब कथा में आदि पर्व के समाप्त होने से पूर्व ही एक दिन श्रोतागणों में मुक्का-मुक्की हो गयी। बात पुलिस तक गयी और बहुत कठिनाई से दोनों दलों में सन्धि करायी गयी। तब से मैं इस विषय पर बहुत मनन करता हूँ। कई बार महाभारत पढ़ा है। इस किंवदंति और महाभारत के पाठ की, मेंरे मन पर हुई प्रति-क्रिया का परिणाम यह पुस्तक है।

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