कामायनी - जयशंकर प्रसाद Kamayani - Hindi book by - Jaishankar Prasad
लोगों की राय

प्राचीन कविताएँ >> कामायनी

कामायनी

जयशंकर प्रसाद

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2015
पृष्ठ :92
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9288
आईएसबीएन :9789350642269

Like this Hindi book 10 पाठकों को प्रिय

363 पाठक हैं

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

जयशंकर प्रसाद (1889-1937) का महाकाव्य कामायनी आधुनिक हिन्दी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति मानी जाती है । इसमें मानवीय संवेदनाओं, विचारों और कर्म का आदान-प्रदान दर्शाया गया है। यह महाकाव्य एक वैदिक कथानक पर आधारित है जिसमें मनु (एक मनुष्य) प्रलय के बाद अपने को बिलकुल भावनाहीन पाता है। फिर कैसे यह अलग-अलग भावनाओं, विचारों और कर्मों में उलझने लगता। कई लोगों का मानना है कि कामायनी के अध्यायों का क्रम इस बात का संकेत देता है कि उम्र के साथ मनुष्य के व्यक्तित्व में कैसे परिवर्तन आता है। यह महाकाव्य छायावादी कविता का सबसे अच्छा उदाहरण माना जाता हैl

प्रथम पृष्ठ

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book