मोक्ष - सरश्री Moksh - Hindi book by - Sirshree
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मोक्ष

सरश्री

प्रकाशक : तेजज्ञान ग्लोबल फाउण्डेशन प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :248
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8764
आईएसबीएन :9788184150063

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मोक्ष - अंतिम सफलता का राजमार्ग

Ek Break Ke Baad

मोक्ष की प्रचलित संकल्पनाओं को भेदनेवाली, मनुष्य के जीवन का सत्य बतानेवाली, मोक्ष जैसे अछूते और क्लिष्ट विषय को उजागर करनेवाली और पाठकों (साधक) का जीवन परिवर्तन करनेवाली पुस्तक है ‘मोक्ष’। मोक्ष यानी मुक्ति... भय से, चिंता से, शारीरिक बंधनों से भी... मोक्ष के बाद केवल आनंद ही होता है। शब्दों में बयान न किया जानेवाला मगर हर क्षण अनुभव के तौर पर जाननेवाला, जीवन व्याप्त करनेवाला - तेजआनंद। इसी कारण मोक्ष है, सुखी जीवन की कुंजी (गुरुकिल्ली) और अलौकिक सफलता का राजमार्ग। यह तेजसफलता, तेजआनंद, सुखी जीवन यानी मोक्ष कैसे प्राप्त करना है? मोक्ष हमारे जीवन का अंतिम लक्ष्य कैसे? इन सवालों के जवाब इस पुस्तक में आसान करके बताए गए हैं।

मोक्ष... इस कल्पना के संदर्भ में सर्वसाधारण लोगों में प्रचलित एक मान्यता है कि मोक्ष इंसान को उसकी मृत्यु के बाद ही प्राप्त होता है। यह मान्यता किस तरह गलत है, यह आप इस पुस्तक में पढ़नेवाले हैं। हम कौन हैं? इस शरीर की मृत्यु के बाद हम कहाँ जाएँगे? यह ज्ञात होना यानी मोक्ष। इसके लिए मौत का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसी शरीर में, जीते जी यह ज्ञान प्राप्त हो सकता है। इंसान अज्ञान में अपनी विशिष्ट मान्यताएँ, वृत्तियाँ, विचार और विकारों के बहाव में जाकर संकुचित और सीमित जीवन जीता है। हर इंसान को इस पुस्तक द्वारा यह समझ प्राप्त होती है कि मोक्ष हमारे भीतर ही है और हमारे अस्तित्व का एक अभिन्न अंश है। मोक्ष, यह एक गहन विषय है। तेजगुरु सरश्री तेजपारखीजी ने अत्यंत सरल-सहज भाषा में इस विषय पर प्रकाश डालकर, जनसामान्य के लिए मोक्ष का द्वार खोल दिया है। सारी मनुष्य जाति इस पुस्तक से लाभान्वित हो, यही शुभकामना है।



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