सिंगला मर्डर केस - सुरेन्द्र मोहन पाठक Singala Murder Case - Hindi book by - Surendra Mohan Pathak
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सिंगला मर्डर केस

सुरेन्द्र मोहन पाठक

प्रकाशक : राजा पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2014
पृष्ठ :320
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9050
आईएसबीएन :9789383600311

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

सिंगला मर्डर केस सुबह ‘ब्लास्ट’ के आफिस में जनरल शिफ्ट अभी शुरू ही हुई थी जब कि सुनील ने चपरासी मानसिंह को अर्जुन का पता करने को बोला।

अर्जुन न्यूज रूम में मौजूद था, वो तुरन्त सुनील के केबिन में पहुंचा और उसके रूबरू हुआ।
‘‘गुड मार्निंग !’’- वो चहकता सा बोला।
‘‘गुड मार्निग !’’- सुनील बोला-‘‘क्या कर रहा है ?’’
‘‘हाकिम की हाजिरी भर रहा हूं।’’
‘‘हाकिम ! हाकिम कौन है यहां ?’’
‘‘आप ही हैं।’’
‘‘मैं हाकिम हूं ?’’
‘‘मेरे सीनियर हैं तो मेरे तो हाकिम ही हुए न !’’
‘‘कतरनी बहुत चलने लगी है !’’
अर्जुन हंसा।
‘‘शक्ल कैसी बनाई हुई है सुबह सवेरे ?’’
‘‘कैसी बनाई हुई है ?’’
‘‘जैसे दफ्ती का मुखौटा बारिश में पड़ा रह गया हो।’’
‘‘अच्छा वो ! बैठा बोर हो रहा था न !’’
‘‘हूं।’’
‘‘कहिये, कैसे याद किया ?’’
‘‘क्या कर रहा है ? पहले भी पूछा। अब खबरदार जो कहा हाकिम की हाजिरी भर रहा हूं।’’
‘‘कुछ नहीं। खाली हूं।’’
‘‘गुड ! हिमेश सिंगला को जानता है ?’’
‘‘नहीं।’’
‘‘क्या बात है, गुलेगुलजार ! जानने लायक कोई बात नहीं जानता ?’’
‘‘उसमें क्या है जानने लायक ? कैटरीना कैफ के साथ हीरो आ रहा है ?’’
‘‘ऐसा होता तो उसमें हमारे जानने लायक कुछ न होता। बालीवुड हमारा सब्जेक्ट नहीं।’’
‘‘तो ?’’- अर्जुन के माथे पर बल पड़े।
‘‘उसका कल हो गया है।’’
‘‘अरे !’’
‘‘हम न्यूडहाउन्ड हैं। कल मेजर क्राइम है इसलिये कत्ल हमारी टैरीटेरी है, कैटरीना कैफ नहीं। आयी बात समझ में ?’’
‘‘आई।’’
‘‘वो इम्पॉर्टेंट आदमी है सोसायटी में। इम्पॉर्टेंट आदमी का कत्ल इम्पॉर्टेंट न्यूज होता है।’’
‘‘गुरु जी, गुस्ताखी माफ, मैंने कभी ये नाम तक नहीं सुना। मेरी नालायकी ही सही लेकिन हकीकत यही है कि नहीं सुना। क्या इम्पॉर्टेंट है उसमें ? मेरा मतलब है वाट्स हिज क्लेम दु फेम ?’’

‘‘हिमेश सिंगला सिंगला एण्ड सिंगला नाम की स्टॉक ब्रोकर्स फर्म का पार्टनर है।’’
‘‘बस ?’’
‘‘क्या बस ? इम्पॉर्टेंट होने के लिए क्या इतना काफी नहीं ?’’
‘‘मेरे खयाल से तो काफी नहीं ! ऐसी फर्म तो शहर में सैंकड़ों, बल्कि हजारों होंगी !’’
‘‘ठीक ! ठीक ! लेकिन ऐसी किसी और फर्म के पार्टनर का तो कत्ल नहीं हुआ !’’
‘‘यानी इम्पॉर्टेंस कत्ल होने में है, स्टॉक ब्रोकर होने में नहीं है !’’

‘‘स्टॉक ब्रोकर होने में भी है लेकिन कत्ल की वजह से वो इम्पॉर्टेंस दोबाला हो गयी है और ये जमूरा-खुदा उसे जन्नतनशीन करे-हमारी, ‘ब्लास्ट’ की, फौरी तवज्जो का मरकज बन गया है।’’

‘‘हूं।’’

‘‘एक बड़े सम्पन्न परिवार का रौशन चिराग बताया जाता है। यानी कि फाईनांशल फैमिली बैकग्राउन्ड तो बढ़िया है ही, ऊपर से ब्रोक्रेज का उसका अपना बिजनेस भी ऐन फिट है। कैसानोवा जैसी छवि का आदमी था और सोसायटी के लिहाज से पेज थ्री पर्सनैलिटी माना जाता था। शंकर रोड पर कमर्शियल कम्पलैक्स में बढ़िया आफिस है। जो छवि मैंने उसकी बताई, उसकी वजह से शहर के एक खास सर्कट में-डिस्कोज में, नाइट क्लब्स में, हाईएण्ड रेस्टोरेंट्स में-उसकी खास शिनाख्त है...’’

‘‘गुरुजी, मैं रोकने की गुस्ताखी कर रहा हूं, आपकी जुबान में पूछूं तो किस्सा क्या है ?’’
‘‘किस्से के नाम पर अभी इतना ही है कि आज सुबह वो लिंक रोड पर अपने घर के ड्राईंगरूम में मरा पड़ा पाया गया था। वो वहां एक सोफाचेयर पर बैठा हुआ था जबकि किसी ने उसका भेजा उड़ा दिया था।’’

‘‘गोली से ?’’
‘‘नहीं, गुलेल से।’’
‘‘सॉरी ! थोड़ी देर के लिये मेरा खुद का भेजा कहीं उड़ गया था। वारदात की खबर कैसे लगी, किसको लगी ?’’
‘‘उसकी हाउसकीपर को लगी जिसने कि उसे सुबह वहां सोफाचेयर पर मरा पड़ा देखा। उसी ने पुलिस को खबर की और उसके बड़े भाई और फर्म में पार्टनर शैलेश सिंगला को खबर की।’’

‘‘आपको खबर कैसे लगी ?’’

‘‘शैलेश सिंगला से। जो कि मेरा वाकिफ है। अभी थोड़ी देर पहले फोन पर उसने मुझे इस हौलनाक वारदात की बाबत बताया। अब लिंक रोड पहुंच, जा के वारदात को कवर कर।’’

‘‘मैं ?’’
‘‘और कोई यहां दिखाई दे रहा है ?’’
‘‘आप दिखाई दे रहे हैं।’’
‘‘काफी स्मार्ट हो गया है मेरा लख्तेजिगर !’’
‘‘जाता तो मैं हूं क्योंकि नौकरी तो बजानी हुई’’- अर्जुन उठ खड़ा हुआ-‘‘लेकिन एक बात कहने की इजाजत दीजिये।’’

‘‘कौन सी बात ?’’

‘‘मकतूल कोई इम्पॉर्टेंट आदमी नहीं है, नहीं हो सकता, होता तो मुझे मेजने की जगह वारदात को कवर करने आप खुद जाते।’’
‘‘और ?’’
‘‘वो कोई इम्पॉर्टेंट आदमी नहीं तो देख लीजियेगा, ऐन खुल-बन्द केस निकलेगा।’’
‘‘क्या ?’’
‘‘ओपन एण्ड शट केस !’’
‘‘अच्छा है तेरा काम घटेगा। अब हिल।’’
‘‘वहां इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल होगा ?’’
‘‘जा के देख।’’
‘‘अगर वो वहां हुआ तो...’’
तभी फोन की घन्टी बजी।
सुनील ने काल रिसीव की।

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