धर्मयोग नाइन्टी - सरश्री Dharmayog Ninety - Hindi book by - Sirshree
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धर्मयोग नाइन्टी

सरश्री

प्रकाशक : तेजज्ञान ग्लोबल फाउण्डेशन प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :256
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8758
आईएसबीएन :9788184152722

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आज विश्‍व को नए धर्म की नहीं बल्कि सभी धर्मों को जोड़नेवाले धागे की जरूरत है और यह धागा है- ‘समझ’ का।

Dharmayog Ninety

धर्म का धागा - एक छूटी हुई कड़ी

आज विश्‍व को नए धर्म की नहीं बल्कि सभी धर्मों को जोड़नेवाले धागे की जरूरत है और यह धागा है- ‘समझ’ का। अलग-अलग धर्मों में एक ही सत्य की ओर इशारा किया गया है। फिर वह ‘इन्शाह अल्लाह’ कहें, ‘दाय विल बी डन’ कहें, ‘तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो’ कहें, ‘जो हुकुम’ कहें या ‘तेरा तुझको अर्पण’ कहें। ये सारे शब्द एक ही अर्थ रखते हैं, जो ईश्‍वर, अल्लाह, प्रभु, गॉड या वाहेगुरु की सराहना और समर्पण करने के लिए कहे गए हैं। इसलिए आज स्वयं में यह समझ जगाने की आवश्यकता है कि अलग-अलग भाषाओं में एक की ही सराहना की गई है। केवल नाम अलग होने से सत्य या ईश्‍वर या स्रोत या स्वअनुभव (स्वभाव) या धर्म अलग नहीं हो जाता।

इसी तथ्य पर आधारित इस पुस्तक में ‘धर्म’ इस विषय की स्पष्टता के साथ-साथ अलग-अलग धर्मों की जानकारी दी जा रही है ताकि लोग समझ सकें कि सभी धर्मों का सार एक ही है। आज आप जिस भी धर्म को मानते हों, जरूर मानें; किसी को भी अपना धर्म बदलने या छोड़ने के लिए नहीं कहा जा रहा है बल्कि उसमें आपको जोड़नी है ‘समझ’।



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