जिन्न - अनिल मोहन Jinn - Hindi book by - Anil Mohan
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जिन्न

अनिल मोहन

प्रकाशक : राजा पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :400
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9404
आईएसबीएन :9789332420250

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

‘‘हमें पक्की खबर मिली है कि कुबेर सिंह दो पैकिट किसी बैंक के लॉकर में या वाल्ट में रखेगा। इसी कारण इस वक्त मैंने आप सबको इकट्ठा किया है।’’ ये शब्द सफेद कमीज वाले ने कहे।

उस काफी बड़े हॉल में पांच फीट चौड़ी और चालीस फीट लम्बी टेबल के गिर्द कुर्सियों पर इस वक्त पांच आदमी मौजूद थे।

सफेद कमीज वाला मदान था।
अन्यो में - नारंग, कपूर, राजन और राहुल थे।
सबके चेहरे इस वक्त गम्भीर नजर आ रहे थे।
‘‘तुम्हें ये खबर किसने दी मदान ?’’ कपूर ने पूछा।

‘‘हमारे उस आदमी ने, जो कुबेर सिंह का साथी बना उसके साथियों में रह रहा है।’’ मदान पुनः कह उठा - ‘‘परसों ही कुबेर सिंह उनके बीच वापस लौटा है। मुझे बताया गया है कि वो घबराया हुआ है।’’

‘‘वो इसलिए घबराया हुआ है कि गजाला जैसी खतरनाक अंतर्राष्ट्रीय मुजरिम का बेहद खास फॉर्मूला ले भागा है। गजाला उसे छोड़ेगी नहीं।’’ कपूर बोला।

मदान ने बारी-बारी सबको देखकर कहा - ‘‘खास बात तो सोचने वाली ये है कि कुबेर सिंह उस फॉर्मूले का सौदा किससे करेगा ?’’
सबकी निगाह मदान पर जा टिकी।
‘‘ये सच में बहुत ही खास सवाल है।’’ नारंग ने गम्भीर स्वर में कहा।
‘‘उसका सौदा हम भी कर सकते हैं।’’ कपूर कह उठा।

नारंग मुस्कराया - ‘‘यही तो मैं कहना चाहता हूं कि कुबेर सिंह वो फॉर्मूला बेचकर दौलत कमाना चाहता होगा। फॉर्मूले को किसी बैंक या वाल्ट में रखने के बाद उसका ग्राहक तलाश करेगा। हमें उसका ग्राहक बन जाना चाहिए। ऐसा बढ़िया मौका फिर नहीं मिलेगा हमें। इससे पहले कि फॉर्मूला पाने के लिए गजाला मैदान में उतरे, हमें फॉर्मूला अपने कब्जे में कर लेना चाहिए।’’

‘‘कुबेर सिंह हमसे सौदा करेगा ?’’ राजन बोला।

‘‘क्यों नहीं करेगा। उसे भी तो फॉर्मूले को बेचने के लिए ग्राहक की जरूरत है। बल्कि वो तो चाहेगा कि जल्द-से-जल्द उसे दौलत मिले और वो ऐसी जगह जा छिपे जहां से गजाला उसे ढ़ूँढ़ न सके।’’

वे चुप से एक-दूसरे को देखने लगे।
‘‘गजाला कुबेर सिंह को छोड़ेगी नहीं।’’

‘‘हमें इस बात से मतलब नहीं कि गजाला और कुबेर सिंह के बीच क्या होता है।’’ मदान ने गर्दन हिलाकर कहा - ‘‘हम चाहतें हैं कि वो फॉर्मूला हमारे हाथ लग जाए। हम चाहते हैं कि गजाला उस फॉर्मूले को न पा सके, इसके लिए हमें तेजी से काम करना होगा। जरा-सी देर बहुत कुछ बिगाड़ देगी।’’

एकाएक कपूर का उठा - ‘‘देवराज चौहान का क्या करना है ?’’
मदान ने कपूर को देखा। सोच-भरे ढंग में देखता ही रहा।

‘‘तीन दिन पहले देवराज चौहान को हमारे आदमी ने देखा। हमें खबर दी। तुमने कहा कि देवराज चौहान पर नजर रखी जाए। तीन आदमी और भेज दिए, जहाँ देवराज चौहान के बारे में खबर करने वाला उस पर नजर रख रहा था। अब स्थिति ये है कि हमारे नौ आदमी बारी-बारी चौबीसों घंटे देवराज चौहान जैसे डकैती मास्टर पर नजर रख रहे हैं। परंतु इससे हमारा क्या मतलब हल होता है। इस तरह वक्त बरबाद करने का क्या फायदा। या तो देवराज चौहान को पकड़ लो या उसे जाने दो। तुम तो जानते हो मदान कि हमारे आदमियों का वक्त कितना कीमती है।’’

‘‘मदान को तुम बेवकूफ समझते हो कपूर।’’ कहते हुए मदान मुस्करा पड़ा।
‘‘क्या कहना चाहते हो ?’’ कपूर की आंखें सिकुड़ीं।

‘‘हमारे आदमियों का वक्त बेशक कीमती है, देवराज चौहान वो चीज है कि मैं तुम्हें नहीं बता सकता। तुम क्या जानते हो देवराज चौहान के बारे में ?’’ मदान की निगाह उसके चेहरे पर जा टिकी।

‘‘यही कि वो डकैती करता है। बहुत डकैतियां की हैं उसने।’’
‘‘बस !’’
‘‘मैं उसके घर-परिवार के बारे में नहीं जानता।’’ कपूर ने उसे घूरते हुए तीखे स्वर में कहा।

‘‘प... परिवार के बारे में जानने के लिए मैं कह भी नहीं रहा।’’ मदान पुनः मुस्कराया - ‘‘मैंने देवराज चौहान के बारे में काफी कुछ जान रखा है। वो खतरनाक...काबिल इंसान है। डकैतियां डालने के अंदाज में उसका जवाब नहीं। डकैती डालने में वो कभी असफल नहीं हुआ। सशक्त योजना बनाता है वो। चुन-चुनकर डकैती के लिए काबिल साथी साथ रखता है। सबसे बड़ी खासियत तो ये है कि डकैती के दौरान वो किसी की हत्या नहीं करता। जान नहीं लेता किसी की। अगर ऐसी नौबत सामने आ जाए तो अपने कदम वापस खींच लेता है।’’

‘‘तुम्हारा मतलब है कि देवराज चौहान हत्या नहीं करता ?’’ कपूर ने होंठ सिकोड़े।


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